Drone in Agriculture: अब खेती में भी ड्रोन का उपयोग, जानें क्या लाभ हैं ड्रोन के खेती में

दुनिया भर में खेती के लिए ड्रोन तकनीक का उपयोग बढ़ रहा है, ताकि बेहतर उपज व उत्पादकता बढ़ने के साथ-साथ किसानों की आय में भी इजाफा हो सके।

Drone

कृषि ड्रोन, खेती के आधुनिक उपकरणों में से एक है। यह एक मानवरहित विमान होता है, या यूं कहे कि एक उड़ने वाला रोबोट है। इसे दूर से ही साफ्टवेयर के माध्यम से नियंत्रित किया जाता है। दरअसल, इसमें एक जीपीएस आधारित नेविगेशन सिस्टम और अनेक सेंसर होते हैं। यह बैटरी की सहायता से काम करता है। इसमें कई तरह के उपकरण जैसे कैमरा, कीटनाशक छिड़काव यंत्र आदि भी लगे होते हैं। मल्टी-रोटर ड्रोन, फिक्स्ड विंग ड्रोन व सिंगल-रोटर हेलीकॉप्टर ड्रोन आदि कृषि ड्रोन किसानों द्वारा प्रयोग किया जा रहे हैं। आइये जानते है ड्रोन के प्रयोग से खेती में होने वाले लाभों के बारे में।

बीजों के रोपण में सहायक
कृषि ड्रोन, सेंसर तकनीक और इंटेलिजेंट सिस्टम द्वारा बंजर भूमि या बड़े क्षेत्र में कम समय में बीजरोपण किया जा सकता हैं। रोपण प्रणाली से लैस ड्रोन सीधे मिट्टी में बीज को लगा सकते हैं। कुछ ड्रोन एक दिन में लगभग एक लाख तक बीज बो सकते हैं।

कीटनाशक व उर्वरकों का कम समय में छिड़काव
ड्रोन, ट्रैक्टर या अन्य साधनों की तुलना में अधिक शुद्धता के साथ खेतों की जांच करता है। यह फसलों में सही मात्रा में कीटनाशक और उर्वरकों का तेजी से छिड़काव भी कर सकता है। जिससे जमीन की शुद्धता भी बनी रहती है और रसायनों के अधिक प्रयोग पर भी रोक लगती है। ड्रोन मुश्किल से 15-20 मिनट में लगभग 2.5 एकड़ (1 हेक्टेयर) भूमि में कीटनाशकों/उर्वरकों का छिडकाव कर देता है। यदि सामान्य रूप से छिड़काव किया जाए तो इसके लिए दो-तीन मजदूरों की आवश्यकता होती है। जिसका खर्च 1500-2000 रूपये आ जाता है जबकि ड्रोन से छिड़काव में एक एकड़ पर अधिकतम 500 रुपये का खर्च होगा।

व्यापक सिंचाई और मिट्टी की जांच
ड्रोन में लगे हाइपर स्पेक्ट्रल, थर्मल या मल्टीस्पेक्ट्रल सेंसर से उन क्षेत्रों की पहचान कर सकते हैं जो बहुत शुष्क होते हैं या जिनमें जल भराव की समस्या होती है। इस माध्यम से ड्रोन के द्वारा सिंचाई की सही योजना बनाई जा सकती हैं।

इस व्यापक व्यापक सिंचाई योजना के साथ-साथ ड्रोन के द्वारा फसल की गुणवत्ता निगरानी, मिट्टी के स्वास्थ्य के बारे में सटीक जानकारी प्राप्त कर सकता हैं। फसल की उचित जानकारी होने पर संसाधनों का प्रयोग सही ढंग से बिना फिजूल खर्चे के किया जा सकता हैं।

भूषि प्रदूषण कम करने में सहायक
किसान ड्रोन से दुर्गम व पहाड़ी क्षेत्रों व अधिक क्षेत्रफल की भूमि की प्रभावी ढंग से देख-रेख कर सकता है तथा उचित मात्रा में जहरीले कीटनाशकों के प्रयोग से भूमि को सुरक्षित रख सकता है, जिससे भूमि प्रदूषण भी कम होता है।

