Elections in North East: त्रिपुरा, मेघालय और नागालैंड की बदली राजनीति का जानें इतिहास

कुछ दशक पहले तक उत्तर पूर्वी राज्यों में कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों का सिक्का चलता था और भाजपा को ‘वोट कटवा’ पार्टी के तौर पर देखा जाता था पर अब इन तीनों राज्यों की राजनीति में खासा बदलाव आ चुका है।

Elections in North East history of politics of Tripura, Meghalaya and Nagaland

Elections in North East: पूर्वोत्तर के तीन राज्यों - त्रिपुरा, नागालैंड और मेघालय में विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग हो चुकी है। त्रिपुरा में 16 फरवरी को और मेघालय व नागालैंड में 27 फरवरी को मतदान हुआ था। तीनों राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे 2 मार्च को आएंगे। गौर करने वाली बात ये है कि तीनों विधानसभाओं की 60-60 सीटें हैं। वहीं वोटिंग के बाद आए एग्जिट पोल में त्रिपुरा में भाजपा गठबंधन को बहुमत का अनुमान लगाया गया है। मेघालय में किसी को स्पष्ट बहुमत न मिलने के आसार हैं। वहीं नागालैंड में भाजपा गठबंधन के सत्ता में लौटने का अनुमान है।

वैसे 2 मार्च को ही ये साफ हो पाएगा कि कौन सी पार्टी सरकार बनाएगी और कौन विपक्ष में बैठेगा? हालांकि, इन तीनों राज्यों के अब तक के राजनीतिक सफर की बात करें तो देश को आजादी मिलने के बाद से दशकों तक कांग्रेस, लेफ्ट और क्षेत्रीय पार्टियों का ही इन राज्यों में दबदबा रहा है। हालांकि, इस मिथक को भाजपा ने पिछले चुनाव में बखूबी तोड़ने का प्रयास किया और इतिहास भी गढ़ा।

बदल गया पूर्वोतर का राजनीतिक इतिहास

भारत की आजादी के बाद ब्रिटिश भारत के उत्तर-पूर्वीय क्षेत्र को असम के एकल राज्य के अंतर्गत वर्गीकृत कर दिया गया था। बाद में उत्तर-पूर्वीय राज्यों को असम के अन्तर्गत समूहीकृत करने के विरोध में मुहिम चलाई गई थी। तब 1960-70 के दशक में नागालैंड, मेघालय, मिजोरम और त्रिपुरा राज्यों का गठन किया गया। इसके तहत 30 नवंबर 1963 को नागालैंड, 21 जनवरी 1972 को त्रिपुरा, मेघालय और मिजोरम का गठन किया गया।

वैसे साल 2016 में असम विधानसभा चुनाव के नतीजों से पहले भाजपा को पूर्वोतर के स्थानीय लोग जमानत जब्त पार्टी के रूप में देखते रहे हैं। लेकिन, समय से साथ इन राज्यों की राजनीति बदल गई। आज इन तीनों राज्यों में बीजेपी या तो सत्ता में है या सरकार को समर्थन दे रही है। मेघालय में एनडीए की सरकार है। साल 2018 में बीजेपी ने नेशनल पीपुल्स पार्टी के साथ मिलकर सरकार चलाने की पेशकश की थी। वहीं नागालैंड में नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी बीजेपी के साथ मिलकर सरकार चला रही है। नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी एनडीए का हिस्सा है। जबकि त्रिपुरा में बीजेपी की सरकार है। साथ ही यहां गौर करने वाली बात ये है कि जहां त्रिपुरा हिंदू बहुल राज्य है तो नागालैंड और मेघालय ईसाई बहुल राज्य है।

त्रिपुरा की राजनीति

अगर त्रिपुरा की बात करें तो यहां तीन राजनीतिक पार्टियों भाजपा, कांग्रेस, सीपीआई (एम) एवं स्थानीय आदिवासी दलों का दबदबा है। साल 1983 से 2018 तक यहां कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी का ही यहां शासन था लेकिन साल 2018 में भाजपा के गठबंधन से इन्हें करारी मात मिली। फिलहाल माणिक साहा त्रिपुरा के मुख्यमंत्री हैं। 2018 के चुनाव में एनडीए ने 36 सीटें जीती थीं। जबकि सीपीआई (एम) सिर्फ 16 सीटों पर सिमट गई थी, जबकि कांग्रेस को उस चुनाव में एक भी सीट नहीं मिली थी। उससे पहले 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में सीपीएम गठबंधन को 51, भाजपा को 7 और कांग्रेस को 2 सीटें मिली थीं। यानि 7 सीटों से सीधा 36 सीटों का सफर भाजपा ने तय किया था।

