Ghooskhor Pandat Contrversy: सुप्रीम कोर्ट के आगे झुके नीरज पांडे, बदला जाएगा मनोज बाजपेयी की फिल्म का नाम
एक्टर Manoj Bajpayee की फिल्म Ghooskhor Pandat के टाइटल विवाद पूरे देश में फैल गया था। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी संज्ञान लिया था। अब फिल्ममेकर Neeraj Pandey ने गुरुवार 19 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बताया कि उन्होंने फिल्म का टाइटल बदल दिया है। इसका कहीं भी उपयोग नहीं किया जाएगा।

नीरज ने अपने एफिडेविट में ये भी बताया कि नया नाम अभी तय तक फाइनल नहीं हुआ है। लेकिन जो भी रखा जाएगा, वह पुराने नाम जैसा नहीं होगा। पुराने नाम से मिलता-जुलता भी नहीं होगा।फिल्म की कहानी और उसके मोटिव (उद्देश्य) को सही ढंग से दिखाया जाएगा। जिससे कोई गलत मतलब नहीं निकलेगा। इसके अलावा पुराने नाम से जुड़े सभी पोस्टर, ट्रेलर और पब्लिसिटी कंटेट को सारे प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया है।
इससे पहले 12 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने मेकर्स और ओटीटी प्लेटफॉर्म Netflix को नाम बदलने का निर्देश दिया था। याचिकाकर्ता अतुल मिश्रा ने फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की थी। कोर्ट ने पिछली सुनवाई में स्पष्ट कहा था कि किसी भी समुदाय को अपमानित करने वाला शीर्षक स्वीकार्य नहीं है। फिल्म का टीजर 3 फरवरी 2026 को रिलीज किया गया था। इसके सामने आते ही नाम को लेकर विरोध शुरू हो गया। कई जगहों पर शिकायतें दर्ज कराई गईं और मामला अदालत तक पहुंचा। ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि 'पंडित' जैसे सम्मानजनक शब्द को भ्रष्टाचार से जोड़ना आपत्तिजनक है। मुंबई के वकील आशुतोष दुबे ने इसे समुदाय की गरिमा के खिलाफ बताया।
टीजर में मनोज बाजपेयी सीनियर इंस्पेक्टर अजय दीक्षित की भूमिका में नजर आते हैं, जिन्हें 'पंडित' के नाम से जाना जाता है। कहानी एक ऐसे पुलिस अधिकारी के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसकी सेवा यात्रा विवादों और पदावनति से भरी रही है।
विवाद बढ़ने पर नीरज पांडेय ने सोशल मीडिया पर सफाई दी कि फिल्म एक काल्पनिक पुलिस ड्रामा है और किसी जाति या धर्म को निशाना बनाने का उद्देश्य नहीं है। उन्होंने कहा कि बतौर फिल्मकार वे सामाजिक जिम्मेदारी को समझते हैं और सम्मानजनक कहानी कहने के पक्षधर हैं।












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