बॉलीवुड की 'ड्रीम गर्ल' अब गोपी बन पूरे करेंगी मथुरा के 'सपने'

कभी खेत में हांसिये से गेंहू की बालियां काट ग्रामीणों से सीधा संवाद किया और कहीं केवल अदाकारा मान बैठे शहरी क्षेत्र के समूह की शोले फिल्म के डायलाग को सिरे से खारिज कर अहसास करवाया कि वह केवल डायलाग सुनाकर मनोरंजन करने ही नहीं आयी हैं बल्कि यमुना नदी की सफाई और मथुरा को धार्मिक पर्यटन की नगरी के अनुरूप सुविधा संपन्न करना उनका मुख्य लक्ष्य है।
स्टार प्रचारक नहीं केवल धर्मेन्द
हेमा की उभरकर आयी तेजतर्रार और सूझबूझ वाली महिला की राजनीतिक क्षवि से जहां अन्य सीटों पर कमोवेश पार्टी के प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी नरेन्द्र मोदी और पार्टी के चुनावी मुद्दे भी प्रचार में महत्वपूर्ण हैं वहीं मथुरा के मामलें में हालात कुछ फर्क हैं। मसलन इस सीट पर भाजपा को किसी स्टार प्रचारक की जरूरत नहीं रह गयी है। अगर मतदाता हेमा मालिनी से कुछ अपेक्षित कर रहे हैं तो उनके अभिनेता पति धर्मेन्द्र को भी उनके बीच लाया जाना। वैसे हेमा की बडी बेटी रोड शो में पहले ही बडे जनसमूह को आकर्षित कर चुकी हैं।
परिवार के अन्य सदस्यों की मौजूदगी की भी दरकार
सनी दियोल का हेमामलिनी के चुनाव प्रचार में आना नामुमकिन माना जा रहा है, जब भी हेमा से इस सम्बन्ध में प्रश्न किये गये हे तो वह केवल यही कह सकी हैं कि पूरा परिवार उनके साथ है जिस सदस्य की जरूरत होगी वह समय पर जरूर हाजिर होगा, धर्मजी का तो प्रचार में सक्रिय होना सुनिश्चत है ही। वैसे धर्मेन्द्र की पहली पत्नी प्रकाश कौर के पुत्रों यानि सनी दियोल और बौबी दियोल से उनके रिश्ते जैसे भी हों किन्तु हेमा के अपनी पुत्रियों ईशा आर आह्ना से रिश्ते अत्यंत आत्मीय हैं और अपनी कैर्लीफोनियां में रहने वाली सगी बहनों विजेयता तथा अजीता के समान ही मधुर हैं। यह सही है कि धर्मेन्द्र के परिवार में सब कुछ सामान्य है किन्तु अब तक इसका साक्ष ब्रज की उस जनता को नहीं हो सका है जो कि भक्ति और उल्लास पसंद है।
हेमा का विरोध
इधर हेमा मालिनी के खिलाफ चुनाव प्रचार भले ही संभव नहीं हो पा रहा हो किन्तु उनके विरुद्ध चुनाव आयोग के प्रेक्षकों से शिकायतें करने का सिलिसला जरूर चल रहा है। एक शिकायत के आधार पर गत सप्ताह एक मामला भी उनके विरूद्ध दर्ज हुआ है जिसमें उनपर बिना अनुमति के शिक्षा परिसर में सभा करने का आरोप लगाया गया है।
रालोद के जयंत की चुनौती
लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से एमएससी की डिग्री हासिल किये हुए राष्ट्रीय लोकदल के प्रत्याशी जयंत चौधरी का कहना है कि उनकी पार्टी का मथुरा में ठोस जनाधार है, यह सही है कि उनके विरुद्ध चुनाव लड़ने वाली हेमा मालिनी वालीवुड की प्रख्यात स्टार हैं और लोगों में उनके प्रति स्वभाविक आकर्षण है। किन्तु चुनाव की जमीनी हकीकत कुछ और ही है। जिसे यहां के मतदाता भली प्रकार से जानते हैं।
जयंत का कहना है कि पिछले पांच साल के कार्यकाल में उनका अपने निर्वाचन क्षेत्र से नजदीकी रिश्ता रहा है, हमेशा जनता को उपलब्ध रहे हैं। इस लिये उनके विरुद्ध कोई माहौल नहीं है, जहां भी पहुंच रहे है जनस्नेह मिल रहा है।
जयंत कहते हैं कि भाजपा प्रत्याशी से उनकी तुलना का कोई औचित्य नहीं है, वह राजनीति को शौक के रूप में नहीं लोक कल्याण का माध्यम के रूप में लेते हैं। हेमामालिनी की राज्य सभा में सात साल की मौजूदगी की तुलना में उनका पांच साल का लोकसभा सदस्य के रूप में रहा कार्यकाल कहीं अधिक प्रभावी रहा है। जब आप सार्वजनिक जीवन में गंभीरता पूर्वक सक्रिय होते हैं तो ‘मेकअप, गैटअप' और दूसरों के लिखे डायलागों से काम नहीं चलता। अपके क्षेत्र के लोग , जो कि चुनाव के समय मतदाता हैं सब कुछ समझते हैं।
पूर्व में कभी नहीं जीती महिला
पूर्व प्रधानमंत्री चरण सिह की पत्नी एवं रालोद प्रत्याशी जयंत चौधरी की दादी गायत्री देवी ने 1984 में लोकदल के टिकट पर इस सीट से चुनाव लडा था किन्तु कांग्रेस के मानवेन्द्र सिंह ने उन्हें एक लाख से अधिक मतों से करारी शिकस्त दी, 2004 में चौधरी चरण सिंह की बेटी ज्ञानबती को भी कुंवर मानवेन्द्र सिंह के सामने करारी हार देखनी पडी। वैसे इसके बाद 1996 में ललतेश शर्मा एवं 1999 कटोरी देवी भी महिला प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरीं थीं किन्तु उन्हें करारी हार का सामना ही करना पड़ा।












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