इंटर-कास्ट शादियों से जुड़ी 30 दिलचस्प बातें
[अजय मोहन] लड़की सयानी होते ही सबसे पहले उसके पिता के माथे पर चिंता की लकीरें दिखाई देने लगती हैं। शादी के लिये धन कहां से आयेगा, इससे बड़ी चिंता होती है अपनी ही जाति में अच्छा लड़का कैसे मिलेगा? ठीक उसी के उलट जब अलग-अलग जातियों के लड़का और लड़की प्यार में होते हैं और अक्सर अकेले में सोचते हैं, "हमारी शादी हो पायेगी या नहीं? मम्मी-पापा मानेंगे? चाचा-ताऊ, मामा-मौसजी लोग तो सबसे ज्यादा ऑबजेक्शन करेंगे! क्या करें, समझ नहीं आता?"
भारत देश में शादी के बंधन को जनम-जनम का बंधन माना जाता है। ऐसे में हिन्दुस्तान में अभी वो दिन बहुत दूर हैं, जब इंटर-कास्ट मैरेज यानी अंतर-जातीय विवाह को सभी लोग हंस कर स्वीकार करेंगे। ऐसे में इंटर-रिलीजन मैरेज तो बहुत दूर की बात है। भारतीय समाज के इस जटिल मुद्दे पर से कई सारी परतें हम इस लेख में उठाने जा रहे हैं। यह लेख अमेरिका में न्यू जरसी की प्रिंसिन्टन यूनिवर्सिटी के लिये भारत में किये गये शोध पर आधारित है। यह शोध कुमुदिन दास, केसी दास, टीके रॉय और पीके त्रिपाठी द्वारा किया गया है।
इस अध्ययन में भारत सरकार के नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे समेत कई अन्य सरकारी व गैर सरकारी एजेंसियों से आंकड़े जुटाये गये। इसमें पूरे भारत से 43,102 शादी-शुदा जोड़ों पर अध्ययन किया गया। इनमें लगभग सभी राज्यों के हर तबके के लोग शामिल हैं। अगर आप यह सोच रहे हैं कि इंटर-कास्ट मैरेज का मुद्दा उठाने की ऐसी क्या जरूरत आन पड़ी, तो हम आपको बता दें कि आज भी देश के छोटे-बड़े शहरों व गांवों में इंटर-कास्ट मैरेज की वजह से खून खराबा आम है।
भारत में खून-खराबे के एक बड़े कारण से जुड़े 40 तथ्य आप पढ़ सकते हैं स्लाइडर में। हर स्लाइड के सामने आपको ऐसी जानकारी मिलेगी, जिसके बारे में शायद आपको नहीं मालूम होगा।

देश में 10% इंटर-कास्ट मैरेज
इस अध्ययन में जो सबसे बड़ी बात निकल कर आयी वो यह है कि भारत में मात्र 11 प्रतिशत शादियां ही इंटर-कास्ट मैरेज होती हैं, जबकि 2.1 फीसदी शादियां इंटर-रिलीजन होती हैं।

शहरों में सबसे ज्यादा
अध्ययन के मुताबिक भारत के बड़े शहरों में ही सबसे ज्यादा इंटर-कास्ट मैरेज होती हैं। दूसरे नंबर पर 3-टीयर सिटी आती हैं और फिर कस्बे व गांव।

शुरुआत बॉम्बे से हुई
ऐसा माना जाता है कि इंटर कास्ट मैरेज की शुरुआत बॉम्बे से हुई। वैसे भी औद्योगिक नगरी और फिल्म इंडस्ट्री के यहां पर होना इसका सबसे बड़ा कारण है। अध्ययन के अनुसार 1963 में सबसे ज्यादा 149 इंटर-कास्ट मैरेज बॉम्बे में हुई थीं।

पुराने जमाने की सोच
आप सोचते होंगे कि पुराने जमाने की सोच सिर्फ अपने धर्म में मैरेज पर जोर देती थी। ऐसा नहीं है। 1958 में हुए एक सर्वे में 51 फीसदी माता-पिता ने अपने बच्चों की इंटर-कास्ट मैरेज करवाने की इच्छा जतायी थी। यह सर्वे डा. कपाडिया ने किया था।

