Trump Threatens Oman: 'हमारी बात मानो नहीं तो कर देंगे धुआं-धुआं', अब किस देश को ट्रंप ने दे डाली धमकी?

Trump Threatens Oman: West Asia में मौजूद होर्मुज स्ट्रेट को लेकर तनाव अभी कम भी नहीं हुआ था कि ट्रंप फिर से तीली लेकर किसी और देश में आग लगाने की तैयारी कर रहे हैं। दरअसल अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पुराने और भरोसेमंद सहयोगी देश ओमान को लेकर धमकी दी है। ट्रंप ने साफ कहा कि अगर ओमान, ईरान के साथ मिलकर होर्मुज स्ट्रेट को मैनेज करने में सहयोग करता है, तो अमेरिका उसे तबाह कर देगा।

यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच तीन महीने पुराने युद्ध को खत्म करने और बंद पड़ी शिपिंग लेन को दोबारा खोलने को लेकर बातचीत चल रही है। ट्रंप का यह बयान इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि ओमान लंबे समय से अमेरिका का करीबी सहयोगी और Middle East में एक अहम mediator रहा है।

ट्रंप ने क्या कहा?

एक प्रेस बातचीत के दौरान ट्रंप से पूछा गया कि क्या अमेरिका उस फौरी तौर पर बने डिप्लोमेटिक फ्रैमवर्क को मानेगा, जिसमें ईरान और ओमान मिलकर होर्मुज स्ट्रेट को कंट्रोल करें। इस पर ट्रंप ने बेहद सख्त जवाब दिया। उन्होंने कहा-

“नहीं, यह स्ट्रेट सभी के लिए खुला रहेगा। यह अंतर्राष्ट्रीय समुद्र है और ओमान को बाकी देशों की तरह व्यवहार करना होगा, वरना हमें उन्हें तबाह करना होगा। वे यह समझते हैं, वे ठीक रहेंगे।”
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ट्रंप के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मच गई। शुरुआत में कई राजनीतिक विश्लेषकों को लगा कि ट्रंप शायद गलती से ईरान की जगह ओमान का नाम ले बैठे हैं। लेकिन बाद में अमेरिकी विदेश विभाग ने इस पर पूरी तरह स्पष्टता दे दी।

क्या बोला अमेरिकी विदेश मंत्रालय?

स्थिति तब और गंभीर हो गई जब अमेरिकी विदेश विभाग ने ट्रंप के बयान का आधिकारिक वीडियो और ट्रांस्क्रिप्ट सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया। इसमें ओमान का नाम साफ तौर पर मौजूद था और बयान में कोई बदलाव या सफाई नहीं दी। इससे साफ हो गया कि ट्रंप ने जानबूझकर ओमान को लेकर यह सख्त चेतावनी दी थी।

अमेरिका और ओमान के रिश्ते क्यों हैं खास?

ओमान को कई दशकों से अमेरिका और ईरान के बीच एक भरोसेमंद mediator माना जाता रहा है। जब भी Middle East में तनाव बढ़ा, ओमान ने दोनों देशों के बीच बातचीत करवाने में अहम भूमिका निभाई। अमेरिका और ओमान के बीच लंबे समय से मजबूत सुरक्षा और आर्थिक रिश्ते रहे हैं। दोनों देशों के बीच 1980 में डिफेंस कॉपरेशन एग्रीमेंट हुआ था, जिसके तहत अमेरिकी सेना को ओमान के मिलिट्री बेसों तक पहुंच मिली। इसके अलावा 2009 में दोनों देशों के बीच बाइलेटरल फ्री ट्रेड एग्रीमेंट भी हुआ था। ऐसे में ट्रंप का ओमान को खुलेआम धमकी देना अमेरिका की विदेश नीति में बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।

आखिर होर्मुज स्ट्रेट इतना अहम क्यों है?

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। दुनिया के कुल क्रूड ऑयल सप्लाई का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। इसलिए यहां किसी भी तरह का तनाव पूरी दुनिया के तेल के दाम और इकोनॉमी को प्रभावित कर सकता है। युद्ध के बाद अब इस स्ट्रेट के भविष्य को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान चाहता है कि ओमान के साथ मिलकर एक नया Persian Gulf Strait Authority” बनाया जाए। इसका मकसद इस रास्ते से गुजरने वाले कमर्शियल शिप से टोल टैक्स वसूलना होगा।

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ओमान क्यों बदल रहा है अपना रुख?

शुरुआत में ओमान ने इस प्रस्ताव का विरोध किया था। लेकिन हालिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि मस्कट अब इससे मिलने वाले आर्थिक फायदे पर गंभीरता से विचार कर रहा है। अगर यह व्यवस्था लागू होती है, तो ओमान को समुद्री व्यापार से बड़ी कमाई हो सकती है। हालांकि अमेरिका इस पूरी योजना का लगातार विरोध कर रहा है। अमेरिका का कहना है कि इंटरनेशनल मेरिटाइम लॉ किसी भी देश को इंटरनेशनल स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से सामान्य टोल वसूलने की अनुमति नहीं देता।

Middle East में बढ़ सकती है नई अस्थिरता

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ता यह विवाद सिर्फ अमेरिका, ईरान और ओमान तक सीमित नहीं है। इसका असर पूरी दुनिया की एनर्जी सिक्योरिटी, ऑयल मार्केट और ग्लोबल ट्रेड पर पड़ सकता है।अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता है, तो इसका सीधा असर तेल के दाम, शिपिंग रूट्स और इंटरनेशनल डिप्लोमेसी पर देखने को मिल सकता है। वहीं ओमान की स्थिति भी अब काफी संवेदनशील हो गई है, क्योंकि वह एक तरफ आर्थिक फायदा और दूसरी तरफ अमेरिकी दबाव के बीच फंसा दिखाई दे रहा है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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