Pesticides: खेती में बढ़ रहा कीटनाशकों का उपयोग, जानें स्वास्थ्य व पर्यावरण पर असर
अंतरराष्ट्रीय संगठन एफएओ (खाद्य तथा कृषि संगठन) के वैज्ञानिकों ने हाल ही में अपने अध्ययन में कहा है कि कृषि में कीटनाशकों का प्रयोग पिछले 7 दशकों में 45 गुना बढ़ा है।
केयर रेटिंग के अनुसार भारत में जहां 1950 में मात्र 2 हजार टन ही कीटनाशक की खपत थी, वह अब लगभग 65 से 70 हजार टन तक पहुंच गयी है।

इन कीटनाशकों के बढ़ते प्रयोग के कारण दुनिया की 64 प्रतिशत खेती योग्य भूमि को खतरा पैदा हो गया है। इसके साथ-साथ पर्यावरण व जन-स्वास्थ्य के लिए भी संकट उत्पन्न हो गया है।
क्या है कीटनाशक?
जैसा कि शब्द के उच्चारण से ही अर्थ समझ में आता है कि वह पदार्थ/दवा जो कृषि में कीटों, कीड़ों/खरपतवार आदि का नाश करने अथवा रोकथाम के लिए प्रयोग की जाती है, उसे ही कीटनाशक कहते है। मुख्यतः कीटनाशक को 6 प्रकार से परिभाषित किया गया है, जैसे कीड़ों की रोकथाम के लिए कीटनाशक, खरपतवार के लिए शाकनाशी, जीव-जंतुओं (जैसे चूहे आदि) के लिए कृंतकनाशी, बैक्टीरिया हेतु जीवाणुनाशी, कवक (फफूंदी आदि) को दूर करने के लिए कवकनाशी तथा लार्वा (जैसे मच्छरों अथवा कीट- पतंगों के लार्वा) को खत्म करने के लिए लार्विसाइड्स का प्रयोग किया जाता है।
कीटनाशकों का बढ़ता उपयोग
बीते दशकों से भारत की कृषि में कीटनाशकों का उपयोग बढ़ा है, जिसमें किसान व कीटनाशक बनाने वाली कंपनियां दोनों बराबर की जिम्मेदार हैं। किसान कृषि में ज्यादा से ज्यादा उत्पादन करने हेतु कीटनाशकों का उपयोग कर रहा है। दूसरी और कीटनाशक बनाने वाली कंपनियां भारी मुनाफा कमाने की चाह में बड़ी मात्रा में कीटनाशक बना व बेच रही है।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार भारत में वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान 56,402 मीट्रिक टन रसायनिक कीटनाशकों का प्रयोग हुआ, जो वित्तीय वर्ष 2021-22 तक बढ़ता हुआ 58,653 मीट्रिक टन तक पहुंच गया तथा 2022-23 तक 61.7 हजार मीट्रिक टन पहुंच गया।
अगर हम कीटनाशकों के प्रयोग को राज्यवार देखें तो वित्तीय वर्ष 2021-22 के दौरान महाराष्ट्र राज्य में कीटनाशकों की सबसे ज्यादा खपत 13,175 मैट्रिक टन थी। वहीं दूसरे नंबर पर 11,688 मैट्रिक टन खपत के साथ उत्तर प्रदेश, इसके बाद पंजाब (5376 मैट्रिक टन) व तेलंगाना (4920 मैट्रिक टन) का नंबर आता है।
अगर हम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीटनाशकों के प्रयोग की बात करें तो दुनियाभर में करीब 27 लाख मीट्रिक टन कीटनाशकों का प्रयोग होता है, जो वर्ष 2000 में लगभग 20 लाख मीट्रिक टन तथा 2010 में 26 लाख मीट्रिक टन थी। विश्व स्तर पर अमरीका में सर्वाधिक 407.7 हजार मीट्रिक टन के कीटनाशकों का प्रयोग होता है। इस क्रम में भारत का 9वां स्थान है। ब्राजील (377.1 हजार मीट्रिक टन) दूसरे पायदान, चीन (262.7 हजार मीट्रिक टन) तीसरे स्थान पर है।
