Bakrid 2026: ईद पर कुर्बान होने वाला था 'डोनाल्ड ट्रंप' भैंसा, ऐन वक्त पर पलटी किस्मत! अब कहां पहुंचा?

Bakrid 2026: आज पूरे देश और दुनिया भर में ईद-उल-अजहा (बकरीद 2026) पारंपरिक अकीदत और पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। यह खास त्योहार मुख्य रूप से त्याग, समर्पण और 'सुन्नत-ए-इब्राहिमी' के तहत हलाल जानवरों की कुर्बानी देने का पर्व है। लेकिन इसी बकरीद के मौके पर पड़ोसी देश बांग्लादेश से एक ऐसा अनोखा और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है।

वहां 'डोनाल्ड ट्रंप' नाम का एक दुर्लभ भैंसा ईद पर कुर्बान होने ही वाला था, लेकिन ऐन वक्त पर उसकी किस्मत ऐसी पलटी कि खुद सरकार को बीच में आकर उसकी जान बचानी पड़ गई! आइए जानतें हैं सोशल मीडिया पर छा जाने के बाद इस 700 किलो के 'डोनाल्ड ट्रंप' भैंसे को कुर्बानी से बचाकर अब कहां सुरक्षित भेज दिया गया है।

Albino Buffalo Bangladesh

भैंसे का नाम कैसे पड़ा 'डोनाल्ड ट्रंप'?

बांग्लादेश में इस अनोखे भैंसे के चर्चा में आने की सबसे बड़ी वजह इसका बेहद अजीबोगरीब और अनोखा लुक है। करीब 700 किलोग्राम वजन वाला यह जानवर एक दुर्लभ एल्बिनो (सफेद रंग का) भैंसा है। इसके पूर्व मालिक जिया उद्दीन मृधा ने बताया कि उसके भाई ने इस जानवर का नाम 'ट्रंप' सिर्फ इसलिए रखा था क्योंकि इसके सिर पर घने और हल्के सुनहरे रंग के बाल हैं, जो बिल्कुल अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सिग्नेचर हेयरस्टाइल की तरह लहराते हैं। अपने इसी 'असाधारण बालों' के लुक की वजह से यह सोशल मीडिया पर रातों-रात वायरल हो गया।

बड़े-बड़े सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की उमड़ी भीड़

जैसे ही इस दुर्लभ सुनहरे बालों वाले भैंसे की तस्वीरें और वीडियो इंटरनेट पर सामने आए, लोगों में इसे देखने की होड़ मच गई। जिया उद्दीन ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से उनके घर पर बच्चों, आम लोगों और बड़े-बड़े सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की भारी भीड़ सिर्फ 'डोनाल्ड ट्रंप' के साथ तस्वीरें खिंचवाने और रील्स बनाने के लिए उमड़ रही थी। हालांकि, मृधा ने इस भैंसे को बकरीद की कुर्बानी के लिए एक खरीदार को बेच दिया था और उसकी मौत की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी थी।

ऐन वक्त पर सरकार ने लिया एक्शन

जब यह मामला और इसकी इंटरनेट पर लोकप्रियता बांग्लादेश सरकार के पशुपालन विभाग तक पहुंची, तो अधिकारियों ने तुरंत इसकी दुर्लभता को देखते हुए बड़ा फैसला लिया। विभाग ने ढाका के केरानीगंज पुलिस स्टेशन से संपर्क किया। पुलिस अधिकारी मोहम्मद रूहुल कुद्दुस ने बताया कि अधिकारियों की अपील पर तुरंत कार्रवाई करते हुए इस दुर्लभ भैंसे को कुर्बानी से ठीक पहले अपने कब्जे में ले लिया गया।

अधिकारियों का तर्क था कि यह दुर्लभ एल्बिनो भैंसा अभी काफी युवा है और आने वाले कई सालों तक इसे रिसर्च और प्रदर्शनी के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है।

अब नेशनल जू का 'VIP मेहमान' बना 'डोनाल्ड ट्रंप'

कुर्बानी से बचाए जाने के बाद इस भैंसे को सीधे बांग्लादेश के राष्ट्रीय चिड़ियाघर (Dhaka National Zoo) भेज दिया गया है। चिड़ियाघर के क्यूरेटर अतीकुर रहमान ने बताया कि इस वीआईपी जानवर के लिए एक अलग से स्पेशल शेड तैयार किया गया है और इसकी 24 घंटे देखरेख के लिए एक खास कर्मचारी भी नियुक्त किया गया है। चूंकि इस पर बहुत ज्यादा वायरल अटेंशन है, इसलिए इसे फिलहाल शुरुआती दो हफ्तों के लिए क्वारंटीन में रखा गया है, जिसके बाद इसे आम दर्शकों के लिए सुरक्षित रूप से सामने लाया जाएगा।

दरअसल, हर साल बकरीद के मौके पर पशुओं (भैंस, बकरे और भेड़) की कुर्बानी दी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ईद-उल-अजहा का सीधा संबंध हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम के उस इम्तिहान से है, जब वह अल्लाह की रजा के लिए अपने सबसे प्यारे बेटे हजरत इस्माइल की कुर्बानी देने को तैयार हो गए थे। तब अल्लाह ने उनके इस जज्बे को कुबूल कर उनके बेटे की जगह एक दुंबे (भेड़) को रख दिया था। इस त्योहार पर गोश्त को तीन बराबर हिस्सों में बांटकर गरीबों, रिश्तेदारों और अपने परिवार में वितरित किया जाता है, जो समाज में एकजुटता और इंसानियत का संदेश देता है।

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