Thalapathy Vijay के इस को-स्टार ने इस्लाम क्यों कबूला? क्या रखा नया नाम? गले में शिव-यीशु की माला!
Thalapathy Vijay Co Star Jai Converted To Islam Reason: तमिलनाडु के नवनियुक्त मुख्यमंत्री थलपथी विजय के को-स्टार के धर्मांतरण ने सिनेमा से सियासी जगत तक चर्चा का बाजार गरम कर दिया है। गलाट्टा प्लस को दिए एक विस्तृत इंटरव्यू में को-स्टार जय (जैकांत) ने खुलकर इस्लाम कबूलने की वजह बताई। खास बात यह है कि गले में सबरीमाला-यीशु की माला पहनने के राज भी उजागर किए।
यह कहानी सिर्फ एक अभिनेता के धर्म परिवर्तन की नहीं है, बल्कि आधुनिक तमिल सिनेमा, सितारों की आध्यात्मिक खोज, सामाजिक समानता की चाह और करियर के उतार-चढ़ाव की भी है। आइए जानते हैं कौन है ये को-स्टार, जिसने बदल लिया धर्म?

Who Is Jaikanth: को-स्टार जय (जैकांत) कौन हैं? तमिल सिनेमा में पदार्पण और ब्रेकथ्रू
तमिल सिनेमा में कई ऐसे कलाकार हैं जिन्होंने बिना किसी बड़े स्टारडम के अपनी अलग पहचान बनाई, और उन्हीं में एक नाम है जय का। स्क्रीन पर उनका नेचुरल एक्टिंग स्टाइल और आम लड़के जैसी इमेज दर्शकों को काफी पसंद आती है। यही वजह है कि जय ने धीरे-धीरे खुद को तमिल फिल्मों के भरोसेमंद कलाकारों में शामिल कर लिया।
Jai (Actor) का जन्म 6 अप्रैल 1984 को चेन्नई में हुआ था। उनका असली नाम जैकांत (Jaikanth) है। वे मशहूर संगीतकार Deva के भतीजे और संगीतकार Sabesh के चचेरे भाई हैं। परिवार में संगीत का माहौल होने की वजह से जय ने फिल्मों में कीबोर्डिस्ट के रूप में भी काम किया। इसी दौरान उनका फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ाव बढ़ता गया।

साल 2002 में जय को पहली बड़ी पहचान मिली। निर्देशक ए. वेंकटेश (A. Venkatesh) की फिल्म भगवती (Bhagavathi) में उन्होंने थलापथी विजय (सी. जोसेफ विजय) के छोटे भाई गुना का किरदार निभाया। रोल छोटा था, लेकिन दर्शकों ने उनकी मौजूदगी को नोटिस किया। उस समय शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि यही अभिनेता आगे चलकर तमिल सिनेमा का जाना-पहचाना चेहरा बनेगा।
Thalapathy Vijay Co Star Jai Profile: 2007-2008: असली ब्रेकथ्रू
- फिल्म चेन्नई 600028 (2007): दोस्तों की क्रिकेट टीम की कहानी वाली यह फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई। जय ने रघुवरन का किरदार निभाया। फिल्म की नेचुरल अभिनय शैली और यंगस्टर्स के रियल लाइफ टच ने युवाओं को आकर्षित किया।
- सुब्रमणिपुरम (Subramaniapuram- 2008): निर्देशक ससिकुमार (Sasikumar) की यह फिल्म असली गेम चेंजर बनी। जय की सबसे बड़ी उपलब्धि बनी। 1980 के दशक के मदुरै के बेरोजगार युवाओं की कहानी। अज़हागर के रोल में जय का रफ, रियलिस्टिक और इंटेंस अभिनय सराहा गया। फिल्म कल्ट क्लासिक बनी और जय को लीड हीरो के रूप में स्थापित किया।
इसके बाद आई फिल्में जैसे वामनन, गोवा, एंगेयम एपोथम, राजा रानी ने उन्हें मध्यम बजट की अच्छी फिल्मों का चेहरा बना दिया। वे बहुमुखी अभिनेता साबित हुए रोमांस, एक्शन, ड्रामा सब में।
करियर का उतार-चढ़ाव: सफलता से संघर्ष तक

