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Lata Mangeshkar: वीर सावरकर के प्रति श्रद्धा और नरेंद्र मोदी से स्नेह रखती थीं लताजी

स्वर कोकिला लता मंगेशकर की आज पहली पुण्यतिथि है। 6 फरवरी 2022 को आज ही के दिन उनका निधन हो गया था लेकिन उनकी यादें आज भी ताजा हैं।

Lata Mangeshkar death anniversary reverence for Veer Savarkar and affection for Narendra Modi

Lata Mangeshkar: 28 सितंबर 1929 को इंदौर में एक मध्यमवर्गीय मराठी परिवार में जन्मी लता मंगेशकर का नाम पहले 'हेमा' था। कुछ साल बाद अपने थिएटर के एक पात्र 'लतिका' के नाम पर उनके पिता दीनानाथ ने उनका नाम 'लता' रखा। अपनी सुरीली आवाज से गीतों को अमर बना देने वाली भारत रत्न लता मंगेशकर आज हमारे बीच सशरीर मौजूद नहीं हैं। मगर, उनके गीतों के सहारे लता जी के प्रशंसक उन्‍हें हर पल अपने नजदीक महसूस करते हैं। लता मंगेशकर की आवाज ने छह दशकों से भी ज्यादा संगीत की दुनिया को सुरों से नवाजा है।

आज स्वर कोकिला लता मंगेशकर के निधन को एक साल पूरा हो गया है। कोई ऐसा सम्मान नहीं था जो उन्हें न मिला हो। बचपन से लेकर आखिरी सांस तक उन्होंने तकलीफों और संघर्ष को देखा था। कम उम्र में पिता का साया सिर से उठ गया तो घर की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली। चंद पैसे बचाने के लिए वो मीलों तक पैदल चल कर रिकॉर्डिंग स्टूडियो जाती थीं, ताकि जो पैसे बचें उससे घर पर जरूरी सामान का इंतजाम हो सके।

शुरुआत में उन्हें भी रिजेक्ट किया गया

स्वर कोकिला जिन्हें संगीत से जुड़े लोग मां सरस्वती का ही रूप मानते हैं, उन लता मंगेशकर को भी रिजेक्शन का दर्द सहना पड़ा था। हुआ यूं था कि एक बार लताजी के गुरु गुलाम हैदर साहब ने फिल्म निर्माता एस मुखर्जी को दिलीप कुमार और कामिनी कौशल की फिल्म 'शहीद' के लिए लता जी की आवाज सुनाई थी। मुखर्जी ने पहले तो बड़े ध्यान से उनका गाना सुना और फिर कहा कि वो इन्हें अपनी फिल्म में काम नहीं दे सकते क्योंकि उनकी आवाज कुछ ज्यादा ही पतली है। वहीं दिलीप कुमार ने एक बार उन्हें टोकते हुए कहा था कि मराठियों की आवाज से 'दाल-भात' की गंध आती है। उनका इशारा लता के उच्चारण पर था। इसके बाद लता ने हिंदी और उर्दू सीखने के लिए एक टीचर रखा और अपना उच्चारण व लहजा सही किया था।

50 हजार से अधिक गाने गाए

1948 में फिल्म 'मजबूर' के गाने 'दिल मेरा तोड़ा' से लता मंगेशकर को पहचान मिली। साल 2011 में उन्होंने आखिरी बार 'सतरंगी पैराशूट' गाना गाया था। इस दौरान लता जी ने लगभग 50 हजार से ज्यादा गाने गाए थे। उनके द्वारा संगीत में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए उन्हें 1969 में पद्मभूषण से सम्मानित किया गया। इसके बाद 1999 में पद्मविभूषण और 1989 में दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड से नवाजा गया। फिर नॉन-क्लासिकल सिंगर कैटिगरी में लता मंगेशकर को देश के सबसे बड़े सम्मान भारत रत्न से पुरस्कृत किया गया। यह अवॉर्ड हासिल करने वाली लता मंगेशकर भारत की दूसरी सिंगर बनीं थी। उनसे पहले यह सम्मान एमएस सुब्बुलक्ष्मी को मिला था।

वीर सावरकर से था पारिवारिक रिश्ता

यतीन्द्र मिश्र की किताब 'लता सुर-गाथा' यह राज खोलती है। यतीन्द्र ने लिखा था कि बहुत कम लोग जानते होंगे कि अपनी किशोरावस्था में लता जी ने समाज-सेवा का प्रण लिया था। इसके लिए वे वीर सावरकर से कई दिनों तक विमर्श में उलझी थीं कि उन्हें समाज-सेवा करते हुए राजनीति के पथ पर जाना है या कुछ और करना है? तब सावरकर जी ने ही उन्हें समझाया था कि तुम एक ऐसे पिता की संतान हो, जिनका शास्त्रीय संगीत और कला में शिखर पर नाम चमक रहा है। अगर देश की सेवा करनी ही है तो संगीत के मार्फत समाज की सेवा करते हुए उसे किया जा सकता है।

आपको बता दें कि वीर सावरकर जब जीवित थे तो लता मंगेशकर उन्हें 'तात्या' के नाम से संबोधित करती थीं। 2019 में लता ने अपने परिवार और स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर के बीच रहे करीबी संबंध को याद करते हुए एक ट्वीट किया था। महान गायिका ने कहा था कि वीर सावरकर जी और हमारे परिवार के बहुत घनिष्‍ठ संबंध थे। उन्होंने मेरे पिताजी की नाटक कंपनी के लिए नाटक 'संन्यास खडग' लिखा था। सावरकर की जयंती के मौके पर लता ने ट्वीट किया था, जो लोग सावरकर जी के विरोध में बोल रहे हैं, वे नहीं जानते कि सावरकर जी कितने बड़े देशभक्त और स्वाभिमानी थे।

प्रधानमंत्री मोदी को छोटा भाई मानती थी लता जी

महान गायिका ने वर्ष 2013 में कहा था कि वह मोदी को भारत के प्रधानमंत्री के रूप में देखने की ईश्वर से प्रार्थना करती हैं। प्रधानमंत्री मोदी लता मंगेशकर के प्रशंसक होने के साथ-साथ उनसे इतने आत्मीय रिश्ते में बंधे थे कि उन्हें दीदी कहकर संबोधित करते थे। लता दीदी भी उनका बेहद सम्मान करती थीं और छोटा भाई मानती थीं। खुद दोनों ने कई मौकों पर अपने इस आत्मीय रिश्ते का जिक्र किया है। 2019 में लता जी के जन्मदिन के दिन प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका यात्रा के दौरान फ्लाइट में रहने वाले थे, लिहाजा उन्होंने दीदी को शुभकामनाएं देने के लिए यात्रा शुरु करने से पहले ही फोन किया था।

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    29 सितंबर 2019 को अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने इसका जिक्र किया था। मोदी ने एक बार बताया था कि सुधीर फड़के ने लता दीदी से मेरा परिचय कराया था। लता जी के निधन के बाद एक कार्यक्रम में प्रधनामंत्री मोदी ने कहा था कि लता दीदी से मुझे हमेशा अपार प्रेम मिला है। कई दशकों बाद ऐसा पहली बार होगा, जब राखी पर लता दीदी नहीं होंगी।

    यह भी पढ़ें: 'नहीं बनना चाहती दोबारा लता मंगेशकर' आखिर क्यों इतनी शान-ओ-शौकत के बावजूद स्वरा कोकिला ने कही थी ये बात?

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