BJP Foundation Day: भाजपा कैसे बनी दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी, जानें 43 सालों का सफर

पीएम मोदी की अगुवाई में भाजपा पिछले 10 सालों में बुलंदियों पर पहुंची है। 6 अप्रैल 1980 को गठित इस पार्टी की शुरुआत इतनी अच्छी नहीं थी। 2 सीट पाने वाली पार्टी आज 300 से ज्यादा सीटों के साथ सत्ता पर काबिज है।

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दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी भारतीय जनता पार्टी यानी भाजपा 6 अप्रैल को अपना 44वां स्थापना दिवस मना रही है। भाजपा को पहले भारतीय जनसंघ के नाम से जाना जाता था, जिसकी नींव डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 1951 में रखी थी। 1977 में इमरजेंसी खत्म होने के बाद भारतीय जनसंघ का कई दलों के साथ विलय हो गया और जनता पार्टी बनी। बाद में जनता पार्टी से जनसंघ अलग हो गया और उसका एक नया नाम भारतीय जनता पार्टी रखा गया।

1996 में हुए लोकसभा चुनावों में भाजपा पहली बार सबसे बड़ी पार्टी बनी और अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में पहली बार सरकार बनाई। 2014 से भाजपा का नया दौर शुरू हुआ है, जिसकी अगुवाई प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कर रहे हैं।

भाजपा के सफर को हम तीन हिस्सों में बांट सकते हैं, जिनमें 1996 से पहले का सफर, 1996 से लेकर 2014 का सफर और 2014 से लेकर अब तक का सफर शामिल हैं। सबसे पहले जानते हैं भाजपा के शुरुआती दौर यानी 1980 से लेकर 1996 के बीच के सफर के बारे में, जब इस पार्टी का सृजन हो रहा था।

'हम दो हमारे दो'
भाजपा की स्थापना 6 अप्रैल 1980 को हुई। पार्टी 1984 में पहली बार कमल के फूल के निशान के साथ चुनावी मैदान में उतरी थी। इस लोकसभा चुनाव में पहली बार भाजपा को केवल 2 सीटें ही मिली थी। 1984 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या की वजह से उनके बेटे राजीव गांधी को जनता से सहानुभूति मिली और कांग्रेस पार्टी 426 सीटें जीतकर लोकसभा में पहुंची थी। भाजपा के 1984 में हुए लोकसभा चुनाव में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने मजाक उड़ाते हुए 'हम दो हमारे दो' का नारा दिया था।

राजीव गांधी के सदन में दिए गए इस नारे के बाद कांग्रेस के सांसदों ने जोरदार ठहाके लगाए थे। अटल बिहारी वाजपेयी उस समय पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। राजीव गांधी द्वारा मजाक उड़ाए जाने पर वह काफी आहत हो गये और अध्यक्ष पद से इस्तीफा भी दे दिया था। हालांकि, भाजपा की संसदीय कार्यकारिणी ने वाजपेयी का इस्तीफा नामंजूर कर दिया था।

उस दौरान वाजपेयी ने कहा था कि 'हार नहीं मानूंगा, रार नई ठानूंगा, काल के कपाल पे लिखता मिटाता हूं गीत नया गाता हूं...' उनकी यह कविता काफी लोकप्रिय हुई और भाजपा के कार्यकर्ताओं के मन में जोश भर गया। 1989 में हुए अगले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 85 सीटें जीती थी। इसके बाद से भाजपा चुनाव दर चुनाव अपने सीटों की संख्या बढ़ाती गई। 1991 में हुए 10वें लोकसभा चुनाव में भाजपा ने पहली बार 100 सीटों का आंकड़ा पार किया। भारतीय जनता पार्टी ने इस साल अपनी सीटों की संख्या 85 से बढ़ाकर 120 कर ली।

आडवाणी की रथ यात्रा
1990 में लाल कृष्ण आडवाणी भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष थे। उन्होंने विश्व हिंदू परिषद के अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का समर्थन करते हुए रथ यात्रा निकाली थी। आडवाणी की इस रथ यात्रा का फायदा भारतीय जनता पार्टी को हुआ और 1991 में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा 120 सीटों के साथ मुख्य विपक्षी दल के तौर पर लोकसभा में पहुंची। इस चुनाव में भी कांग्रेस को 21 मई 1991 को हुई राजीव गांधी की हत्या की वजह से सहानुभूति मिली थी, लेकिन इस बार 1984 की तरह कांग्रेस को प्रचंड बहुमत नहीं मिल पाया। कांग्रेस पार्टी इस चुनाव में बहुमत का जादुई आंकड़ा भी नहीं छू पाई थी। 1996 में हुए अगले आम चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर आई।