इंटर-कास्ट मतलब लव मैरेज
देखा जाये तो भारत में इंटर-कास्ट मैरेज का मतलब लव मैरेज ही है, क्योंकि आंकड़ों के मुताकि भारत में होने वाली कुल इंटर-कास्ट शादियों में 96.5 फीसदी लव मैरेज ही होती हैं।

ऑनर किलिंग का कारण
भारत के हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, राजस्थान जैसे कई राज्यों में ऑनर किलिंग में सबसे बड़ा कारण इंटर-कास्ट मैरेज ही होता है। बल्कि यूं कहिये कि दूसरी जाति में विवाह पर ही ऐसी वारदातें होती हैं।

5.58% महिलाओं की नीची जाति में शादी
भारत में कुल होने वाली इंटर-कास्ट शादियों में 5.58 प्रतिशत में महिलाएं अपने से नीची जाति के पुरुषों से शादी करती हैं।

5.38% पुरुष की नीची जाति में शादी
भारत में कुल होने वाली इंटर-कास्ट शादियों में 5.38 प्रतिशत में पुरुष अपनी से नीची जाति की महिला से शादी करते हैं।

दक्षिण भारत में इंटर-कास्ट शादियां
लोग सोचते हैं कि शिक्षित और ऊपरी तबके में शादी में कास्ट फैक्टर ज्यादा मायने नहीं रखता है, जबकि यह बात गलत है। भारत के सामाजिक और आर्थिक रूप से विकसित राज्यों में दक्षिण भारत गिना जाता है और यहां पर मात्र 9.71 इंटर-कास्ट शादियां होती हैं।

गोवा में सबसे ज्यादा इंटर-कास्ट मैरेज
अंतर-जातीय विवाह के मामले में गोवा सबसे आगे है। यहां पर 20.69 प्रतिशत शादियां इंटर-कास्ट होती हैं।

सिक्किम सेकेंड, पंजाब थर्ड
आंकड़ों के अनुसार सिक्किम दूसरे नंबर पर है। यहां 20 फीसदी शादियां इंटर-कास्ट होती हैं, जबकि पंजाब 19.90 फीसदी के साथ तीसरे नंबर पर है। केरल (19.65 प्रतिशत) चौथे स्थान पर है।

सबसे कम मेघायल, राजस्थान में
सबसे कम इंटर-कास्ट शादियां मेघालय में (2.04 प्रतिशत) होती हैं। राजस्थान में (3.03 प्रतिशत), तमिलनाडु में 2.96 प्रतिशत, छत्तीसगढ़ में 3.4 प्रतिशत, मध्य प्रदेश में 4.39 प्रतिशत, जम्मू-कश्मीर में 4.2 प्रतिशत इंटरकास्ट मैरेज होती हैं।

बिहार, हरियाणा, गुजरात, महाराष्ट्र
बिहार में 6.14 प्रतिशत, नागालैंड में 6.67 प्रतिशत, हरियाणा 18.50 प्रतिशत, त्रिपुरा में 16 प्रतिशत, गुजरात में 15.49 प्रतिशत, महाराष्ट्र में 17 प्रतिशत और कर्नाटक में 16.41 प्रतिशत।

मुस्लिम महिलाएं आगे
इंटर-कास्ट मैरेज के मामले में हिन्दू महिलाओं की तुलना में मुस्लिम महिलाएं आगे हैं। करीब 14 फीसदी मुस्लिम महिलाओं में से 7.83 महिलाओं ने नीची जाति के पुरुष से शादी की, जबकि 6.23 प्रतिशत ने अपने से ऊंची जाति में शादी की।

15-19 साल की उम्र में शादी
आंकड़ों के अनुसार पंजाब में 15-19 साल की उम्र में सबसे ज्यादा 35 फीसदी इंटर-कास्ट मैरेज हुईं, जिनमें 26 प्रतिशत लड़कियों ने अपनी से नीची जाति के लड़के से शादी की।

पंजाब की कुड़ियां फॉरवर्ड
अध्ययन में पाया गया है कि पंजाब की लड़कियां अपनी पसंद के लड़के चुनने के मामले में सबसे ज्यादा फॉरवर्ड होती हैं।

केरल में 25 फीसदी
15 से 19 साल की उम्र की बात करें तो केरल में 25 फीसदी लड़कियां जाति से बाहर जाकर शादी करती हैं।

