राम गोपाल वर्मा ने KGF 2 को कहा बेकार, RRR को दिया सर्कस का नाम और फिर जो हुआ....
राम गोपाल वर्मा ने साउथ की सुपरहिट फिल्म 'केजीएफ 2' और 'आरआरआर' के बारे में जमकर बुराई की है। इसके अलावा उन्होंने बॉलीवुड की सुपरहिट फिल्म 'द कश्मीर फाइल्स' के ऊपर भी अपना गुस्सा उतारा है।
मुंबई, 3 सितंबरः बॉलीवुड के मशहूर डायरेक्टर राम गोपाल वर्मा अपनी बयानबाजी के लिए पूरी इंडस्ट्री में मशहूर हैं। वह अपनी बेबाकी के लिए सुर्खियों में छाए रहते हैं। वह हर इवेंट पर किसी न किसी खास टॉपिक पर अपपना बयान देते नजर आते हैं। लेकिन अब उन्होंने कुछ ऐसा कह दिया है जिसे सुनकर लोग काफी गुस्सा हो गए हैं। आपको बता दें कि राम गोपाल वर्मा ने साउथ की सुपरहिट फिल्म 'केजीएफ 2' और 'आरआरआर' के बारे में जमकर बुराई की है। इसके अलावा उन्होंने बॉलीवुड की सुपरहिट फिल्म 'द कश्मीर फाइल्स' के ऊपर भी अपना गुस्सा उतारा है। बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्डतोड़ कमाई करने वाली इन फिल्मों को लेकर राम गोपाल वर्मा ने बड़ा ही अजीब बयान दिया है।

'केजीएफ 2' है सबसे बेकार फिल्म
बॉलीवुड हंगामा को दिए इंटरव्यू में राम गोपाल वर्मा ने कहा- यश की फिल्म केजीएफ 2 को बॉलीवुड में किसी ने पसंद नहीं किया है। बॉलीवुड के एक बड़े डायरेक्टर ने मुझसे कहा कि वो पांच बार कोशिश करने के बावजूद उस फिल्म को आधे घंटे से अधिक नहीं झेल नहीं पाए। इतना ही नहीं राम गोपाल वर्मा ने आगे कहा- 'केजीएफ 2' और 'द कश्मीर फाइल्स' दो ऐसी फिल्में हैं, जिन्होंने सबकुछ तबाह कर दिया है। 'द कश्मीर फाइल्स बहुत ही स्लो फिल्म है। उसे एक ऐसे डायरेक्टर ने बनाया जिसे बॉलीवुड ने कभी सीरियसली नहीं लिया लेकिन बावजूद इसके उस फिल्म ने 250 करोड़ रुपये की कमाई की जो कि हैरान करने वाली बात है।

राम गोपाल वर्मा ने कहा- 'केजीएफ 2' अंदर से है खाली
डायरेक्टर राम गोपाल वर्मा ने कहा- 'केजीएफ 2 और द कश्मीर फाइल्स दो ऐसी फिल्में हैं, जिनके अंदर कुछ नहीं है। दोनों ही फिल्में एक-दूसरे से पूरी तरह अलग हैं। केजीएफ 2 का भयावह सच यह है कि बॉलीवुड में यह फिल्म किसी को पसंद नहीं आई है। जब कोई फिल्म आपको पसंद नहीं आती है और वह ऐसी कमाई करती है तो आप कन्फ्यूज हो जाते हैं, आपको समझ नहीं आता कि उस फिल्म का क्या करना है।

'केजीएफ-2' बॉलीवुड पर भूत की तरह मंडरा रहा है
उन्होंने आगे कहा- हॉलीवुड में एक मशहूर लाइन है, 'आप कॉन्टेंट पर बहस कर सकते हैं, लेकिन आप सक्सेस पर बहस नहीं कर सकते। इसलिए, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपको क्या पसंद आया और क्या नहीं। आप अपनी नापसंद से किसी की सफलता को नजरअंदाज नहीं कर सकते। राम गोपाल वर्मा ने कहा- केजीएफ-2 बॉलीवुड पर भूत की तरह मंडरा रहा है।

ये 'मेरे पास मां है' टाइप की फिल्म है
यश की सुपरहिट फिल्म 'केजीएफ 2' को लेकर उन्होंने आगे कहा- इस फिल्म की कहानी जमीन से जुड़ी हुई है। यह 70 के दशक के अमिताभ बच्चन की फिल्मों की तरह है। हमें लगा था कि वो अंदाज अब पुराना हो गया है। यह 'मेरे पास मां है' टाइप की फिल्म है। प्रशांत नील ने इसे बड़े ही अवास्तविक तरीके से संभव बनाया। वह मशीनगन से फायरिंग कर रहा है, ऐसे में जीप हवा में क्यों उड़ेगी? क्या कोई जवाब दे सकता है लेकिन इस पर सवाल उठाना मेरी मूर्खता है। मैं यही समझाने और बताने की कोशिश कर रहा हूं।

बिना लॉजिक की फिल्म है 'केजीएफ 2'
राम गोपाल वर्मा से जब पूछा गया कि क्या उन्हें 'केजीएफ 2' पसंद नहीं आई तो इस पर उन्होंने कहा- ऐसा नहीं है कि मुझे फिल्म पसंद नहीं आई। मुझे सही शब्द नहीं मिल रहा है। मैं यह कहूंगा कि मैं घबरा गया था। मैं अवाक होकर मुंह खोलकर फिल्म देख रहा था। फिल्ममेकर्स अपनी फिल्म में लॉजिक ढूंढ़ते हैं लेकिन जब एक बगैर लॉजिक वाली फिल्म केजीएफ 2 सारे रिकॉर्ड तोड़ देती है तो आप अब आगे क्या ही कर सकते हैं।

'द कश्मीर फाइल्स' बहुत ही स्लो फिल्म
वहीं फिल्म द कश्मीर फाइल्स को लेकर राम गोपाल वर्मा- 'द कश्मीर फाइल्स भी किसी से कम नहीं है। यह एक ऐसे डायरेक्टर ने बनाई है जिसे बॉलीवुड ने कभी गंभीरता से नहीं लिया। अनुपम खेर इस फिल्म के सबसे अच्छे एक्टर थे। फिर भी, यह देश में 250 करोड़ रुपये कमा गई। उन्होंने आगे कहा- 'द कश्मीर फाइल्स' अब तक की सबसे धीमी फिल्म थी। हमने अब तक फिल्ममेकर के तौर पर जो कुछ भी बनाया, यह फिल्म उन सारे नियमों को तोड़ती है। इसमें कोई स्क्रिप्ट नहीं है, आप यह भी नहीं बता सकते कि इसमें लीड एक्टर कौन है और सेकेंड लीड कौन।

राजामौली की 'आरआरआर' को कहा सर्कस
इस इंटरव्यू में राम गोपाल वर्मा ने फिल्म 'आरआरआर' के बार में कहा- मैंने एसएस राजामौली को यह बताया था कि मेरे लिए आरआरआर एक सर्कस की तरह है। मेरा मतलब यह नहीं है कि यह बुरी फिल्म है। सर्कस आमतौर पर हमें जोकरों की याद दिलाता है लेकिन सच तो यह है कि सर्कस में बहुत कुछ होता है। उन्होंने आगे कहा- आरआरआर में वो सीन जहां राम चरण और जूनियर एनटीआर एक लड़के को बचाते हैं, वह मुझे बिल्कुल सर्कस की याद दिलाता है। उसमें लोग रस्सियों को पकड़कर इधर-उधर झूलते हैं।












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