Counterfeit Drugs: जीवनरक्षक दवाइयों के उत्पादन में भारत टॉप पर, मगर नकली दवाओं के कारण हो रही बदनामी
Counterfeit Drugs: विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कफ सिरप से होने वाली मौतों के मामले पर सख्त एक्शन लिया है। इसके तहत डब्ल्यूएचओ ने भारत में बने 7 कफ सिरप को प्रतिबंधित कर दिया है। दरअसल, इन सिरप को पीने से कथित तौर पर कई देशों में लोगों के मरने की खबरें सामने आई थी। इन सिरप बनाने वाली कंपनियों में हरियाणा स्थित मेडेन फार्मास्यूटिकल्स (4 प्रोडक्ट), नोएडा स्थित मैरियन बायोटेक (2 प्रोडक्ट) और पंजाब स्थित क्यूपी फार्माकेम (1 प्रोडक्ट) शामिल हैं।
भारत में भी कई फार्मा कंपनियों पर लगी थी रोक
भारत में दवाओं के निर्यात से पहले उनका क्वालिटी कंट्रोल का जिम्मा केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) के पास है। मेडिकेयर न्यूज डॉट इन के मुताबिक भारत के ड्रग कंट्रोलर ने भी नोएडा की मैरियन बायोटेक, चेन्नई की ग्लोबल फार्मा, पंजाब की QP फार्माकेम और हरियाणा की मेडेन फार्मास्यूटिकल्स सहित कई अन्य फार्मा कंपनियों के खिलाफ जांच की थी। इन फार्मा कंपनियों के उत्पादों में गड़बड़ियां मिलीं, उसके बाद इनके संचालन पर रोक लगा दी गयी थी।

मार्च 2023 में केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने नकली दवाओं से संबंधित मामलों की जांच करते हुए 18 कंपनियों के लाइसेंस रद्द कर दिये थे। इसके अलावा, 26 कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया और कुल 76 कंपनियां अभी भी ड्रग कंट्रोलर के रडार पर हैं।
QR Codes बतायेंगे असली व नकली दवा की पहचान
भारत सरकार नकली दवाओं पर लगाम लगाने के लिए पूरी कोशिश कर रही है। एक तरफ एजेंसियां छापेमारी कर रही है तो दूसरी तरफ नकली दवाओं के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए केंद्र सरकार अब दवाओं पर QR कोड लगाने जा रही है। सरकार ने सबसे अधिक बिकने वाली दवाओं के लिए 'ट्रैक एंड ट्रेस' सिस्टम शुरू करने की योजना बनाई है। पहले चरण में सबसे अधिक बिकने वाली 300 दवाएं अपने पैकेजिंग लेबल पर बारकोड या क्यूआर कोड प्रिंट करेंगी, जिसे स्कैन करने से दवा के बारे में असली व नकली होने की जानकारी मिल जायेगी। इसे लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय ने नोटिफिकेशन जारी किया था और अब यह व्यवस्था 1 अगस्त 2023 से अनिवार्य होगी।
दुनिया के सामने 'वन अर्थ वन हेल्थ' का विजन
मार्च 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'हेल्थ एंड मेडिकल रिसर्च' विषय पर बजट के बाद के एक वेबिनार को संबोधित किया था। इसमें उन्होंने कहा था कि भारत सिर्फ हेल्थकेयर तक ही सीमित नहीं बल्कि एक कदम आगे बढ़कर कल्याण के लिए काम कर रहा है। हमने दुनिया के सामने 'वन अर्थ वन हेल्थ' का एक विजन रखा है। कोरोना ने हमें ये सिखाया कि सप्लाई चेन कितना बड़ा अहम विषय बन गया है। जब महामारी अपने चरम पर थी, तो कुछ देशों के लिए दवाएं, टीके और चिकित्सा उपकरण जैसी जीवन रक्षक चीजें भी हथियार बन गयी थीं। इसलिए उनका फोकस हेल्थ सेक्टर में ज्यादा टेक्नोलॉजी का यूज करना है।
भारत है 'दुनिया की फार्मेसी'
दिसंबर 2022 में केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि भारत विश्वस्तरीय दवाओं का उत्पादन करता है। इसलिए देश को फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड (दुनिया की फार्मेसी) के रूप में जाना जाता है। उन्होंने कहा कि अफ्रीका में जेनेरिक दवाओं की कुल मांग का 50 प्रतिशत भारत से जाता है। इतना ही नहीं अमेरिका की जरूरत की 40 प्रतिशत और यूके की 25 प्रतिशत जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति भारत करता है। भारत दुनिया की कुल वैक्सीन का 60 प्रतिशत और WHO के अनिवार्य टीकाकरण अभियान में लगने वाली कुल वैक्सीन का 40 से 70 प्रतिशत उत्पादन करता है।
भारतीय दवाओं पर दुनिया का भरोसा कायम
केंद्रीय उर्वरक एवं रसायन मंत्रालय की 2022-23 की रिपोर्ट के अनुसार भारतीय दवा उद्योग उत्पादन के हिसाब से दुनिया में तीसरे स्थान पर है। यह उद्योग तेजी से बढ़ रहा है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2017-18 में कुल टर्नओवर ₹226,423 करोड़ होता था, जो 2021-22 में ₹344,125 करोड़ हो चुका है। फिलहाल दुनिया के सभी 206 देशों में भारतीय कंपनियों की दवाओं का निर्यात होता है।
