Exclusive: नेता ने क्या किया 5 साल उसका भी हिसाब रखेगा इलेक्शन वॉच

Jagdish Chhokar
लखनऊ (अजय मोहन)। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (एडीआर) या फिर इंडिया इलेक्शन वॉच का नाम आते ही सभी के जहन में देश भर के करोड़पति नेताओं और नेताओं के क्रमिनल रिकॉर्ड्स जहन में आने लगते हैं। आम तौर पर इसका महत्व सिर्फ तभी बढ़ जाता है जब चुनाव सिर पर आते हैं, लेकिन अब देश के नेताओं को एडीआर का खौफ सिर्फ चुनाव में शपथ पत्र दाख‍िल करने तक नहीं बल्क‍ि सदन की कार्यवाही के दौरान भी रहेगा, क्योंकि बहुत जल्द एडीआर जनता को यह भी बतायेगा कि किस नेता ने सदन में क्या किया।

वनइंडिया से विशेष बातचीत में एडीआर के संस्थापक प्रो. जगदीश चोकर ने माई नेता डॉट इनफो, इंडिया इलेक्शन वॉच और एडीआर से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें बतायीं। इलेक्शन वॉच देश का एक मात्र सार्वजनिक डाटाबेस है, जिस पर आपको देश के हर नेता के बारे में जानकारी मिलती है।

प्र. अस्त‍ित्व में कैसे आया एडीआर?

उ. 1998 में, उस वक्त मीडिया में क्रिमिनाइलेजशन के बारे में बहुत कुछ लिखा जा रहा था। तब हमें लगा कि कुछ इस बारे में करना चाहिये। लॉ कमीशन की रिपोर्ट आयी, उसमें फंडामेंटल डॉक्यूमेंट मानता हूं, जिसमें 170वीं रिपोर्ट रिफॉर्म ऑफ दि इलेक्टोरल लॉ। यह कानून तो था, कि अभी भी है, कि अगर 2 साल से ज्यादा की सजा हो जाती है तो आप 6 साल तक चुनाव नहीं लड़ सकते। अगर आप सिटिंग एमएलए हैं। उसी में प्रोवीजन था कि अपील करके आप विधायक सांसद बने रह सकते हैं। हमने दिल्ली हाईकोर्ट में पीआईएल दाख‍िल की, कि जो लोग इलेक्शन लड़ते हैं उन्हें यह बताना चाहिये कि उनके ख‍िलाफ कितने केस दर्ज हैं। हाईकोर्ट ने उसे स्वीकार किया तो हमें लगा कि हमारा काम पूरा हो गया।

इलेक्शन वॉच के संस्थापक जगदीश चोकर से विशेष बातचीत

फिर यूनियन ऑफ इंडिया ने उसके ख‍िलाफ अपील की और सारे राजनीतिक दल उसके साथ हो लीं तो हमें लगा कि यह तो अच्छा काम था तो इसे रोकने की कोश‍िश क्यों की। हमने केस लड़ा और हम केस जीत गये। और चुनाव आयोग ने इसे लागू कर दिया। उसके ठीक छह दिन बाद 8 जुलाई 2002 को एक ऑल पार्टी मीटिंग हुई और सभी राजनीतिक दलों ने एक जुट होकर फैसला किया कि इस कानून को लागू नहीं होने दिया जायेगा चाहे कुछ हो जाये। तब हमें लगा कि आख‍िर क्यों ये नेता इसे रोकना चाहते हैं।

सभी दलों ने मिलकर संसद में एक बिल बना दिया। वो बिल पास हो जाता, लेकिन उसी समय रामनाइक का घोटाला हो गया, जिस वजह से बिल रुक गया। तब नेताओं ने दूसरा रास्ता निकाला और एक ऑर्डिनेंस इश्यू कर दिया, कि इसे रोकना बहुत जरूरी है वरना देश में त्राही-त्राही मच जायेगी। तब हम राष्ट्रपति से मिले और कहा कि यह ऑर्डिनेंस गैर संवैधानिक है। राष्ट्रपति ने उस ऑर्डिनेंस को लौटा दिया। फिर हमें बहुत खुशी हुई और लगा कि चलो हमारा काम हो गया। अगले दिन फिर वह ऑर्डिनेंस भेजा और दबाव में राष्ट्रपति को साइन करना पड़ा। और वह ऑर्डिनेंस कानून बन गया।