फसलों के नुकसान का सही आकलन
मल्टीस्पेक्ट्रल सेंसर और आरजीबी सेंसर तकनीक वाला कृषि ड्रोन किसान बीमा दावों के लिए फसलों के नुकसान का सही आंकलन कर सकता है। इसका फायदा फसल को नुकसान पहुंचने की स्थिति में बीमा का दावा करने में उपयोगी हो सकता है। दरअसल, किसान ड्रोन नुकसान का आंकलन कर सबूत इकट्ठा कर सकता है और बीमा कंपनी के पास नुकसान-भरपाई का दावा मजबूती के साथ रख सकता है। ड्रोन से प्राप्त जीपीएस आधारित सही और भरोसेमंद जानकारी को झुठलाना किसी भी व्यक्ति हेतु आसान नहीं रहता है।

संसाधनों का अधिकतम उपयोग
कृषि ड्रोन, किसान को विभिन्न संसाधनों - बीज, पानी, उर्वरक, कीटनाशक का अधिक उपयोग करने में सक्षम बनाता हैं। एक खेत के सभी क्षेत्रों को एक जैसा उपचार देने की बजाय आवश्यकतानुसार उपचार देने से उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग लिया जा सकता है।

किसान तीव्रता से खेत का मुआयना करके समस्याग्रस्त क्षेत्रों जैसे संक्रमित फसलों/अस्वस्थ फसलों, मिट्टी में नमी के स्तर की जांच कर सकता है। जिससे समय रहते खेती में आवश्यकतानुसार कार्य किया जा सके।

ड्रोन के प्रयोग संबंधी शर्तें
किसानों को ड्रोन का इस्तेमाल करते समय अनेक बातों का ध्यान रखना होता है। जैसे हाईटेंशन लाइन अथवा मोबाइल टावर वाले स्थानों पर अनुमति लेनी आवश्यक है। ग्रीन जोन के क्षेत्र में ड्रोन द्वारा दवाई का छिड़काव नहीं कर सकते। खराब मौसम या तेज हवा में ड्रोन उड़ाना प्रतिबंधित है। आवासीय क्षेत्र के पास खेती होने पर अनुमति लेना आवश्यक है।

सरकार द्वारा प्रोत्साहन के प्रयास
केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमन ने अपने बजटीय भाषण 2022 में कहा था कि 'फसल का मूल्यांकन करने, भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण, कीटनाशकों और पोषण तत्वों के छिड़काव के लिए किसान ड्रोन के उपयोग को बढ़ावा दिया जायेगा।

केंद्र सरकार द्वारा देश के किसानों को तकनीकी खेती से जोड़ने के लिए अनेक कार्य किये जा रहे है। बाजार में कृषि ड्रोन (लोडिंग कैपेसिटी और अंतिम प्रयोग के आधार पर) कीमत आमतौर पर 3 से 10 लाख तक हो सकती है, जिसे छोटे किसान के लिए खरीदना भारी पड़ता है। इसलिए सरकार द्वारा 'किसान ड्रोन योजना' की शुरुआत की गई है। इस योजना के तहत किसानों को ड्रोन खरीदने पर अनुदान (सब्सिडी) प्रदान किया जाएगा। यह अनुदान एससी-एसटी, छोटे एवं सीमांत, महिलाओं और पूर्वोत्तर राज्यों के किसानों को 50 प्रतिशत या अधिकतम 5 लाख रुपए तक प्रदान किया जाएगा।

इसके अतिरिक्त ड्रोन खरीदने पर अन्य किसानों को 40 प्रतिशत या अधिकतम 4 लाख रुपए और किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) को 75 प्रतिशत तक का अनुदान प्रदान किया जाएगा। लेकिन कृषि मशीनरीकरण पर उप मशीन के तहत मान्यता प्राप्त कृषि ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट या कृषि विज्ञान केंद्रों को 100 प्रतिशत तक ड्रोन खरीदने पर अनुदान दिया जाएगा।

फिलहाल, राजस्थान और महाराष्ट्र के किसान खेती के लिए ड्रोन का उपयोग करने लगे हैं। अनुमान है कि आने वाले समय में ड्रोन की उपयोगिता को देखते हुए लगभग देश के सभी राज्यों के किसान भी खेती कार्यों के लिए ड्रोन का उपयोग करने लगेंगे।

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