पहली बार सत्ता में भाजपा
1996 में भाजपा 161 सीटें जीतकर लोकसभा में पहुंची थी। 11वीं लोकसभा चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनी। श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन का फायदा भाजपा को मिला और यूपी में सर्वाधिक 52 सीटें जीती। हालांकि, अटल बिहारी वाजपेयी केवल 13 दिनों के लिए ही प्रधानमंत्री बन सके थे। कांग्रेस उत्तर भारत में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई। हालांकि, दक्षिण भारत में कांग्रेस ने उम्दा प्रदर्शन किया। 161 सीटों वाली भाजपा को सत्ता से हटाने के लिए कांग्रेस समेत अन्य दलों ने संयुक्त मोर्चा बनाया और जनता दल के एच. डी. देवगौड़ा प्रधानमंत्री बने। हालांकि, उनकी सरकार भी केवल 10 महीने ही चल पाई। 1997 में देवगौड़ा सरकार में विदेश मंत्री रहे इंद्र कुमार गुजराल अगले प्रधानमंत्री बने। लेकिन वे भी एक वर्ष का कार्यकाल भी पूरा नहीं कर सके और उनकी सरकार गिर गई।

1998 में मध्यावधि लोकसभा चुनाव कराए गए, जिसमें एक बार फिर से भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनी। भाजपा ने इस चुनाव में 1996 के मुकाबले और बेहतर प्रदर्शन किया और 182 सीटें जीती। एक बार फिर से अटल बिहारी वाजपेयी देश के प्रधानमंत्री बने। हालांकि, उनका यह कार्यकाल भी ज्यादा लंबा नहीं चल सका। इस चुनाव में कांग्रेस को 141 सीटें मिली थी। भाजपा ने समता पार्टी, शिवसेना, अकाली दल, बीजू जनता दल जैसी क्षेत्रीय पार्टियों के साथ मिलकर 13 महीनों तक सरकार चलाई। 1999 में जयललिता की पार्टी एआईडीएमके ने भाजपा सरकार से समर्थन वापस ले लिया और भाजपा की सरकार गिर गई। 1999 में 13वीं लोकसभा चुनाव में भाजपा ने अपने सहयोगी क्षेत्रीय दलों के साथ एनडीए यानी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन बनाया और पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई। इस चुनाव में भी भाजपा को अकेले 182 सीटें मिली थी।

'फील गुड फैक्टर' और इंडिया शाइनिंग
2004 में भाजपा का फील गुड फैक्टर और इंडिया शाइनिंग का नारा फेल हो गया। 14वीं लोकसभा में भाजपा केवल 138 सीटें जीत पाई थी। इस चुनाव में कांग्रेस को 145 सीटें मिली थी और नया राजनीतिक फ्रंट यूपीए बना और डॉ मनमोहन सिंह देश के प्रधानमंत्री बने। 2004 के लोकसभा चुनाव में भाजपा अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के 4.5 साल के काम पर वोट मांगने चुनावी मैदान में उतरी थी, लेकिन बढ़ती महंगाई की वजह से इंडिया शाइनिंग का नारा कमजोर पड़ गया और एनडीए की सरकार नहीं बन पाई।

इसके बाद 2009 में भी भाजपा का प्रदर्शन काफी खराब रहा। पार्टी को 1991 से भी कम यानी केवल 116 सीटें मिली। जनता ने कांग्रेस की अगुवाई वाले यूपीए गठबंधन पर भरोसा जताया और डॉ मनमोहन सिंह दोबारा प्रधानमंत्री बने। इस चुनाव में कांग्रेस को 206 सीटें मिली थी। भाजपा की लोकप्रियता कम हो रही थी।

भाजपा का स्वर्णिम युग
भाजपा ने 2013 में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को आगामी लोकसभा चुनाव का चेहरा बनाया था। हालांकि, नरेन्द्र मोदी को पीएम का चेहरा बनाने के बाद जनता दल यूनाइटेड राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से अलग हो गई। इसके बावजूद भाजपा ने 2014 में प्रचंड बहुमत से चुनाव जीता और कांग्रेस की सीटों की संख्यां पहली बार डबल डिजिट में सीमित रह गई। बीजेपी ने 2014 में अकेले 282 सीटें जीती, जबकि राजग को 336 सीटें मिली थी। इस जीत के साथ ही देश में बीजेपी का नया दौर शुरू हो गया, जिसे मोदी युग कहा जा रहा है। भाजपा ने इसके बाद से पीछे मुड़कर नहीं देखा है। 2019 में भाजपा और ज्यादा सीटें जीतकर सत्ता पर काबिज हुई। भाजपा ने 2019 में अकेले 300 से ज्यादा सीटें जीती और रिकॉर्ड कायम किया। देश ने एक बार फिर से नरेन्द्र मोदी के चेहरे पर विश्वास जताया और पूर्ण बहुमत की सरकार बनी।

आज भाजपा और एनडीए की देश के 17 राज्यों में सरकारें हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, हरियाणा, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गोवा, पुड्डुचेरी, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, असम, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम शामिल हैं। भाजपा ने उत्तर भारत के साथ-साथ नार्थ-ईस्ट में भी मजबूत हुई है। पीएम मोदी की अगुवाई में भाजपा 2024 का भी चुनाव लड़ सकती है। वहीं, विपक्ष के पास नरेन्द्र मोदी का विकल्प नजर नहीं आ रहा है।

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