कीटनाशकों का पर्यावरण पर प्रभाव
कीटनाशकों के उपयोग से अनेकों पर्यावरणीय चिंताएं उत्पन्न हो रही है। कीटनाशक का उपयोग अधिकतर कृषि में होता है परंतु मिट्टी के साथ-साथ हवा, पानी में भी यह व्याप्त हो जाता है। जिसके परिणामस्वरूप यह कीटनाशक पर्यावरणीय हितैषी पौधों, पशु, जलीय जीव, पक्षी, वन्यजीव, सूक्ष्म जीव व कीटों की प्रजातियों को नष्ट कर रहा है और उनके विलुप्त होने का खतरा भी पैदा हो रहा है।
कीटनाशकों से ही मिट्टी में उपस्थित लाभकारी सूक्ष्मजीवों (केचुएं आदि) की संख्या घट जाती है, जिसके कारण मिट्टी के स्वास्थ्य, उपजाऊपन व पैदावार आदि पर बुरा असर होता है।
कीटनाशकों का मानव स्वास्थ्य व जीवन पर असर
कीटनाशक के अधिक उपयोग से केवल पर्यावरण ही नहीं दूषित हो रहा है बल्कि लोगों का स्वास्थ्य भी प्रभावित हो रहा है। कीटनाशक गंभीर रोगों (कैंसर इत्यादि) का भी कारण बन रहे हैं। जिसमें ल्यूकेमिया, लिम्फोमा, मस्तिष्क, गुर्दे, स्तन, प्रोस्टेट, अग्न्याशय, यकृत, फेफड़े और त्वचा के कैंसर शामिल हैं। पंजाब और हरियाणा के किसानों में कैंसर की बढ़ती संख्या इस बात का प्रमाण है।
इसके साथ-साथ स्वास संबंधी रोग, गले में खराश, खांसी, एलर्जी, आंख और त्वचा में जलन अथवा त्वचा में सूजन एवं लाल होना, मिचली, उल्टी, दस्त, सिरदर्द, अचेत होना, अत्यधिक कमजोरी, दौरे पड़ना और यहां तक कि अनेक मामलों में तो मृत्यु भी हो जाती है।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार वर्ष 2015 में भारत में लगभग 7,060 लोगों की मृत्यु कीटनाशक विषाक्तता (जहर चढ़ने) के कारण हुई, जबकि 7,672 लोग कीटनाशकों के प्रयोग से बीमार पड़े। वहीं वर्ष 2014 के दौरान 7,365 व्यक्ति बीमार हुए और 5,915 लोगों की मृत्यु हुई।
एक अध्ययन के अनुमानों के अनुसार विश्व भर में 38.5 करोड़ लोग प्रतिवर्ष कीटनाशकों से प्रभावित होते हैं। जिसमें 11,000 लोग प्रतिवर्ष मृत्यु को प्राप्त होते हैं। भारत में कीटनाशकों के प्रभाव से प्रतिवर्ष औसतन 6,600 लोगों की मृत्यु हो जाती है।
कीटनाशकों के उपयोग से फायदा
विश्व में जनसंख्या वृद्धि के साथ-साथ कृषि उत्पादन में भी वृद्धि हुई है, जिसमें उन्नत तकनीक, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार आदि के साथ-साथ रासायनिक उर्वरकों एवं अनेक कीटनाशकों का भी योगदान है। क्योंकि कृषि में अनेक प्रकार के रोगों से अनेक फसलों का नष्ट होना एक सामान्य बात होती है। विश्व की संभावित फसल उत्पादन का लगभग 25 से 40 प्रतिशत खरपतवार, कीटों व अन्य बीमारियों के चलते नष्ट हो जाती है। इसलिए किसान अधिक उत्पादन व फसल को कीटों आदि से बचाने के लिए कीटनाशकों का प्रयोग करता है। कीटनाशक फसल में होने वाले नुकसान को रोक/कम कर देता है, जिसके कारण उत्पादकता में वृद्धि होती है।












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