Al-Aqsa Mosque Dispute: अल-अक्सा पर कब्जे की तैयारी? अमेरिका-इजराइल का प्लान लीक, मुस्लिम देशों में खलबली!
Al-Aqsa Mosque Dispute: यरुशलम की अल-अक्सा मस्जिद को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। मीडिया reports में दावा किया गया है कि अमेरिका और Israel मिलकर ऐसी योजना पर काम कर रहे हैं, जिससे मस्जिद पर जॉर्डन की पुरानी संरक्षक भूमिका कमजोर हो सकती है। कहा जा रहा है कि इस प्लान में अल-अक्सा परिसर की मौजूदा व्यवस्था बदलकर उसे "मल्टी-फेथ सेंटर" बनाने की सोच शामिल है।
हालांकि अभी तक इस पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन रिपोर्ट सामने आने के बाद पूरे पश्चिम एशिया में राजनीतिक और धार्मिक बहस तेज हो गई है। जॉर्डन, फिलिस्तीन और कई मुस्लिम देशों में इसे लेकर चिंता बढ़ती दिख रही है।

क्या है अमेरिका-इजराइल का कथित प्लान?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस प्रस्ताव में अल-अक्सा मस्जिद को संभालने वाले जॉर्डन समर्थित इस्लामिक वक्फ की शक्तियां कम की जा सकती हैं। दावा है कि उसकी जगह एक नया प्रशासनिक ढांचा बनाया जाएगा, जिस पर इजराइल की निगरानी ज्यादा होगी। साथ ही परिसर को "मल्टी-फेथ सेंटर" यानी ऐसा धार्मिक स्थल बनाने की बात कही जा रही है, जहां मुस्लिम, यहूदी और ईसाई तीनों धर्मों की मौजूदगी दिखाई जाए। हालांकि अभी तक अमेरिका या इजरायल सरकार ने इस योजना की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
ये भी पढे़ं: 'I Love Modi’, ट्रंप ने PM मोदी को बताया दोस्त, बोले-'भारत 100% भरोसा कर सकता है, हम कभी इतने करीब नहीं थे'
जॉर्डन क्यों है सबसे ज्यादा चिंतित?
Jordan का हाशमाइट शाही परिवार 1924 से यरुशलम के मुस्लिम और ईसाई धार्मिक स्थलों का संरक्षक माना जाता है। 1994 की जॉर्डन-इजराइल शांति संधि में भी इस भूमिका को मान्यता मिली थी। ऐसे में अगर अल-अक्सा की मौजूदा व्यवस्था बदली जाती है तो यह जॉर्डन के लिए बड़ा राजनीतिक और धार्मिक झटका माना जाएगा। जॉर्डन को डर है कि इससे उसकी क्षेत्रीय भूमिका कमजोर होगी और मुस्लिम दुनिया में नाराजगी बढ़ सकती है।
अल-अक्सा में अभी क्या व्यवस्था लागू है?
1967 की जंग के बाद एक "स्टेटस क्वो" व्यवस्था बनाई गई थी। इसके तहत मस्जिद के धार्मिक और अंदरूनी मामलों को इस्लामिक वक्फ संभालता है, जबकि बाहरी सुरक्षा इजरायल के हाथ में रहती है। गैर-मुस्लिमों को सीमित समय में परिसर में आने की अनुमति है, लेकिन वहां प्रार्थना की इजाजत नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में यहूदी प्रार्थना अधिकारों की मांग और इजरायली पुलिस की कार्रवाइयों के कारण इस व्यवस्था को लेकर तनाव लगातार बढ़ता रहा है।
ये भी पढ़ें: Trump का नया Middle East Formula! अरब देशों से बोले- Israel को मान्यता दो, नहीं तो Iran Deal भूल जाओ!
क्यों बढ़ रहा है विवाद और तनाव?
फिलिस्तीनी अधिकारियों और जॉर्डन का आरोप है कि इजराइल धीरे-धीरे अल-अक्सा की मौजूदा स्थिति बदलने की कोशिश कर रहा है। हाल के वर्षों में दक्षिणपंथी यहूदी समूहों की मस्जिद परिसर में बढ़ती मौजूदगी ने विवाद को और गहरा किया है। दूसरी तरफ इजरायल में कुछ समूह यह मांग कर रहे हैं कि यहूदियों को वहां खुलकर प्रार्थना करने का अधिकार मिलना चाहिए। यही वजह है कि अल-अक्सा अब सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि बड़ा राजनीतिक मुद्दा भी बन गया है।
अरब देशों और दुनिया की क्या प्रतिक्रिया है?
रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि Bahrain, Egypt, Morocco और United Arab Emirates को इस प्रस्ताव की जानकारी दी गई है। वहीं Saudi Arabia ने कथित तौर पर इस योजना पर चिंता जताई है। सऊदी अरब का मानना है कि अगर अल-अक्सा की संरक्षक व्यवस्था से छेड़छाड़ हुई तो पूरे पश्चिम एशिया में तनाव भड़क सकता है। फिलहाल इस मुद्दे पर आधिकारिक स्तर पर कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है, लेकिन बहस और आशंकाएं लगातार बढ़ रही हैं।












Click it and Unblock the Notifications