Crimes in Delhi: दिल्ली पुलिस सबसे ताकतवर, लेकिन अपराध पर लगाम लगाने में असफल
आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में अपराधों में दिन-प्रतिदिन बढ़ोत्तरी हो रही है। हालात ऐसे है कि अपराधों के अब ऐसे किस्से सामने आ रहे हैं जो पहले किसी ने न कभी सुने और देखे थे।

Crimes in Delhi: दिल्ली में 31 दिसंबर 2022 की रात 20 साल की एक लड़की को कई किलोमीटर तक कार से घसीटा गया, जिसके बाद उसकी लड़की की दर्दनाक मौत ने सबको सन्न कर दिया। सीसीटीवी फुटेज में यह साफ दिख रहा है, आरोपी अपनी कार से लड़की को घसीटते ले जा रहे हैं। सवाल यह है कि इतनी दूरी तय करने के बावजूद दिल्ली पुलिस को इस घटना की भनक तक नहीं लगी? फिलहाल इस मामले में सभी आरोपी पुलिस के शिकंजे में हैं और कोर्ट ने पांचों आरोपियों को पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।
एक के बाद एक जघन्य अपराध
कुछ दिनों पहले श्रद्धा वॉकर हत्याकांड ने देशभर में सनसनी पैदा कर दी थी। उससे पहले दिल्ली के विवेक विहार इलाके में एक महिला से गैंगरेप के बाद जूते की माला पहनाकर इलाके में मुंह काला करके घुमाया गया। ये पूरी घटना घंटों इलाके में चली। इस घटना पर पीड़िता का आरोप था कि पूर्वी दिल्ली के कस्तूरबा नगर में उसका अपहरण किया गया, फिर उसका गैंगरेप किया गया। तब वहां मौजूद महिलाएं पुरुषों को रेप करने के लिए उकसा रही थीं। वैसे पुलिस को इस बात की सूचना पीड़िता की छोटी बहन से मिली। यानि पुलिसिया तंत्र यहां भी फेल हो गई थी। हालांकि, इस मामले में पुलिस 8 महिलाओं समेत 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
19 फरवरी 2022 को उत्तरी दिल्ली के सन्नोठ गांव में एक दुकान से दुर्गंध आने की खबर पुलिस को दी गई। जांच के लिए आई पुलिस ने जब दुकान का सटर तोड़कर अंदर का नजारा देखा तो वो सन्न रह गए। पुलिस को गाय के गोबर के बोरों के नीचे एक लापता लड़की की आंशिक रूप से क्षत-विक्षत लाश मिली। इस मामले में जब पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया तो उसने खुलासा किया कि एक अन्य व्यक्ति के साथ मिलकर पीड़िता को शराब पिलाई और फिर दोनों ने मिलकर गैंगरेप किया। लड़की हम लोगों की पहचान उजागर कर देगी इसलिए हमने 'पलाजो' से ही उसका गला घोंट दिया।
मई 2022 में दिल्ली के संगम विहार इलाके से एक ऑटो ड्राइवर ने दो दोस्तों के साथ मिलकर लड़की का अपहरण किया। इसके बाद दिल्ली में ही उसका गैंगरेप किया। इसके बाद आरोपी ने कुछ और लड़कों को बुलाकर उसका गैंगरेप करवाया और फिर दूसरे लड़के पीड़िता को मथुरा ले गए, वहां रेप किया फिर वापस उसे दिल्ली तिगरी ले आए और 3 से 4 दिन रेप किया। ताज्जुब की बात ये है कि आरोपी ऑटो से ही उसे दिल्ली से आगरा ले गए और लाए तब भी पुलिस को कानों-कान खबर तक नहीं हुई। हालांकि, पुलिस ने लड़की की बरामदगी के बाद 3 आरोपियों समेत एक नाबालिग को गिरफ्तार किया था।
दरअसल, दिल्ली में हत्या, कातिलाना हमला, लूटपाट, झपटमारी, बलात्कार, पॉक्सो, सोडोमी, चोरी, आर्म्स एक्ट, महिलाओं के खिलाफ जघन्य अपराध और सांप्रदायिक दंगों में दिल्ली का क्राइम रिकॉर्ड दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है।
क्या कहते है NCRB के आंकड़ें
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (National Crime Records Bureau) के मुताबिक देशभर में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध में दिल्ली पहले पायदान पर है। NCRB रिपोर्ट का कहना है कि आम महिलाओं को तो छोड़ दीजिए, दिल्ली की महिला पुलिसकर्मी भी सुरक्षित नहीं हैं। महिला पुलिसकर्मियों को सेक्सुअली उत्पीड़ित किये जाने का उल्लेख भी इसमें किया गया है। वहीं दिल्ली में अन्य बड़े शहरों की तुलना में अपहरण के 3,948 मामले दर्ज किये गये। पतियों द्वारा क्रूरता के 4,674 और नाबालिगों से बलात्कार के 833 मामले दर्ज हुए हैं। दिल्ली में हर दिन औसतन दो लड़कियों के साथ बलात्कार किया जाता है, जबकि दहेज के लिये हत्या के 136 मामले सामने आये हैं।
