Hepatitis: भारत में एक महामारी बन गया है हेपेटाइटिस का संक्रमण
Hepatitis: विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक डा. टेड्रोस एडनोम घेब्रेयसस ने हेपेटाइटिस दिवस 28 जुलाई को दुनिया को चेतावनी दी है कि हेपेटाइटिस की जांच और इलाज पर जोर देने की जरूरत है। साल 2040 तक हेपेटाइटिस से मौतों का आंकड़ा मलेरिया, टीबी व एड्स (तीनों) से मरने वालों की संख्या के बराबर पहुंच सकता है। अभी हेपेटाइटिस से प्रति वर्ष 10 लाख लोगों का निधन हो जाता है।
क्या है हेपेटाइटिस
हेपेटाइटिस को सामान्य भाषा में पीलिया भी कहा जाता है। यह लीवर के संक्रमण संबंधी बीमारी है। जिसमें लीवर में सूजन आ जाती है और वह सही तरह से काम नहीं कर पाता। लीवर शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है जो भोजन पचाने में अहम भूमिका निभाता है। जिसके प्रभावित होने पर शरीर में अनेक विकार उत्पन्न हो जाते है, यहां तक कि लीवर कैंसर भी हो जाता है।

हेपेटाइटिस एक तरह का वायरस होता है, जो अधिक शराब पीने, दूषित भोजन व पानी पीने, दवाएं अथवा अन्य किसी चिकित्सा के कारण (जैसे संक्रमित खून चढ़ाने से) शरीर में पनपने लगता है। अगर समय रहते इसका इलाज नहीं किया जाता है तो रोगी की मौत भी हो जाती है।
हेपेटाइटिस के लक्षण
हेपेटाइटिस के सामान्य लक्षणों में - थकान और कमजोरी, त्वचा और आँखों का पीला पड़ना, पेट में दर्द और बेचैनी, जी मचलाना और उल्टी, भूख की कमी, गहरे रंग का पेशाब आना, हल्के रंग का मल, जोड़ों में दर्द व बुखार आदि हो सकते हैं।
हेपेटाइटिस का बढ़ता खतरा
हेपेटाइटिस को 'ए, बी, सी, डी और ई' पांच प्रकार से विभाजित किया है। जिसमें हेपेटाइटिस बी और सी सबसे ज्यादा खतरनाक होते हैं। दुनिया भर में हेपेटाइटिस बी और सी से पीडितों की संख्या करीब 35.4 करोड़ है। यह संक्रमित खून, संक्रमित सूई, यौन संबंधों अथवा संक्रमित मां से उसके बच्चे में फैलता है।
हेपेटाइटिस-ए - अधिकांशतः दूषित भोजन और दूषित पानी पीने से अथवा संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने से फैलता है। इससे संक्रमित लीवर हल्की गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है। इसके बचाव के लिए टीका उपलब्ध है और आमतौर पर इसकी समावधि 14 से 28 दिनों की है। इस संक्रमण से दुनिया भर में प्रतिवर्ष करीब 14 लाख लोग ग्रस्त होते हैं। डब्ल्यूएचओ के अनुसार वर्ष 2016 में हेपेटाइटिस-ए से दुनिया भर में 7134 लोगों की मौत हुई थी।
हेपेटाइटिस-बी - यह संक्रमित खून, संक्रमित सुई, यौन संबंधों अथवा संक्रमित मां से उसके बच्चे में फैलता है। यह जल्दी फैलता है और लंबे समय तक चल सकता है। इसे क्रोनिक संक्रमण कहा जाता है। इसमें लीवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। दुनियाभर में हेपेटाइटिस एक प्रमुख वैश्विक स्वास्थ्य समस्या है। इसका प्रकोप पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र व अफ्रीकी क्षेत्र में सबसे ज्यादा है। इससे बचाव के लिए वैक्सीन भी उपलब्ध है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार वर्ष 2019 में हेपेटाइटिस-बी से संक्रमितों की संख्या 29.6 करोड़ थी और लगभग 82 लाख मृत्यु हुई।
हेपेटाइटिस-सीः यह संक्रमण वायरस (हेपेटाइटिस-सी) के कारण होता है, जो तीव्र व लंबे समय तक रह सकता है। यह असुरक्षित इंजेक्शन व यौन संबंध, संक्रमित खून आदि से फैलता है। इस संक्रमण में आजीवन बीमारी जैसे लीवर सिरोसिस तथा कैंसर भी हो सकता है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार लगभग 5.8 करोड़ लोग हेपेटाइटिस-सी से संक्रमित हैं। इसमें करीब 15 लाख प्रतिवर्ष नये संक्रमण होते हैं। वहीं करीब 32 लाख बच्चे व किशोर इससे संक्रमित हैं। साल 2019 में लगभग 2.9 लाख लोग इसके कारण मृत्यु को प्राप्त हुए। इसका अभी तक कोई प्रभावी टीका नहीं है।
हेपेटाइटिस-डी - यह संक्रमण हेपेटाइटिस डी वायरस के कारण होता है और हेपेटाइटिस-बी के द्वारा भी होता है। इसलिए यह एक अनोखे प्रकार का संक्रमण है, क्योंकि वे ही इससे संक्रमित हो सकते हैं जो पहले से ही हेपेटाइटिस बी से संक्रमित हैं। यह अधिक गंभीर हो सकता है और लंबे समय या गंभीर लीवर से संबंधित बीमारियों को बढ़ावा दे सकता है। हेपेटाइटिस-बी का टीका भी इस संक्रमण को रोक सकता है। दुनिया भर में करीब 1.2 करोड़ लोग इससे संक्रमित हैं।
हेपेटाइटिस-ई - यह मुख्य रूप से दूषित पानी या खाने से फैलता है। दुनिया के ज्यादातर देशों में हेपेटाइटिस के संक्रमण का यही कारण होता है। इससे लीवर को भी कोई खास खतरा नहीं होता है। कुछ मामलों में यह गंभीर हो सकता है जैसे गर्भवती महिलाओं और पहले से लीवर की बीमारी वाले लोग। कुछ देशों में इसके लिए टीका उपलब्ध है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनियाभर में प्रति करीब 2 करोड़ लोग इससे पीड़ित हैं। वर्ष 2015 में इस संक्रमण से करीब 44 हजार लोगों की मौत हुई।
हेपेटाइटिस-ए और ई के लगभग 60 प्रतिशत मामले मानसून के दौरान दर्ज किए जाते हैं, क्योंकि यह प्रदूषित जल की वजह से फैलता है। इस मौसम में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, इसलिए इसके संक्रमण की सम्भावनाएं अधिक हो जाती हैं।
भारत में क्या है स्थिति
केंद्रीय स्वास्थ्य खुफिया ब्यूरो (सीबीएचआई) व डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट (2017) के अनुसार भारत में लगभग 4 करोड़ लोग हेपेटाइटिस बी से और 60 हजार से 1.2 करोड़ लोग हेपेटाइटिस सी से संक्रमित थे। प्रतिवर्ष करीब 1.5 लाख लोगों की हेपेटाइटिस-बी के कारण मृत्यु हो जाती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हर साल 28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिवस घोषित किया है। इस वर्ष इसकी थीम वी आर नॉट वेटिंग अर्थात हेपेटाइटिस वायरस के गंभीर रूप लेने का इंतजार न करें, समय पर इलाज करें, रखी गई है। भारत सरकार ने भी एक राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम शुरू किया हुआ है।












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