Bihar Prohibition: बिहार में ‘छलकाये जाम’, फेल कानून और माफ़िया के नाम

Bihar Prohibition: बिहार के बेगुसराय में शराब माफियाओं ने एक पुलिस इंसेपक्टर को अभी तीन दिन पहले कुचल कर मार डाला। पुसिल अधिकारी अवैध शराब के गोदाम पर छापा मारने गए थे। पुलिस को अपराधियों द्वारा मार दिए जाने की यह घटना बिहार में कोई नयी नहीं है। आठ साल हो गए शराबबंदी की घोषणा हुए, पर बिहार में एक दिन भी शराब बंद नहीं हुई। 10 लाख जेल भेजे गए, करोड़ों लीटर शराब जब्त भी हुई? पर यह अवैध कारोबार और तेजी से फैलता ही जा रहा है।

नीतीश कुमार की जिद या बिहार की जरूरत

26 नवंबर 2015 को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार में शराबबंदी की घोषणा की और उसे 6 अप्रैल 2016 को लागू कर दिया। उसके पहले 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान ही नीतीश कुमार ने महिलाओं से वायदा किया था कि उनकी सरकार बनी तो बिहार में शराबबंदी लागू कर देंगे। नीतीश ने वायदे के मुताबिक बिहार में पूरी तरह मद्य निषेध लागू तो कर दिया, लेकिन उसकी ठीक से तैयारी नहीं की। ना प्रशासनिक तौर पर शराबबंदी को रोकने का फुलप्रुफ इंतजाम हुआ और ना ही इस फैसले के कानूनी पहलू को ही ठीक से देखा गया। नतीजन पटना हाई कोर्ट ने नीतीश के इस फैसले को गैर कानूनी करार दिया। हालांकि बाद में कुछ संशोधनों के साथ शराबबंदी कानून फिर से लाया गया।

Bihar Prohibition reality failed law and names of mafia

अप्रैल 2016 से लेकर अभी तक शराबबंदी व्यावहारिक तौर पर लागू नहीं हो पाई है। इस मामले में विधानसभा में कई बार बहस हुई और राजद, भाजपा और जदयू के कुछ नेताओं की ओर से भी इस कानून की समीक्षा की मांग की गई, लेकिन नीतीश कुमार टस से मस होने के लिए तैयार नहीं हैं। वह सीधे कहते हैं कि जब तक मैं हूं कोई इस कानून को हटा नहीं सकता। इस कानून के होने के बावजूद बिहार में नकली शराब बन भी रही है और बिक भी रही है और लोग शराब पी कर मर भी रहे हैं। नीतीश साफ कहते हैं- जो पीएगा वो मरेगा।

कानून के बावजूद लोगों की मौत जारी

बिहार में शराबबंदी लागू होने के कुछ ही महीनों बाद 16 अगस्त 2016 को गोपालगंज के खजूरबानी में जहरीली शराब पी कर 19 लोग मर गए। दर्जनों लोग गिरफ्तार हुए। मुकदमा चला, स्थानीय न्यायालय ने दोषियों में से कुछ को मौत की सजा भी सुना दी लेकिन पटना हाई कोर्ट ने पिछले साल ही सभी को दोषमुक्त करार दिया। कोर्ट का कहना था कि जांच एजेंसी आरोप सिद्ध नहीं कर पाई। इसी तरह पिछले साल सिवान और छपरा में भी दर्जनों लोग नकली शराब पीने से काल के गाल में समा गए।

सरकारी आकड़ों के अनुसार शराबबंदी की तारीख से लेकर अभी तक 250 लोग नकली या जहरीली शराब पीने से अपनी जान गवां चुके हैं, वहीं भारतीय जनता पार्टी नेताओं का कहना है कि यह संख्या एक हजार से अधिक है।

लाखों लोग जेल गए फिर भी शराबबंदी बेअसर

इस साल फरवरी में बिहार विधानसभा में पेश किए गए आंकड़े के अनुसार शराबबंदी लागू होने से लेकर जनवरी 2023 तक इस कानून के उल्लंघन के आरोप में 7,49,000 लोगों को जेल भेजा गया। पटना हाई कोर्ट के अधिवक्ता संतोष कुमार वनइंडिया को बताते हैं कि इस समय यह आंकड़ा दस लाख के उपर पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट तक इस आंकड़े पर टिप्पणी कर चुका है कि यदि इतने लोगों को जेल भेजना पड़ रहा है, इसका मतलब है कि कानूनी प्रकिया ठीक से लागू नहीं हुई है।

अधिवक्ता संतोष कुमार कहते हैं कि अब बिहार में शराबबंदी को लेकर लोगों में डर नहीं है, क्योंकि नीतीश कुमार ने कानून में संशोधन कर शराब पीने वालों को जेल भेजना बंद कर दिया है। इसके अलावा पहली बार पकड़े जाने वालों को भी जुर्माना कर के छोड़ दिया जाता है। जबकि मूल कानून में शराब बनाने वाले, बाहर से मंगाने वाले, अपने यहां जमा करने वाले, गैर कानूनी ढंग से बेचने वालों और उसका सेवन करने वालों के लिए दस साल तक की सजा का प्रावधान है। नकली या जहरीली शराब बनाने या बेचने वालों को मौत या उम्र कैद की भी सजा हो सकती है। बावजूद अपराधी यदि बेखौफ हैं तो समझ लीजिए कि कानून का कोई डर किसी को नहीं है।

राजनीति और अवैध कारोबार के बीच का घालमेल

बिहार भाजपा के नेता नलिनी रंजन सिंह उर्फ लालो सिंह वनइंडिया से कहते हैं कि राजद और जदयू से जुड़े माफिया नकली शराब का कारोबार चला रहे हैं। इसलिए इस पर कोई रोक नहीं लग पा रही है। राज्य को शराब से कोई राजस्व भले नहीं मिल रहा है लेकिन इन दोनों पार्टियों को पैसा मिल रहा है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह भी लगातार मद्य निषेध कानून के विफल होने का आरोप नीतीश के कामकाज के तरीके पर ही लगाते हैं। उनका कहना है कि केवल नीतीश अपनी जिद के लिए लाखों लोगों को जेल भेज रहे हैं और सरकार का करोड़ों रुपये का नुकसान कर रहे हैं।

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी तो लगातार इस कानून को खत्म करने या इसमें संशोधन करने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने हाल ही में यह मांग की है कि जिस तरह गुजरात की गिफ्ट सिटी में शराब की बिक्री और उपयोग को छूट मिली है उसी तरह बिहार में भी चुनिंदा होटलों और क्लबों में शराब की बिक्री की अनुमति मिलनी चाहिए। उनके अनुसार बिहार में पूर्णतः शराबबंदी का कानून लागू होने से पर्यटन और उद्योग को भारी नुकसान हो रहा है।

बिहार सरकार के अपने दावे

बिहार सरकार का कहना है कि शराबबंदी के कई फायदे हुए हैं। चोरी डकैती और छिनैती की वारदातों में कमी आई है। गांवों में आर्थिक उन्नति हुई है। लोगों के मकान बनने लगे हैं, परिवार के साथ लोग अब समय ज्यादा बिताते हैं और अब राज्य में परिवहन दुर्घटनाएं भी काफी कम हो गईं हैं।

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