नकली दवाओं का वैश्विक कारोबार
दवाओं के इस बड़े बाजार में नकली दवाओं का कारोबार कितना बड़ा है, उसके आंकड़े पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है। दरअसल, किसी भी देश की सरकारी संस्था की तरफ से भी कभी नकली दवाओं के कारोबार पर कोई आधिकारिक आकंड़े जारी नहीं किये गये हैं। हालांकि, एसोचैम (ASSOCHAM) की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में नकली दवाओं का कारोबार करीब $10 बिलियन से ऊपर का बताया गया है।
फार्माफाइल पोर्टल के मुताबिक दुनियाभर में नकली दवाओं के कारण फार्मास्युटिकल कंपनियों को सालाना $46 बिलियन का नुकसान होता है। जबकि नकली दवाओं का कारोबार $70-₹200 बिलियन के बीच का हो सकता है। यूरोपीय यूनियन बौद्धिक संपदा कार्यालय (ईयूआईपीओ) का अनुमान है कि ईयू बाजार में नकली दवाओं के कारण फार्मास्युटिकल उद्योग को सालाना €10 बिलियन का नुकसान होता है।
2014 में एनआईटी कुरुक्षेत्र के स्कॉलर सौरभ वर्मा, राजेंद्र कुमार और पीजे फिलिप की एक रिसर्च 'The Business of Counterfeit Drugs in India: A Critical Evaluation' रिपोर्ट के अनुसार पूरी दुनिया में नकली दवाओं का कारोबार तकरीबन $200 बिलियन प्रति वर्ष है। इसमें सबसे ज्यादा नकली दवाओं का प्रोडक्शन भारत में होता है। भारत के अलावा 7 प्रतिशत इजिप्ट की और 6 प्रतिशत चीन की नकली दवाओं के बाजार में हिस्सेदारी है। रिसर्च के अनुसार हर साल 3000 से ज्यादा मौतें दुनियाभर में सिर्फ नकली दवाओं के कारण होती हैं।
आवश्यक दवाओं की सूची
विश्व स्वास्थ्य संगठन के विशेषज्ञ समिति द्वारा आवश्यक दवाओं की 'डब्ल्यूएचओ मॉडल सूची' हर दो साल में अपडेट की जाती है। डब्ल्यूएचओ द्वारा पहली आवश्यक दवाओं की सूची 1977 में प्रकाशित हुई थी, और बच्चों के लिए पहली आवश्यक दवाओं की सूची 2007 में प्रकाशित हुई थी। सितंबर 2021 में 22वीं आवश्यक दवाओं की सूची जारी की गई थी। इस सूची का मतलब यह है कि इसमें लिखी दवाएं पूरी तरह से वैध है। यदि इसमें से कोई दवा प्रतिबंधित हो जाती है तो उसे सूची से हटा दिया जाता है।
डब्ल्यूएचओ की तर्ज पर भारत में भी दवाओं को लेकर स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा सूची जारी की जाती है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने 1996 में भारत की आवश्यक दवाओं की पहली राष्ट्रीय सूची तैयार की और जारी की जिसमें 279 दवाएं शामिल थीं। इस सूची को बाद में 2003, 2011, 2015 और 2022 में संशोधित किया गया था। साल 2022 में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने आवश्यक दवाओं की नयी राष्ट्रीय सूची (एनएलईएम) लॉन्च की थी। जहां 384 दवाओं को इस सूची में शामिल किया गया था, जबकि पिछली सूची से 26 को हटा दिया गया था।
भारतीय सिरपों पर कब-कब उठे सवाल?
● अक्टूबर 2022 में अफ्रीकी देश गांबिया ने आरोप लगाया था कि मेडन फार्मा के बनाये गये कफ सिरप लेने से उनके यहां के 70 बच्चों की मौत हो गई थी। इस पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी चिंता जताई थी।
● दिसंबर 2022 में उज्बेकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया था कि भारत में बने कफ सिरप लेने से उसके यहां 18 बच्चों की मौत हो गयी। मंत्रालय का दावा था कि बच्चों ने भारत की कंपनी मैरियन बायोटेक के डॉक 1 मैक्स सिरप का इस्तेमाल किया था।
● 6 अप्रैल 2023 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा कि एक भारतीय कंपनी द्वारा तैयार किया गया नुकसानदायक कफ सिरप मार्शल द्वीप और माइक्रोनेशिया में पाया गया है। इस नुकसानदायक सिरप को पंजाब की क्यूपी फार्माकेल लिमिटेड ने तैयार किया है और इसकी मार्केटिंग कंपनी हरियाणा की ट्रिलियम फार्मा करती है। डब्ल्यूएचओ ने कहा था कि आजतक न तो निर्माता और न ही मार्केटर की ओर से उत्पादों की सुरक्षा और गुणवत्ता की गारंटी दी है।
● जून 2023 में सेंट्रल अफ्रीकन देश कैमरून में पिछले कुछ महीनों में एक दर्जन से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है। अधिकारियों ने इन मौतों के लिए एक कफ सिरप को जिम्मेदार बताया है, जो भारत में बनी हो सकती है। दवा के डिब्बे की तस्वीरों से एक मैन्यूफैक्चरिंग लाइसेंस नंबर का पता चला है, जो इंदौर स्थित रीमैन लैब्स से मेल खाता है। हालांकि, इस पर अभी जांच जारी है।












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