BJP Yatra Rajasthan: राजस्थान में भाजपा की परिवर्तन यात्रा
BJP Yatra Rajasthan: आगामी नवंबर में होने वाले राजस्थान विधानसभा के लिए भाजपा ने 2 सितम्बर से अपने प्रचार का शंखनाद कर दिया। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा ने सवाई माधोपुर से परिवर्तन संकल्प यात्रा को रवाना किया। चुनावी बागडोर के लिए पार्टी में ही संघर्ष कर रही राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, राजस्थान भाजपा के चुनाव प्रभारी प्रहलाद जोशी समेत भाजपा के कई वरिष्ठ नेता यात्रा के आरंभ में उपस्थित थे।
राजस्थान विधान सभा के सभी 200 सदस्यों को चुनने के लिए नवंबर दिसंबर 2023 में चुनाव आयोजित होने वाले हैं। भाजपा ने मतदाताओं तक अपनी बात पहुंचाने के लिए राजस्थान में चार परिवर्तन संकल्प यात्रा निकालने का निर्णय किया है। इसी क्रम में 2 सितम्बर को सवाईमाधोपुर से पहली यात्रा शुरू हुई। सवाईमाधोपुर से निकली यह यात्रा 47 विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरेगी और 18 दिनों में 1847 किलोमीटर की यात्रा करते हुए पूर्वी राजस्थान के सभी विधानसभा क्षेत्रों में जाएगी। इस यात्रा का समापन जयपुर में होगा। इस दौरान यह यात्रा भरतपुर और जयपुर संभाग के जिलों के अलावा टोंक जिले की चार विधानसभाओं में भी जाएगी।

इसी प्रकार दक्षिणी राजस्थान के डूंगरपुर जिले में स्थित बेणेश्वर धाम से दूसरी यात्रा 3 सितम्बर को रवाना होगी। इस यात्रा को गृह मंत्री अमित शाह रवाना करेंगें। 19 दिनों तक चलने वाली यह परिवर्तन संकल्प यात्रा, दक्षिणी राजस्थान के उदयपुर और कोटा संभाग के जिलों के साथ भीलवाड़ा जिले में भी जाएगी और 2433 किलोमीटर चलकर राजस्थान के 52 विधानसभा क्षेत्रों से होते हुए कोटा पहुंचकर समाप्त होगी। इस यात्रा से भाजपा आदिवासी क्षेत्रों में गहलोत सरकार के खिलाफ अपने प्रचार अभियान को धार देगी।
परिवर्तन संकल्प की तीसरी यात्रा को पश्चिमी राजस्थान के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल रामदेवरा से सड़क व परिवहन मंत्री नितिन गडकरी 4 सितम्बर को रवाना करेंगें। यह यात्रा 18 दिनों तक चलेगी और पश्चिमी राजस्थान के 51 विधानसभा क्षेत्रों में 2574 किलोमीटर की यात्रा कर जोधपुर में सम्पन्न होगी। इस यात्रा में जोधपुर और अजमेर संभाग के अलावा नागौर जिले की विधानसभा सीटों को भी शामिल किया गया है।
राजस्थान के उत्तर क्षेत्र से पूर्वी राजस्थान को जोड़ने वाली यात्रा 5 सितंबर को गंगानगर के गोगामेड़ी से आरंभ होगी और 18 दिनों में यह यात्रा बीकानेर संभाग के अलावा सीकर, झुंझुनु और अलवर जिले में 2173 किलोमीटर की यात्रा संपन्न कर अलवर में समाप्त होगी। इस दौरान यह यात्रा 50 विधानसभा क्षेत्रों में से होकर निकलेगी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस यात्रा की शुरुआत करेंगें।
चार भागों में बंटी इन परिवर्तन यात्राओं के दौरान भाजपा हर विधानसभा क्षेत्र में किसान चौपाल, युवा मोटर साईकिल रैली, समाज की वर्ग वार बैठकें और छोटी बड़ी जनसभाओं का आयोजन करेगी। इन चारों यात्राओं को सफल बनाने के लिए भाजपा ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।
