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मत भूलियेगा कभी काकोरी कांड के शहीदों को

नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। अफसोस कि आज सरकार की तरफ से राजधानी में काकोरी कांड की याद में कोई कार्यक्रम नहीं हुआ। आज ही के दिन 1927 में काकोरी कांड के तीन महान सपूतों को अंग्रेज सरकार ने फांसी पर लटका दिया था। ये तीन क्रांतिकारी नायक थे- रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्लाह खां और रोशन सिंह। श्री रामप्रसाद बिस्मिल को गोरखपुर, श्री अशफाकउल्लाह खान को फैजाबाद और रोशन को इलाहाबाद की जिला जेल में फांसी के फंदे पर लटका दिया गया था। इस कांड के जो चौथे योद्धा थे राजेंद्र प्रसाद लाहिड़ी उनको दो दिनों पहले ही यानी 17 दिसंबर को सरकार ने गोंडा जेल में फांसी दे दी थी।

Dont forget the martyrs of Kakori conspiracy case

वरिष्ठ लेखक अवधेश कुमार ने बताया कि 9 अगस्त 1925 को रेल से ले जाये जा रहे सरकारी खजाने को लखनऊ के पास काकोरी रेलवे स्टेशन के पास इनने लूट लिया था। इसकी पूरी योजना बनाई गई थी जो कि हमारे इतिहास के पन्नों में दर्ज है। उस पर यहां चर्चा नहीं करुंगाा। लेकिन वह स्वतंत्रता संग्राम का तब तक का सबसे दुस्साहसी कारनामा था जिससे अंग्रेज सरकार सकते में आ गई थी।

कल्पना करिए, अंग्रेजों के खजाने को लूट लेना वह भी चलती रेल से और उसकी सुरक्षा व्यवस्था को तोड़कर कितने साहस, शौर्य, संकल्प और सुनियोजिम रणनीति की जरुरत होगी! वह भी अपना कोई निजी स्वार्थ नहीं। इसी को हम अब ‘काकोरी कांड' कहते हैं।

अफसोस कि इन शहीदों के नाम पर देश के शायद किसी शहर में कोई सड़क या मोहल्ला हो। ऐसे वीर सपूतों को जिस ढंग से देश विस्मृत कर रहा है वह दिल दहलाने वाला है।

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