वहीं साल 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में भाजपा ने सत्ता में दोबारा वापसी के लिए पूरा जोर लगा रखा है तो दूसरी तरफ वाम मोर्चा और कांग्रेस गठबंधन बनाकर चुनाव मैदान में हैं। इस बीच पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) भी बंगाली समुदाय को साधने के लिए पूरा जोर आजमाइश कर रही है। क्योंकि 2011 की जनगणना के मुताबिक राज्य में 65% लोग बंगाली बोलते थे। वहीं 31% आदिवासी आबादी है। वैसे यहां 84.5% हिंदू आबादी है। इस बार 16 फरवरी को हुए विधानसभा चुनाव में करीब 86.10% मतदान हुआ। जो पिछली बार की वोटिंग से 4% कम है। इस बार राज्य में कुल 3,337 पोलिंग बूथ बनाए गए थे। त्रिपुरा में कुल मतदाताओं की संख्या 28,13,478 है, इसमें महिला मतदाताओं की संख्या 13,98,825 है। जनता ने 259 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला किया है।

नागालैंड की राजनीति

नागालैंड में नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी की सरकार है। ये पार्टी साल 2017 में चुनाव से पहले तत्कालीन सत्ताधारी नगा पीपुल्स फ्रंट से अलग हो कर बनी थी। इसके बाद साल 2018 चुनाव में पार्टी ने एनडीए से गठबंधन किया और चुनाव जीत गई। तब एनडीए को 32 सीटें मिली थीं। जबकि नगा पीपुल्स फ्रंट को 27 सीटें मिल पाई थीं। फिलहाल नेफियू रियो नगालैंड के मुख्यमंत्री हैं।

27 फरवरी को हुई वोटिंग में शाम 5 बजे तक वोटिंग का आंकड़ा 85.35% था। गौर करने वाली बात ये है कि 16 जिलों की 60 में से 59 विधानसभा सीटों पर वोटिंग हुई। क्योंकि 10 फरवरी को अकुलुतो विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के उम्मीदवार खेकाशे सुमी ने नामांकन वापस ले लिया, जिसके बाद भाजपा उम्मीदवार कजेतो किनिमी को निर्विरोध चुन लिया गया। इस बार 183 उम्मीवार चुनावी मैदान में थे, जिसमें 4 महिला और 19 निर्दलीय उम्मीदवार शामिल हैं। इनके लिए 2,315 मतदान केंद्र बनाये गये थे।

मेघालय की राजनीति

मेघालय की 60 सीटों वाली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अपना वजूद बचाने के लिए मैदान में है, वहीं भाजपा डबल इंजन की सरकार के फॉर्मूले पर अकेले चुनाव लड़ रही है। फिलहाल यहां नेशनल पीपुल्स पार्टी के कॉनराड संगमा सीएम हैं। दरअसल साल 2018 के चुनाव में कांग्रेस को 59 में 21 सीटों पर जीत मिली थी। जबकि नेशनल पीपुल्स पार्टी 20 सीटें और भाजपा सिर्फ 2 सीटें जीत पाई थी। इसके बावजूद बीजेपी से गठजोड़ कर नेशनल पीपुल्स पार्टी ने पीडीएफ और एचएसपीडीपी के साथ मिलकर सरकार बनाई। इन्होंने मेघालय डेमोक्रेटिक अलायंस (एमडीए) बनाया।

वैसे इस बार मेघालय में चुनाव की फिजा बदली हुई है। सत्तारूढ़ एनपीपी ने 56 सीट पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। जबकि कांग्रेस और भाजपा 59 सीट पर चुनाव लड़ रही हैं, जबकि तृणमूल कांग्रेस 58 सीट पर किस्मत आजमा रही है। यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (यूडीएफ) के 46 उम्मीदवार मैदान में हैं। मेघालय में 27 फरवरी को शाम 5 बजे तक 77.55% वोटिंग हुई। यहां भी कुल 60 में से 59 सीटों पर मतदान हुआ। क्योंकि, सोहियोंग सीट से यूडीपी उम्मीदवार एच.डी.आर. लिंगदोह के निधन के बाद यहां चुनाव टाल दिया गया। वहीं राज्य में कुल 30 लाख मतदाता हैं। मैदान में 375 उम्मीवारों में 339 पुरुष, 36 महिलाएं हैं। वोटिंग के लिए 12 जिलों में 3,419 मतदान केंद्र बनाये गये थे।

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