पढ़े लिखे लोगकरते हैं इंटर-कास्ट मैरेज
अध्ययन के अनुसार पढ़े लिखे लोग इंटर-कास्ट शादी करने में ज्यादा रुचि रखते हैं। अध्ययन के मुताबिक पंजाब में 68 फीसदी और केरल में 60 फीसदी पढ़े लिखे लोगों ने जाति के बाहर जाकर शादियां कीं।

हिन्दुओं में सबसे ज्यादा
पंजाब और केरल के आंकड़े बताते हैं कि हिन्दुओं में सबसे ज्यादा इंटर-कास्ट मैरेज होती है।

महिलाएं और इंटरकास्ट मैरेज
अगर सिर्फ महिलाओं की बात करें तो तमिलनाडु और राजस्थान में मात्र 3 फीसदी महिलाएं ही इंटरकास्ट मैरेज करती हैं। इन दोनों राज्यों में इंटरकास्ट मैरेज बहुत कम होती है।

गांव बनाम शहर
अगर तमिलनाडु और राजस्थान की बात करें तो दोनों जगह ग्रामीण इलाकों के लोग शहरों की तुलना में इंटर-कास्ट मैरेज में ज्यादा आगे होते हैं।

ज्यादा पढ़े लिखे मर्द
अध्ययन के अनुसार पुरुष जितने ज्यादा पढ़े लिखे होते हैं, उनकी इंटर-कास्ट शादी करने की उम्मीद उतनी ही कम होती है। ज्यादा पढ़े लिखे और कम पढ़े लिखों में इस मामले में 25 प्रतिशत का अंतर है।

ज्यादा पढ़ी लिखी औरत
वहीं महिलाओं के लिये यह आंकड़े उलट हो जाते हैं। यहां पर ज्यादा पढ़ी लिखी महिलाएं इंटर-कास्ट मैरेज प्रिफर करती हैं, जबकि कम पढ़ी लिखी महिलाएं अपनी कास्ट में शादी को। दोनों के बीच 20 प्रतिशत का फर्क है।

वर्किंग विमेन
पंजाब से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार वर्किंग विमेम, नॉनवर्किंग विमेन की तुलना में 78 फीसदी ज्यादा तत्पर रहती हैं, इंटरकास्ट मैरेज के लिये।

मीडियम क्लास की मानसिकता
भारत के मीडियम क्लस परिवारों में किये गये सर्वे के अनुसार 57 प्रतिशत लोग ही इंटर-कास्ट मैरेज को पसंद करते हैं।

हाई क्लास की मानसिकता
सर्वे के अनुसार हाई क्लास सोसाइटी में 66 प्रतिशत इंटर-कास्ट शादी के फेवर में रहते हैं।

अगर लड़की नीची जाति की है
इंटर-कास्ट मैरेज में अगर लड़की नीची जाति की है, तो घर में उसे सम्मान नहीं मिलता है। परिवार की अन्य महिलाएं उसके साथ पराया व्यवहार करती हैं। खास तौर से धार्मिक या पारिवारिक अनुष्ठानों के मौकों पर।

अगर लड़की नीची जाति की है
इसे भारत का दुर्भाग्य ही कहेंगे कि नीची जाति से आने वाली बहू को वो सम्मान नहीं मिलता है, जितना समान जाति से आने वाली बहू को मिलता है। ऐसी बहुओं को परिवार के सदस्यों के दिलों में जगह बनाने में काफी संघर्ष करना पड़ता है।

अगर लड़का नीची जाति का है
भारत में दामाद को बहुत ऊंचा दर्जा दिया जाता है। इस मामले में इंटर-कास्ट मैरेज का कोई खास प्रभाव नहीं पड़ता है। ज्यादातर मामलों में पाया गया, कि अपनी सी ऊंची जाति की लड़की से शादी करने वालों को ससुराल में वैसा ही सम्मान मिला, जैसे समजाति वालों को मिलता है।

लव मैरेज करने वालों की बच्चों की शादी
ज्यादातर लोग सोचते हैं कि लव मैरेज या इंटरकास्ट मैरेज करने वालों की संतानों की शादी में तमाम रुकावटें आती हैं। जबकि सर्वे में इंटर-कास्ट मैरेज करने वाले माता-पिता में 69 फीसदी ने कहा कि उनके बच्चों की शादी में कोई रुकावट नहीं आयी, जबकि 31 फीसदी ने कहा, थोड़ी बहुत परेशानियां झेलनी पड़ीं।












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