तब हमें समझ आ गया कि सभी दलों के नेता गड़बड़‍ियां कर रहे हैं, इसीलिये एक भी नेता ने इस ऑर्डिनेंस का विरोध नहीं किया। चूंकि यह कानून बन गया था तो हम सुप्रीम कोर्ट गये। सुप्रीम कोर्ट ने 13 मार्च 2003 को कहा कि यह ऑर्डिनेंस गैर संवैधानिक है। तभी हम चार-पांच लोगों को समझ में आ गया कि कानून बनाने वालों से लड़ने के लिये कानून के दायरे में ही जंग लड़नी होगी। और यहीं से एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (एडीआर) की नींव पड़ी।

प्र. सिर्फ क्रिमिनल रिकॉर्ड देख कर कैसे जज कर लें कि नेता खराब है या अच्छा?

उ. हम यह नहीं जज करते कि नेता अच्छा है या बुरा। हम उसके बारे में विवरण जनता को मुहैया करा देते हैं, अब जनता तय करे कि वो नेता कैसा है।

प्र. नेताओं की प्रॉपर्टी को सार्वजनिक करने की बात कैसे दिमाग में आयी?

उ. देख‍िये अगर हम जैसे किसी आम आदमी के पास एक मकान है, जिसकी कीमत 5 लाख रुपए है, और पांच साल में उसकी कीमत पांच गुनी भी बढ़ जाती है, तो भी चलता है, लेकिन अगर किसी के पास 100 करोड़ की संपत्त‍ि है और पांच साल में 3000 करोड़ की संपत्त‍ि हो जाती है। अब जनता को समझना पड़ेगा कि आख‍िर इतना धन कहां से आ रहा है?

प्र. एडीआर की सबसे बड़ी उपलब्ध‍ि आप कौन सी मानते हैं?

उ. हमें उपलब्ध‍ियां बटोरने के लिये काम नहीं कर रहे हैं। हम सिर्फ देश में लोकतांत्रिक परिवर्तन करना चाहते हैं, ताकि राजनीति की गंदगी समाप्त हो सके। हमारा काम सिर्फ नेताओं के बारे में आंकड़े जुटाना नहीं है, बल्क‍ि आरटीआई के माध्यम से हम कई अन्य काम भी कर रहे हैं। इसमें एक बड़ी सफलता देश के बड़े राजनीतिक दलों को पब्ल‍िक अथॉरिटी घोष‍ित करवाया और उन्हें आरटीआई के दायरे में लाये।

प्र. आगे के क्या प्लान हैं?

उ. अभी तक हम सिर्फ पीआईएल, आरटीआई और शपथपत्रों के आधार पर काम कर रहे हैं और हमारा डाटाबेस जनता को चुनाव के दौरान सही निर्णय लेने में मदद करता है, एडीआर के आगे की प्लानिंग कुछ ऐसी है कि सांसद, विधायकों को पांच साल तक काम तो करना ही पड़ेगा। एडीआर अब जनता को बतायेगा कि किसी सांसद, विधायक ने कितने मुद्दे सदन में उठाये, कितने सवाल पूछे, कितनी बार सदन में उपस्थित हुए और पांच साल तक क्या किया।

प्र. और क्या प्लान हैं आपके?

हमारा आगे का प्लान है नेशनल इलेक्शन वॉच को सभासद, कॉर्पोरेटर, मेयर, ग्राम पंचायत तक के नेताओं का लेखा जोखा तैयार करना, ताकि जमीनी स्तर पर काम कर रहे नेताओं के बारे में भी जनता जान सके।

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