Krishna Janmashtami : परदे पर भी श्रीकृष्ण की धूम
Krishna Janmashtami: भगवान कृष्ण की लीला अपरंपार है। कहते हैं वे मानव रूप में भगवान के ऐसे अवतार थे, जो सोलहों कलाओं में निपुण थे, भगवान श्रीराम को चौदह कला में निपुण माना जाता है। ऐसे लीलाधर की लीला फिल्मकारों के लिए भी आकर्षक विषय रहा है। अब तक किसी एक देवता पर सबसे ज्यादा फिल्म या टीवी सीरियल का निर्माण हुआ है, तो वह भगवान कृष्ण ही हैं। केवल हिंदी ही नहीं, बल्कि भारत की लगभग सभी भाषाओं में नटवर को लेकर चलचित्र या टीवी सीरियल बनाए गए हैं।
आजादी के फौरन बाद 1948 में तमिल अभिनेता जेमिनी गणेशन ने चक्रधारी नाम की फिल्म में भगवान कृष्ण की भूमिका निभाई थी। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर काफी सफल रही थी। लेकिन उसके पहले भी भगवान कृष्ण पर हमारे यहां फिल्म बन चुकी थी। कहते हैं कि कान्हा पर पहली फिल्म 1919 में ही बन गई थी। भाारतीय फिल्म उद्योग के पितामह दादासाहेब फाल्के ने भगवान कृष्ण के जीवन पर आाधारित मूक फिल्म कालिया मर्दन बनाई थी। दादा साहेब की बेटी मंदाकिनी फाल्के ने इस फिल्म में बाल कृष्ण की भूमिका निभाई थी।

तेलुगू नायक एनटी रामाराव ने तो भगवान श्रीकृष्ण की भूमिका का रिकार्ड स्थापित कर दिया था। तीन बार आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे रामाराव पौराणिक और धार्मिक फिल्मों में सबसे ज्यादा नजर आते थे। उन्होंने फिल्मों में शिव, विष्णु, राम और रावण की भूमिका भी निभाई लेकिन कृष्ण के रूप में उन्होंने 17 फिल्में की। उनकी कई फिल्मों का आधार ही महाग्रंथ भगवत पुराण रहा। 1962 में आई उनकी कृष्णार्जुना युद्धम, 1964 में कर्ण और 1977 में दानवीर सूर कर्ण काफी सफल फिल्मों में रहीं।
हिंदी सिनेमा के आरंभ में पौराणिक कथाओं को ही विषय बनाकर ज्यादातर फिल्में बनाई गई। उनमें भी श्रीकृष्ण से जुड़ी फिल्मों की अधिकता थी। 1923 में कृष्ण-अर्जुन युद्ध, 1933 में कृष्णावतार, 1944 में कृष्ण भक्त बोधना, 1952 में कृष्ण कन्हैया और 1968 मे कृष्ण भक्त सुदामा जैसी फिल्में थियेटरों में आ चुकी थी। 1960 में जब मुगलेआजम आई तो उसमें भी अकबर के दरबार में कृष्ण जन्माष्टमी मनाते हुए दिखाया गया। उसके साथ जो गाना फिल्माया गया- मोहे पनघट पर नंदलाल छेड़ गयो रे.......... लोग आज भी गुनगुनाते हैं।
बांग्ला भाषा में भी कृष्ण के जीवन पर आधारित फिल्मों की भरमार है। 2009 में तपस पॉल और इंद्रानी दत्ता की फिल्म कृष्णा आई तो 2017 में महावीर कृष्ण के नाम से पूरी तरह धार्मिक भावों से भरी फिल्म सिनेमा हॉल में लगी। इस फिल्म में इंद्राणी हल्दर और जॉय बनर्जी ने अभिनय किया है। 2021 में मिथुन चक्रवर्ती और सोमी अली अभिनीत बांग्ला फिल्म कृष्णा अवतार थियेटर में आई। 2022 में फिर से कृष्ण लीला के नाम से पूरी तरह कृष्ण भक्ति से भरी फिल्म बांग्ला में रिलीज हुई।
इस समय के अभिनेताओं में भी कई सुपर स्टार हैं जो भगवान कृष्ण की भूमिका निभाकर खुद को धन्य मानते हैं। दक्षिण के सुपर स्टार कल्याण ने ओह माई गॉड के तेतुगू संस्करण में कन्हैया की भूमिका की तो उसी फिल्म के हिंदी संस्करण में सुपर स्टार अक्षय कुमार ने यह भूमिका निभाई। कांजी भाई के ईद गिर्द घूम रहे श्री कृष्ण की इस भूमिका में भक्ति के साथ मनोरंजन का भी खूब तड़का रहा।
भारतीय टेलीविजन धारावाहिकों में भी सबसे ज्यादा जिन धार्मिक विषयों को चुना गया तो वह कृष्ण से जुड़े विषय ही रहे। बीआर चोपड़ा का 1990 में आया धारावाहिक महाभारत अजर अमर हो गया। उसके दर्शकों की संख्या ना तब कम हुई जब पहली बार यह धारावाहिक टीवी सेट के जरिए लोगों तक पहुंचा और ना ही तब कम हुई जब कोविड के कारण देश में लॉक डाउन लगने के बाद इसका प्रसारण हुआ। इस धारावाहिक में कृष्ण बने नीतिश भारद्वाज आज भी उसी इमेज में बंधे हैं। भारतीय जनता उन्हें किसी और रूप में देखना पंसद ही नहीं करती। उसके बाद महाभारत पर एक और धारावाहिक आया जिसमें कृष्ण की भूमिका सौरभ राज जैन ने निभाई। 2011 में आया टीवी धारावाहिक द्वारकाधीश भी वर्षों तक दर्शकों को भाता रहा।
कई ऐसी फिल्में भी हैं जो भले ही कृष्ण के जीवन पर आधारित ना हो, लेकिन उनमें भगवान कृष्ण से जुड़े गाने डाले गए, जिसके कारण फिल्म चल निकली। दिलीप कुमार की फिल्म बेटी-बेटे में फिल्माया गया गाना - राधिके तुने बंसुरी चुराई लोगों को आज भी रोमांचित करती है। फिल्म मालिक में कन्हैया, कन्हैया तूझे आना पड़ेगा, फिल्म घुंघट में मेरी पत राखो गिरधारी........आंखें में मेरी सुन ले अरज बनवारी......., फिल्म सत्यं शिवं सुंदरम में यशोमती मैया से बोले नंद लाला ..........से लेकर लगान में राधा कैसे ना जले जैसे गाने हिट ही नहीं हुए, सुपर हिट हुए।
आधुनिक फिल्मकार भी कृष्ण और राधा के अमर प्रेम पर गाना अपनी फिल्मों में डालना नहीं भूलते। जैसे स्टूडेंट ऑफ दि इयर में ओ राधा तेरी चुनरी ओ राधा तेरा छल्ला......और सुखविंदर सिंह की वो कृष्णा है...... युवा वर्ग की जुबान पर आज कल छाया हुआ है।












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