केंद्रीय कर्मचारी होते हैं दिल्ली पुलिस का जवान
गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन आती है। इसलिए दिल्ली पुलिस में काम करने वाला हर एक पुलिसकर्मी भी केंद्रीय कर्मचारी होता है। जबकि ऐसा अन्य राज्यों के साथ नहीं है और मुख्यत: राज्यों की पुलिस राज्य सरकार के आदेश पर काम करती है और भर्ती भी राज्य सरकार द्वारा की जाती है।
दूसरे राज्यों से दिल्ली पुलिसकर्मी बलों की संख्या ज्यादा
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वर्तमान में दिल्ली की जनसंख्या तकरीबन 2 करोड़ के आस-पास है। वहीं दिल्ली पुलिस की स्वीकृत संख्या 83,762 हैं। मतलब अगर आप राउड फिगर में गणना करें तो 238 लोगों की सुरक्षा के ऊपर एक पुलिसकर्मी तैनात है। जबकि दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के मुताबिक दूसरे राज्यों में हालात बेहद खराब हैं। बिहार में सिर्फ 76 पुलिसकर्मियों पर एक लाख लोगों की सुरक्षा का जिम्मा है। यूपी में 133 पुलिसकर्मियों पर एक लाख लोगों की सुरक्षा का जिम्मा है। वहीं महाराष्ट्र में 174, पश्चिम बंगाल में 1080, राजस्थान में 122, असम में 207 और मध्य प्रदेश में 120 पुलिसकर्मियों पर एक लाख लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी है।
एक लाख की आबादी पर औसतन 156 पुलिसकर्मी
यहां गौर करने वाली एक बात यह भी है कि दुनिया के दूसरी सबसे बड़ी जनसंख्या वाले देश भारत में एक लाख की आबादी पर औसतन 156 पुलिसकर्मी तैनात हैं। यानी कि देश में एक पुलिसकर्मी पर 660 लोगों की सुरक्षा का भार हैं। बता दें कि राष्ट्रीय स्तर पर पुलिसकर्मियों की तय संख्या प्रति लाख लोगों पर 195 है यानी कि सरकार ने एक पुलिसकर्मी को 512 लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी है।
इन खाली पदों को लेकर 16 मार्च 2021 को केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने लोकसभा को एक लिखित प्रश्न के जवाब में बताया था कि देश के विभिन्न राज्यों में पुलिसकर्मियों के 26 लाख 23 हजार 225 पद स्वीकृत हैं। उन्होंने ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (बीपीआरएंडडी) की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के आधार पर बताया कि पूरे भारत में पुलिस के स्वीकृत पदों के मुकाबले सिर्फ 20 लाख 91 हजार 488 पद ही भरे हुए हैं। जबकि जनवरी 2020 तक पूरे देश में 5 लाख 31 हजार 737 पद खाली पड़े हुए थे।
दिल्ली पुलिस में जवानों की कमी नहीं
साल 2021 में ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक पुलिस महकमे में खाली पदों के मामले में उत्तर प्रदेश देश में अव्वल है। उत्तर प्रदेश पुलिस में सबसे अधिक 1 लाख 11 हजार 865 पद खाली हैं। जबकि दूसरे स्थान पर पश्चिम बंगाल है जहां 55,294 और तीसरे स्थान पर बिहार जहां 47,099 पुलिसकर्मियों के पद खाली हैं। मध्यप्रदेश में 31,488; तेलंगाना में 29,492; महाराष्ट्र में 28,550; और गुजरात में 27,349 पुलिस जवानों के पद खाली पड़े हैं। जबकि, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की पुलिस में केवल 9,767 पद रिक्त हैं। वहीं, नागालैंड देश का एकमात्र ऐसा राज्य है जहां राज्य पुलिस के स्वीकृत 26,738 पदों से करीब दो हजार अधिक जवान हैं। यहां वर्तमान में कुल 28,113 पुलिसकर्मी सेवारत हैं।
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