बंगाल नतीजों से पहले ममता का 'मिशन काउंटिंग': बनाई अभेद्य रणनीति, एजेंटों को मिला नंदिग्राम के लिए सख्त मंत्र
West Bengal CM Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के महामुकाबले के नतीजे आने में अब बस कुछ ही घंटे बचे हैं। 4 मई को होने वाली मतगणना से पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) के खेमे में हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी 02 मई को 4 बजे राज्य के सभी काउंटिंग एजेंटों के साथ एक बेहद अहम वर्चुअल मीटिंग करने जा रहे हैं।
यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब चुनावी माहौल बेहद संवेदनशील बना हुआ है और एग्जिट पोल के नतीजों ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। TMC नेतृत्व किसी भी तरह की लापरवाही से बचना चाहता है और मतगणना वाले दिन हर स्तर पर मजबूत निगरानी सुनिश्चित करने में जुटा हुआ है। इस बैठक का मकसद सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि मतगणना के दिन किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए एक 'कवच' तैयार करना है।

ममता बनर्जी ने पहले ही साफ कर दिया है कि वे जीत के प्रति आश्वस्त तो हैं, लेकिन ईवीएम सुरक्षा और मतगणना प्रक्रिया को लेकर उनके मन में गहरी आशंकाएं हैं।
काउंटिंग से पहले क्यों हो रही है यह बड़ी बैठक?
सूत्रों के अनुसार यह वर्चुअल बैठक शनिवार शाम 4 बजे आयोजित की जाएगी। इसमें राज्य की लगभग 291 विधानसभा सीटों के काउंटिंग एजेंट्स शामिल होंगे, जहां TMC ने अपने उम्मीदवार उतारे हैं। दार्जिलिंग पहाड़ी क्षेत्र की बाकी तीन सीटों पर सहयोगी दल भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा (Bharatiya Gorkha Prajatantrik Morcha) ने चुनाव लड़ा है।
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य मतगणना के दौरान एजेंट्स की भूमिका स्पष्ट करना और उन्हें चुनाव आयोग की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से समझाना है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि किसी भी स्तर पर तकनीकी या प्रशासनिक चूक का आरोप न लगे और एजेंट्स हर राउंड पर पैनी नजर बनाए रखें।
काउंटिंग एजेंट्स को क्या जिम्मेदारियां दी जाएंगी?
पार्टी सूत्रों का कहना है कि बैठक में एजेंट्स को सबसे अहम निर्देश यह दिया जाएगा कि वे मतगणना पूरी होने और जीत का प्रमाण पत्र जारी होने तक काउंटिंग सेंटर नहीं छोड़ें।
TMC का मानना है कि मतगणना के अंतिम चरण तक मौजूद रहना बेहद जरूरी है, क्योंकि कई बार शुरुआती राउंड और अंतिम राउंड के बीच स्थिति बदल सकती है।
बैठक में एजेंट्स को इन बातों पर विशेष फोकस करने के लिए कहा जा सकता है:
- मतगणना के हर राउंड की निगरानी करना
- EVM मशीनों को स्ट्रॉन्ग रूम से बाहर लाने की प्रक्रिया पर नजर रखना
- सील खोलने के दौरान मौजूद रहना
- किसी भी असामान्य गतिविधि की तुरंत सूचना देना
- मतगणना पूरी होने तक सेंटर नहीं छोड़ना
2021 के अनुभव से TMC क्यों सतर्क है?
TMC नेतृत्व 2021 विधानसभा चुनाव के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए इस बार अतिरिक्त सावधानी बरत रहा है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि मतगणना के दौरान छोटी चूक भी बड़े विवाद का कारण बन सकती है।
पार्टी के अंदर चर्चा है कि नंदीग्राम में 2021 की मतगणना के दौरान अचानक बिजली कटने जैसी घटनाओं ने संदेह और विवाद को जन्म दिया था। ऐसे मामलों को देखते हुए इस बार एजेंट्स को किसी भी असामान्य स्थिति की तत्काल रिपोर्टिंग करने के निर्देश दिए जा सकते हैं। अगर मतगणना केंद्र के भीतर कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई देती है, तो एजेंट्स को सीधे पार्टी नेतृत्व से संपर्क करने के लिए कहा जाएगा।
QR Code और नई सुरक्षा व्यवस्था पर भी रहेगा फोकस
इस बार चुनाव आयोग ने मतगणना प्रक्रिया में सुरक्षा बढ़ाने के लिए कुछ नए उपाय शामिल किए हैं। इनमें QR कोड आधारित सत्यापन व्यवस्था भी शामिल है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक एजेंट्स को मोबाइल फ्रेंडली रहने और तकनीकी अपडेट समझने के लिए भी कहा जाएगा। इसका उद्देश्य यह है कि वे मतगणना केंद्र में इस्तेमाल हो रही नई डिजिटल प्रक्रिया को आसानी से समझ सकें।
ममता बनर्जी क्यों जता रही हैं चिंता?
ममता बनर्जी लगातार सार्वजनिक मंचों से मतगणना प्रक्रिया को लेकर सतर्कता बरतने की बात कह रही हैं। उन्होंने कई बार यह आशंका जताई है कि मतगणना के दौरान किसी तरह की गड़बड़ी या EVM से जुड़ी शिकायतें सामने आ सकती हैं।
इसी कारण उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और एजेंट्स को स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर निगरानी बनाए रखने की सलाह दी है। हालांकि राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने साफ कहा है कि मतगणना केंद्रों पर किसी भी तरह की अनियमितता की गुंजाइश नहीं है।
स्ट्रॉन्ग रूम विवाद ने क्यों बढ़ाई चिंता?
मतगणना से पहले कोलकाता के दो काउंटिंग सेंटरों पर तनाव की स्थिति देखने को मिली। TMC नेताओं ने आरोप लगाया कि स्ट्रॉन्ग रूम में पारदर्शिता की कमी है और वहां कुछ गतिविधियां एजेंट्स की गैरमौजूदगी में हो रही थीं।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद सखावत मेमोरियल स्कूल स्थित काउंटिंग सेंटर पहुंचीं और कई घंटे तक वहां मौजूद रहीं। वहीं TMC नेताओं शशि पांजा और कुणाल घोष ने एक अन्य काउंटिंग सेंटर के बाहर धरना भी दिया। इन घटनाओं ने यह साफ कर दिया कि पार्टी इस बार मतगणना प्रक्रिया को लेकर किसी भी तरह का जोखिम लेने के मूड में नहीं है।
रिजल्ट से पहले TMC की रणनीति कितनी अहम?
4 मई को होने वाली मतगणना से पहले TMC अपनी संगठनात्मक ताकत को सक्रिय मोड में ला रही है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि हर काउंटिंग सेंटर पर उसका नेटवर्क पूरी तरह एक्टिव रहे। पीटीआई रिपोर्ट के मुताबिक राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मतगणना वाले दिन एजेंट्स की सतर्कता कई बार परिणाम से जुड़े विवादों को रोकने में बड़ी भूमिका निभाती है। यही वजह है कि TMC इस बैठक को सिर्फ औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा मान रही है।













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