जानिए ईसाई धर्म क्या कहता है योग के बारे में?

नई दिल्ली। योग एक आसन है जो इंसान को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रखता है। इसका किसी धर्म विशेष से कुछ लेना-देना नहीं हैं। इसे करने से ना तो कोई हिंदू बनता है और ना ही मुसलमान। हर धर्म में योग को लेकर बहुत कुछ कहा गया है।

आईये आज हम आपको बताते हैं कि ईसाई धर्म योग के बारे में क्या कहता है..

अगर आप इस धर्म को पढ़ेंगे तो आप पायेंगे यहां योग एक तंत्र के रूप में काम करता है और तंत्र का मतलब इंसान का मानसिक रूप से काफी रिलैक्स करना होता है। तंत्र विद्या के जरिये इंसान को वास्तविकता के पास लाया जाता है और मायावी दुनिया से मुक्त किया जाता है जिसके लिए इंसान को ध्यान लगाना होता है और ये ध्यान तो योग से ही आयेगा। इसके जरिये इंसान का चित्त शांत और एकाग्र हो जाता है। वो अपनी कमजोरियों से उबर सकता है।

रेकी, मेडिएशन यह सब योग के ही प्रकार हैं, ध्यान करने से इंसान तांत्रिक अनुयायियों पर विजय प्राप्त करता है जिसे कि कुंडलिनी योग कहा जाता है। कुल मिलाकर सार इतना ही है धर्मों में योग एक शारीरिक आसन के रूप में ही विख्यात है इसे किसी विशेष धर्मानुयायियों से जोड़कर नहीं देखना चाहिए। इसलिए योग कीजिये और स्वस्थ रहिए।

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