दरअसल, चुनावों से पहले भाजपा अपने प्रचार के लिए यात्राओं को जनमत जुटाने का एक प्रभावी उपकरण मानती है। 2002 में जब वसुंधरा राजे राजस्थान की भाजपा अध्यक्ष बनकर आई थी, तब उन्होंने परिवर्तन यात्रा के जरिये ही भाजपा के पक्ष में जबरदस्त माहौल बना दिया था, जिसके फलस्वरूप 2003 के चुनावों में भाजपा को पहली बार 120 सीटों के साथ बहुमत मिला था और वसुंधरा सरकार बनी थी। पर 2008 के विधान सभा चुनाव में भाजपा दुबारा सत्ता में नहीं लौटी, हालांकि कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। 2008 के राजस्थान विधान सभा चुनाव में कांग्रेस बहुमत से 4 सीटों से पीछे रह गई, अस्थिरता को रोकने के लिए कांग्रेस ने अशोक गहलोत पर भरोसा किया और उन्होंने जरुरी समर्थन प्राप्त कर दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। कुल 200 सीटों में से कांग्रेस ने 96 सीटें जीती थीं, जबकि भाजपा 78 सीटें जीतने में सफल रही।
2013 के विधान सभा चुनाव में बीजेपी ने एक बार फिर वसुंधरा राजे पर भरोसा किया और उन्होंने जनमत जुटाने के लिए जनयात्रा पर। भाजपा ने इस बार सुराज संकल्प यात्रा निकाली। इस यात्रा ने भाजपा को बंपर परिणाम दिए, कांग्रेस और गहलोत को राजस्थान में हाशिये पर पंहुचा दिया। भाजपा को 200 में से 163 स्थानों पर विजय मिली और प्रचंड बहुमत के साथ भाजपा की सत्ता में वापसी हुई। कांग्रेस महज 21 सीटों पर सिमट कर रह गयी।
2018 के विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी ने वसुंधरा राजे के नेतृत्व में जनता को फिर से अपनी ओर करने के लिए यात्रा निकली , नाम दिया विकास यात्रा और दावा किया कि राजे सरकार राजस्थान के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। भाजपा ने जो विकास कार्य किए, वे कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकारों ने कभी नहीं किए। पर परिवर्तन का मन बना चुकी जनता ने बीजेपी के दावे को नकार दिया और वोट देकर कांग्रेस की सरकार बनवा दी। कांग्रेस ने 99 तो बीजेपी ने 72 सीटें जीती। अस्थिरता के डर से कांग्रेस ने फिर गहलोत को ही मुख्यमंत्री बनाया और उन्होंने बसपा के विधायकों को कांग्रेस में शामिल करवा कर फिर अपनी अपरिहार्यता सिद्घ की। अब पुराने बसपाईओं से ही गेहलोत को चुनौती मिल रही है। बसपा से कांग्रेस में आए राजेंद्र सिंह गुढ़ा की लाल डायरी कितनी करामात दिखाती है, यह चुनाव में ही पता चलेगा।
इस बार भाजपा ने राज्य में किसी भी चेहरे पर चुनाव लड़ने की बजाय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ने की योजना बनाई है। इसलिए इस बार यह यात्रा वसुंधरा राजे को आगे रखे बिना सामूहिक नेतृत्व में की जा रही है। योजना यह है कि जिस भी विधानसभा क्षेत्र से यह परिवर्तन संकल्प यात्रा निकलेगी, उसे वहीं के भाजपा नेता और कार्यकर्ता मिलकर सफल बनायेंगे। इन यात्राओं के समापन के बाद 25 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक बड़ी सभा जयपुर में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जन्मस्थली धानक्या में करने की योजना भी बनाई जा रही है।
भाजपा को उम्मीद है कि इन यात्राओं और प्रधानमंत्री की जनसभा से राजस्थान में भाजपा के पक्ष में अच्छा और प्रभावी माहौल बनेगा, जिसका लाभ आगामी विधानसभा चुनाव में मिलेगा ! भाजपा कांग्रेस सरकार के भ्रष्टाचार और "कमीशन संस्कृति" को लेकर जनता के बीच जा रही है। देखना है कि यात्रा से वोट की कितनी कमाई भाजपा को होती है।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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