Same Sex Marriage: समलैंगिक शादी को भारत में कानूनी दर्जा देने की मांग, अन्य देशों में क्या हैं कानून?
अमेरिका में समलैंगिक शादी एवं अंतरनस्लीय विवाह की रक्षा के कानून को मंजूरी मिल गयी है। इससे पहले अनेक यूरोपीय और दक्षिण अमरीकी देश समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता दे चुके हैं।

Same Sex Marriage: 14 दिसंबर 2022 को एक भारतीय और अमेरिकी नागरिकता वाला समलैंगिक दंपति अपनी शादी को भारत में कानूनी मान्यता दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। उनकी शादी 2014 में अमेरिका में हुई थी और अब वे अपनी शादी को विदेशी विवाह अधिनियम 1969 के तहत भारत में रजिस्टर्ड कराना चाहते थे। इस मामले पर संज्ञान लेते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने उनकी याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया है। मगर, भारत में समलैंगिक विवाह (Same Sex Marriage) को लेकर अभी भी कई कानूनी और तकनीकी पेच फंसे हुए हैं।
क्या है भारत में समलैंगिकता से जुड़ा कानून
संविधान में भारत के नागरिक को अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार दिए गए हैं। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 कहता है कि किसी भी व्यक्ति को विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अतिरिक्त उसके जीवन और वैयक्तिक स्वतंत्रता के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है। लेकिन, यहां 'समलैंगिक विवाह' को मौलिक अधिकार नहीं बनाया जा सकता है।
साथ ही यह भी बता दें कि साल 2018 से पहले तक समलैंगिक संबंधों को भारत में भी गैर-कानूनी माना जाता रहा है। दरअसल भारत में समलैंगिक संबंधों को लेकर ब्रिटिश सरकार की ओर से बनाए गए धारा 377 कानून का प्रावधान था। भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) की धारा 377 के तहत किसी भी पुरुष, महिला या जानवर के साथ अप्राकृतिक शारीरिक संबंध को गैरकानूनी और दंडनीय माना गया था। वहीं साल 2018 में भारत के सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिक संबंधों की मान्यता दे दी थी। लेकिन, समलैंगिक विवाह को मान्यता देने पर पेंच फंसा हुआ है।
केंद्र सरकार की क्या है आपत्ति?
समलैंगिक विवाह को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है। इसमें हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से भी जवाब मांगा था। वहीं सुनवाई को दौरान केंद्र सरकार का कहना था कि भारत में विवाह को तभी मान्यता दी जा सकती है जब बच्चा पैदा करने में सक्षम 'जैविक पुरुष' और 'जैविक महिला' के बीच विवाह हुआ हो। क्योंकि समलैंगिक विवाह के दौरान एक ही लिंग के दोनों होने पर बच्चा पैदा नहीं कर सकते, इसलिए इस तर्क के साथ केंद्र सरकार समलैंगिक विवाद को अवैध बताता है।
इन देशों में समलैंगिक संबंध है मृत्युदंड वाला अपराध
2017 की एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर के 72 देशों में समलैंगिक संबंध को अपराध की श्रेणी में रखा गया है। इनमें से 45 देशों में महिलाओं के बीच के यौन संबंधों को गैर कानूनी करार दिया गया है। समान लिंग संबंधों को इन देशों में 'प्रकृति के खिलाफ' माना जाता है। वहीं इंटरनेशनल लेस्बियन, गे, बाइसेक्शुअल, ट्रांस एंड इंटरसेक्स एसोसिएशन (आईएलजीए) के मुताबिक आठ ऐसे देश हैं जहां समलैंगिकता की सजा मौत होती है। इन देशों में ईरान, सूडान, सऊदी अरब, यमन, सोमालिया, नाइजीरिया, इराक और सीरिया शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि ये सभी इस्लामिक देश हैं।
समलैंगिक संबंधों को लेकर दक्षिणी और पूर्वी अफ्रीका, मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया के मुल्कों का व्यवहार बहुत कठोर है। जबकि पश्चिमी यूरोप और पश्चिमी गोलार्ध के देश इस विषय पर सबसे सहिष्णु हैं।
32 देशों में मिली समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता
समलैंगिक विवाह को भारत में अभी भी कानूनी मान्यता नहीं मिली है, जबकि समलैंगिक संबंधों पर कानूनी पाबंदी हट चुकी है। वहीं बात दुनिया की करें तो तकरीबन 32 ऐसे देश ऐसे हैं जहां समलैंगिक विवाह को कानूनी रूप से मान्यता मिल गई है।
समलैंगिक विवाह को मान्यता देने वाले देशों की लिस्ट में नीदरलैंड्स (2001), बेल्जियम (2003), कनाडा (2005), स्पेन (2005), दक्षिण अफ्रीका (2006), नॉर्वे (2009), स्वीडन (2009), आइसलैंड (2010), फिनलैंड (2010), अर्जेंटीना (2010), मेक्सिको (2010), पुर्तगाल (2010), डेनमार्क (2012), ब्राजील (2013), फ्रांस (2013), न्यूज़ीलैंड (2013), उरुग्वे (2013), आयरलैंड (2015), लक्समबर्ग (2015), कोलंबिया (2016), जर्मनी (2017), माल्टा (2017), ऑस्ट्रेलिया (2017), ऑस्ट्रिया (2019), ताइवान (2019), इक्वाडोर (2019), कोस्टा रिका (2020), यूनाइटेड किंगडम (2020), चिली (2022), स्लोवेनिया (2022), स्विट्ज़रलैंड (2022), संयुक्त राज्य अमेरिका (2022) शामिल हैं।
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