'सुखकर्ता दुखहर्ता ...', लालबाग के राजा का दर्शन करने पहुंचा ये सुपरस्टार, देखें आरती
Kartik Aaryan at Lalbaugcha Raja in Mumbai: पूरे देश में गणेश चतुर्थी का पर्व पूरे धूम-धाम से मनाया जा रहा है। चारों ओर गणेश उत्सव की धूम है। लोगों के घरों में आज गणपति विराज रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर मुंबई के सबसे मशहूर गणपति लालबागचा राजा के दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ देखी गई, आम से लेकर खास तक सभी बप्पा के दर्शन के लिए व्याकुल दिखे। आज सुबह जब यहां आरती हुई तो उस वक्त का माहौल बेहद ही अलौकिक था।

बप्पा के दर पर मत्था टेकने बॉलीवुड स्टार कार्तिक आर्यन भी पहुंचे, आम जनमानस की तरह वो भी गणपति की भक्ति में काफी लीन नजर आए। आपको बता दें कि हर साल गणेशोत्सव पर लालबाग के राजा के यहां भारी भीड़ देखने को मिलती है।
पहली गणेश मूर्ति 1934 में स्थापित की गई थी
आस्था के केंद्र लालबाग में सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल द्वारा पहली गणेश मूर्ति 1934 में स्थापित की गई थी। गणेश चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी तक यहां पर मेले जैसा माहौल रहता है। इस दरबार में लोग दूर-दूर से मत्था टेकने आते हैं।
मुंबई के परेल इलाके में स्थित हैं राजा का दरबार
मालूम हो कि लालबाग का राजा मुंबई के परेल इलाके में स्थित हैं। इस मंदिर को 'नवसाचा गणपति' भी कहते हैं जिसका अर्थ होता है 'इच्छाओं की पूर्ति करने वाला', माना जाता है कि बप्पा के इस दर से कोई खाली हाथ नहीं लौटता है। यहां पर मांगी गई हर मन्नत जरूर पूरी होती है।
यहां पर लाखों का चढ़ावा चढ़ता है...
हर साल यहां पर दर्शन के लिए लाखों की संख्या में भक्तगण आते हैं और यहां पर लाखों का चढ़ावा चढ़ता है लेकिन यहां दान की गई रकम से कई चैरिटी संस्थाएं चलती हैं। इस मंडल के अपने कई अस्पताल हैं जहां गरीबों का फ्री में इलाज किया जाता है। प्राकृतिक आपदाओं के शिकार लोगों की भी "लालबागचा मंडल" मदद करता है।
लालबागचा राजा की आरती
- सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची।
- नुरवी पुरवी प्रेम कृपा जयाची।
- सर्वांगी सुंदर उटी शेंदुराची।
- कंठी झळके माळ मुक्ताफळांची॥
- जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती।
- दर्शनमात्रे मन कामनांपुरती॥ जय देव...
- रत्नखचित फरा तूज गौरीकुमरा।
- चंदनाची उटी कुंकुमकेशरा।
- हिरेजड़ित मुकुट शोभतो बरा।
- रुणझुणती नूपुरे चरणी घागरीया॥ जय देव...
- लंबोदर पीतांबर फणीवर बंधना।
- सरळ सोंड वक्रतुण्ड त्रिनयना।
- दास रामाचा वाट पाहे सदना।
- संकष्टी पावावें, निर्वाणी रक्षावे,
- सुरवरवंदना॥ जय देव...।












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