Nadaaniyan Review: करण जौहर को क्यों बेचनी पड़ी धर्मा की हिस्सेदारी, नादानियां है परफेक्ट उदाहरण
फिल्म: नादानियां
निर्देशक: शौना गौतम
कलाकार: खुशी कपूर, इब्राहिम अली खान, दीया मिर्जा, महिमा चौधरी, जुगल हंसराज, अर्चना पूरन सिंह और सुनील शेट्टी
समय अवधि: 1 घंटा 59 मिनट
रेटिंग: .5 स्टार (ये भी ज्यादा है)
धर्मैटिक एंटरटेनमेंट की नादानियां रोमांटिक-कॉमेडी जॉनर की फिल्म लेकर आई है। जिसमें उन्होंने प्यार, मज़ाक और हल्की-फुल्की चालाकी दिखाने की कोशिश करती है। लेकिन ये फिल्म कोशिश ही करती है। नादानियां जैसी फिल्में देखकर लगता है कि करण जौहर को धर्मा की हिस्सेदारी बेचनी पड़ी। क्योंकि नादानियां फिल्म ऐसी है कि इसे आप किसी भी प्रकार की नादानी नहीं बोल सकते। एक और बात ये है कि आखिरी फिल्म इंडस्ट्री के बड़े बैनरों की क्या मजबूरी है कि स्टारकिड को फिल्मों में लेना है। इब्राहिम को एक्टिंग करने के लिए किसने कहा, सबसे पहले तो उसका हिसाब करना चाहिए। बाकी खुशी कपूर के बारे में कुछ कहना ही बेकार है।

कहानी और किरदार
फिल्म की कहानी सोशल मीडिया की चकाचौंध भरी दुनिया में घूमती है। जहां पिया जयसिंह (खुशी कपूर) एक ग्लैमरस और प्रभावशाली सोशल मीडिया स्टार हैं। जिनकी ऑनलाइन छवि परफेक्ट लगती है। लेकिन उनके जीवन में कई उलझनें छिपी हैं। दूसरी ओर, अर्जुन मेहता (इब्राहिम अली खान) एक महत्वाकांक्षी, चतुर और आत्मनिर्भर नोएडा का लड़का है। जिसका सपना एक बड़ा वकील बनने का है। फिल्म परिवार के पहलू को भी संवेदनशीलता से दर्शाती है। पिया के अमीर और रूढ़िवादी माता-पिता के रूप में सुनील शेट्टी और महीमा चौधरी हैं। जबकि अर्जुन के मध्यमवर्गीय लेकिन स्नेही माता-पिता के रूप में जुगल हंसराज और दीया मिर्ज़ा है।
एक्टिंग है या टॉर्चर
इब्राहिम ने इस फिल्म से डेब्यू किया है। जैसा मैंने ऊपर भी लिखा है, आखिर क्या मजबूरी थी। सैफ को किसने कहा कि इब्राहिम भी एक्टिंग कर सकते हैं। उन्हें जिम से बाहर निकलते हुए पैपराजी स्पॉट करते हैं। अगर वो वहीं एक्टिंग करेंगे तो ठीक रहेगा। क्योंकि इब्राहिम के कालजयी अभिनय के लिए अभी भारत के दर्शक तैयार नहीं है। अच्छी जॉ लाइन होना हीरो की परिभाषा नहीं है। ये मुंबई के फिल्ममेकर्स को जान लेना चाहिए। धर्मा और करण जौहर की कोई तो मजबूरी होगी, जो वो सबका बीड़ा उठाकर चल रहे हैं। हालांकि इसमें नुकसान उनका ही हो रहा है। खुशी कपूर का भी वही है। लवयापा में उन्होंने थोड़ा ठीक काम करने की कोशिश की थी। लेकिन इस बार उनसे कुछ नहीं हो पाया है। ना एक्सप्रेशन हैं और ना अच्छी डायलॉग डिलेवरी। दोनों की एक्टिंग देख ये कहा जा सकता है कि इनसे ना हो पाएगा। सुनील शेट्टी, जुगल हंसराज, दीया मिर्जा और बाकी एक्टर्स ने फिल्म को बचाने की कोशिश की है। लेकिन उनकी कोशिश पूरी नहीं हो पाई।
नहीं समझ आई डायरेक्शन की मजबूरी
फिल्म का डायरेक्शन शौना कपूर ने किया है। उन्होंने फिल्म को खराब बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। उनका डायरेक्शन भी खराब है। इस फिल्म की कहानी को चार लोग रीवा, राजदान कपूर, इशिया मोइत्रा और जेहान हांडा ने लिखी है। पूरा रिव्यू पढ़कर आपको ये समझ आ गया होगा कि आखिर इन्होंने भी कैसा काम किया है। अब इस फिल्म के बारे में और कुछ लिखना आपत्तिजनक हो जाएगा। इसलिए मैं अपनी बात को यही रोक रहा हूं। इस बार मैं आपसे ये भी नहीं कह सकता हूं कि आप भी फिल्म देखिए और अपनी राय बनाइए। क्योंकि 2 घंटे आपके बर्बाद होंगे। अगर फिर भी आप ये गलती कर रहे हैं तो कमेंट अपनी राय जरूर दीजिएगा।












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