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दिल्ली की एक पल्लवी ने 100 विदेशियों को बना डाला हिन्दी भाषी

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    [अजय मोहन] मुंबई में रहने वाली दिल्ली की मूल निवासी पल्लवी सिंह ने जब बारहवीं पास की तो दोस्त-यार रिश्तेदार सब पूछने लगे, अब आगे क्या इरादा है? कंम्पटीशन्स की तैयारी करोगी या बीए, एमए या कोई टेक्न‍िकल कोर्स? ऐसे तमाम सवाल थे जो पल्लवी के चारों ओर घूमते रहे। कई कुरेदने वाले सवाल तो तीर की तरह चुभते थे। खैर पल्लवी अपना करियर खुद डिसाइड करना चाहती थी इसकी छूट उसके माता-पिता ने दे रखी थी। सेल्फ असेसमेंट किया और बीटेक में दाख‍िला ले लिया, क्योंकि पल्लवी को पता था अब चार साल तक कोई उससे कोई सवाल नहीं करेगा। लेकिन इसी के समानांतर पल्लवी ने ऐसा काम किया, जो वाकई में गौरव की बात है। वो काम है विदेश‍ियों को हिन्दी पढ़ाने का।

    Pallavi

    अब आपके जहन में ये शब्द जरूर गूंजे होंगे, "ऐंह इसमें कौन सी बड़ी बात है..." तो चलिये हम आपको बड़ी बातें ही बताते हैं, जो पल्लवी के जीवन से जुड़ी हैं। पल्लवी को शुरू से ही पढ़ाने का बड़ा शौक था, लेकिन वो कुछ अलग ढंग से पढ़ाना चाहती थी। उसकी इसी सोच और एक इत्तेफाक ने पल्लवी के करियर को नया मोड़ दे दिया। उसकी मुलाकात दिल्ली में ऑस्ट्रेलिया के एक छात्र से हुई, जो हिन्दी पढ़ना चाहता था। बस फिर क्या था पल्लवी के अंदर उस छात्र को हिन्दी सिखाने का ऐसा जुनून सवार हुआ कि उसने बीसीए की पढ़ाई के साथ-साथ खुद के मॉड्यूल तैयार कर डाले। ये वो मॉड्यूल थे, जिनके माध्यम से उसने छात्र को 3 महीने के अंदर हिन्दी बोलना सिखा दिया।

    pallavi singh

    बस फिर क्या था, पल्लवी को एक दिशा मिल गई और उसने मॉड्यूल्स में निरंतर संशोधन व सुधार करती रही और उसी के समानांतर उसके पास कई अन्य देशों के भी छात्र हिन्दी सीखने आ गये। तभी पल्लवी ने फेसबुक पर पेज क्रिएट किया और इंटरनेट का इस्तेमाल करते हुए दुनिया के अलग-अलग देशों में बैठे लोगों को हिन्दी पढ़नाने लगी। अब तक पल्लवी 100 से ज्यादा विदेश‍ियों को हिन्दी सिखा चुकी हैं।

    विदेश‍ियों को कैसे पढ़ाती हैं पल्लवी

    पल्लवी ने वनइंडिया से खास बातचीत में बताया कि उन्होंन हिन्दी पढ़ाने के लिये खुद के मॉड्यूल तैयार किये हैं। वो अपने स्टूडेंट्स को हिन्दी की सामान्य किताबों से नहीं बल्क‍ि उसी कोर्स के अंतर्गत पढ़ाती हैं, जो उन्होंने खुद तैयार किया है। पल्लवी बताती हैं कि कोर्स करीब तीन से चार महीने का होता है। कभी-कभी छह महीने भी।

    अगर छात्र के घर जाकर पढ़ाना होता है, तो 15 से 20 मॉड्यूल की कॉपी छात्र को देती हैं और उसी के अंतर्गत पढ़ाती हैं। इस मॉड्यूल के अंतर्गत सीडी पर हिन्दी फिल्में दिखाना और हिन्दी में वाद-विवाद, आदि भी होता है। अगर छात्र दूर देश में या किसी दूसरे शहर में है, तो पल्लवी स्काइप के माध्यम से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर हिन्दी सिखाती हैं।

    pallavi singh

    भारत में दूतावासों से करेंगी संपर्क

    मुंबई के सोफिया कॉलेज से साइकोलॉजी से एमए कर रहीं पल्लवी ने बताया कि उनका अगला लक्ष्य दिल्ली में स्थ‍ित अलग-अलग देशों के दूतावासों से संपर्क कर अपने मॉड्यूल के बारे में बताना है, ताकि वहां काम करने वाले विदेशी भी हिन्दी सीख सकें।

    pallavi singh

    विदेशी क्यों सीखना चाहते हैं हिन्दी

    अपने छात्रों के फीडबैक के आधार पर पल्लवी बताती हैं कि उनके अध‍िकांश छात्र सिर्फ इसलिये हिन्दी सीखना चाहते हैं, ताकि वे रेलवे स्टेशन, बस स्टॉप, ऑटो, दुकानों, आदि पर लगे बोर्ड, पोस्टर, बैनर आदि पढ़ सकें और तब कोई उन्हें दिगभ्रमित नहीं कर सके। यही नहीं हिन्दी आती होगी तो ऑटो, टैक्सी वालों की ठगी से भी निजात मिल सकती है। सबसे खास पल्लवी ने अपने छात्रों में भारत के लिये अजब सा प्रेम देखा, हो सकता है वही प्रेम उन्हें हिन्दी की ओर खींच लाया हो।

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    English summary
    Mumbai girl Pallavi Singh is making India proud by teaching Hindi to Foreigners who comes to India. Pallavi belongs to Delhi. She has prepared her own modules of Teaching and that is most inspirational thing she has done being a student.

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