2010 के बाद जय की फिल्मों की क्वालिटी और कमर्शियल सफलता दोनों में गिरावट आई। कई औसत या फ्लॉप फिल्में आईं। जैसे...
- राजा रानी (2013): अच्छी फिल्म, लेकिन बड़े ब्रेक की कमी।
- बाद की फिल्में: वलियावन, पुगळ्, कलकलप्पु 2, अन्नापूर्णी आदि।
वजह बनीं?
- स्क्रिप्ट चॉइस में गलतियां।
- बड़े स्टार्स के साथ मल्टी-स्टारर में साइड रोल।
- तमिल सिनेमा का बदलता ट्रेंड, बिग बजट एक्शन, पैन-इंडियन अपील और नई पीढ़ी के हीरो (विजय, सूर्या, दानुष आदि) का दबदबा।
आज जय अभी भी सक्रिय हैं। हालिया फिल्म सत्तेंद्रु मारुधु वानीलाई (2026) में योगी बाबू, मीनाक्षी गोविंदराजन के साथ काम किया। लेकिन वे अब टॉप स्टार लिस्ट में नहीं गिने जाते। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका धर्म परिवर्तन करियर की गिरावट से जुड़ा नहीं है।
धार्मिक खोज: सबरीमाला से यीशु तक, फिर इस्लाम
इंटरव्यू में जय ने बताया कि वे पहले सभी धर्मों का सम्मान करते थे और प्रयोग कर रहे थे। जैसे...
- सबरीमाला यात्रा: माला पहनी, व्रत रखा।
- ईसाई प्रभाव: एक साल तक यीशु की माला (रोसरी) पहनी, उपवास रखा।
- मानना था कि सभी देवता एक समान हैं।
लेकिन कुछ मंदिरों में बार-बार 'अपमान' और 'असंतोषजनक घटनाएं' हुईं। उन्होंने गलाट्टा प्लस में कहा कि कुछ अप्रत्याशित घटनाएं हुईं जिनसे मैं अंदर से असहज महसूस करता था। ऐसी कई बातें होती रहीं।'
मस्जिद से प्यार क्यों? (2011 के आसपास):
जय के मुताबिक, यह टर्निंग पॉइंट बना। सभी लोग कतार में खड़े होकर नमाज पढ़ रहे थे। सब जानते थे कि मैं अभिनेता हूं, लेकिन अंदर किसी ने मुझसे बात नहीं की, फोटो नहीं मांगी। बाहर आने के बाद बहुत विनम्रता से बात की। क्या यहां समानता है? क्या वे सबको बराबर मानते हैं? अंदर सिर्फ अल्लाह सर्वोच्च हैं। कोई सेलिब्रिटी स्पेशल नहीं। जितनी देर चाहें नमाज पढ़ सकते हैं। कोई धक्का नहीं, कोई जल्दबाजी नहीं। यह योग जैसा शांत अनुभव था।
जय ने कहा कि इस्लाम अपनाने के बाद उनका स्वभाव भी सकारात्मक रूप से बदला। घरवालों की प्रतिक्रिया सकारात्मक रही कि जो लड़का कभी किसी देवता की पूजा नहीं करता था, वह अब कम से कम किसी ईश्वर का नाम तो ले रहा है। 2019 में विकटन मैगजीन को दिए इंटरव्यू में उन्होंने पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि सात साल से इस्लाम का पालन कर रहे हैं। नाम बदलकर अजीज जय रखने पर विचार कर रहे हैं, लेकिन अभी तक नहीं बदला।
तमिल सिनेमा में धर्म परिवर्तन
तमिल इंडस्ट्री में कई कलाकारों ने विभिन्न धर्मों की ओर रुझान दिखाया है:
- युवान शंकर राजा: सूफी प्रभाव, दरगाह विजिट।
- अन्य कलाकारों में भी आध्यात्मिक खोज आम है।
जय का मामला इसलिए चर्चित है क्योंकि उन्होंने स्पष्ट रूप से हिंदू मंदिर अनुभवों की आलोचना की और इस्लाम की तारीफ की। सोशल मीडिया पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं आईं, कुछ ने व्यक्तिगत आस्था का सम्मान किया, कुछ ने मंदिरों के सामान्यीकरण पर आपत्ति जताई, जबकि कुछ ने करियर से जोड़कर देखा।
व्यक्तिगत विश्वास की गरिमा
जय का इस्लाम अपनाना 2011 से चली आ रही आस्था की प्रक्रिया का परिणाम है। मंदिरों में मिले कथित अपमान ने उन्हें असंतुष्ट किया, जबकि इस्लाम में मिली समानता और शांति ने आकर्षित किया। उन्होंने नाम बदलने पर विचार किया लेकिन अभी जय ही बने हुए हैं।
यह मामला हमें बड़े सवाल पूछने पर मजबूर करता है। क्या धार्मिक स्थल वाकई समानता देते हैं? क्या सेलिब्रिटी कल्चर आस्था को प्रभावित करता है? व्यक्तिगत आस्था का सम्मान हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन सामाजिक सद्भाव बनाए रखना भी उतना ही जरूरी। जय की आगामी फिल्मों में अब नजर आएगा कि उनका नया अवतार पर्दे पर कैसे दिखता है। चाहे अजीज जय हों या जय...उनकी जर्नी उनकी अपनी है।













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