Bengal Election 2026: मतगणना से पहले TMC को SC से बड़ा झटका, केंद्रीय कर्मचारियों की तैनाती पर दखल से इनकार
SC Rejects TMC Petition: पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 4 मई को होने वाली ऐतिहासिक मतगणना से ठीक दो दिन पहले, सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) को सुप्रीम कोर्ट से तगड़ा झटका लगा है।
कोर्ट ने मतगणना केंद्रों पर केंद्र सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) के कर्मचारियों की तैनाती के खिलाफ दायर टीएमसी की याचिका पर कोई भी नया दिशा-निर्देश जारी करने से इनकार कर दिया है।

जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की विशेष पीठ ने शनिवार, 2 मई को हुई इस महत्वपूर्ण सुनवाई में स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग (ECI) अपने द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार मतगणना प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है।
Supreme Court TMC West Bengal Counting: अदालत ने क्यों कहा-नियमों के खिलाफ नहीं है नियुक्ति?
टीएमसी ने कलकत्ता हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें प्रत्येक काउंटिंग टेबल पर कम से कम एक केंद्रीय कर्मचारी (सुपरवाइजर या सहायक) की अनिवार्य उपस्थिति के चुनाव आयोग के फैसले को सही ठहराया गया था।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की बेंच ने कहा कि प्रावधानों के अनुसार, मतगणना सुपरवाइजर और सहायकों की नियुक्ति राज्य या केंद्र किसी भी पूल से की जा सकती है। इसे नियमों के खिलाफ नहीं माना जा सकता। अदालत ने चुनाव आयोग के उस बयान को रिकॉर्ड पर लिया, जिसमें आयोग ने भरोसा दिलाया है कि 13 अप्रैल के सर्कुलर को उसकी मूल भावना के साथ लागू किया जाएगा, यानी अधिकारियों की नियुक्ति में संतुलन और पारदर्शिता बरती जाएगी।
Kapil Sibal vs EC Supreme Court 2026: कपिल सिब्बल ने उठाए आयोग की मंशा पर सवाल
सुनवाई के दौरान टीएमसी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने तीखी दलीलें पेश कीं। उन्होंने निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें वहां से न्याय की उम्मीद नहीं है। सिब्बल ने मुख्य रूप से चार आपत्तियां दर्ज कराईं। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग गुपचुप तरीके से बैठकें कर रहा है और महत्वपूर्ण जानकारियां साझा नहीं की जा रही हैं।
अतिरिक्त पर्यवेक्षक की ज़रूरत क्यों?
सिब्बल ने तर्क दिया कि जब हर टेबल पर पहले से ही केंद्र का एक 'माइक्रो ऑब्जर्वर' मौजूद है, तो एक और केंद्रीय कर्मचारी को सुपरवाइजर के तौर पर लगाने की क्या आवश्यकता है? टीएमसी का दावा है कि केंद्र सरकार के कर्मचारी उस दल (भाजपा) के प्रशासनिक नियंत्रण में होते हैं जो राज्य में उनकी मुख्य प्रतिद्वंद्वी है, जिससे निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।
TMC ने बदला रुख, पर नहीं मिली राहत
सुनवाई के आखिरी चरण में टीएमसी ने अपना रुख थोड़ा नरम किया। सिब्बल ने अनुरोध किया कि अगर केंद्रीय कर्मचारी तैनात किए जा रहे हैं, तो कम से कम हर टेबल पर एक व्यक्ति राज्य सरकार का कर्मचारी भी होना चाहिए। हालांकि, अदालत ने इस पर कोई विशेष निर्देश देने के बजाय चुनाव आयोग के विवेक पर ही भरोसा जताया। बेंच ने सिब्बल की दलीलों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "स्थिति वैसी नहीं है जैसा आप बता रहे हैं," और याचिका का निपटारा कर दिया।
अब 4 मई की मतगणना पर सबकी नजर
कलकत्ता हाई कोर्ट और अब सुप्रीम कोर्ट से राहत न मिलने के बाद, ममता बनर्जी की पार्टी को अब चुनाव आयोग की वर्तमान व्यवस्था के तहत ही मतगणना में शामिल होना होगा। राज्य भर में 700 कंपनियां केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनात हैं और सभी 291 सीटों (3 सीटों पर सहयोगियों के साथ) के लिए सुरक्षा के 'थ्री-लेयर' इंतजाम किए गए हैं।














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