Funky Review: सिनेमाघर में आते ही छा गई अनुदीप की कॉमेडी ड्रामा फंकी, फिल्म देख निकली जनता ने क्या कहा?
Funky Twitter Review: तेलुगु सिनेमा में वैलेंटाइन वीक से ठीक पहले रिलीज हुई फिल्म 'फंकी' ने एंटरटेनमेंट परोसने की कोशिश की है। जिसको लेकर दर्शकों की राय फिलहाल बंटी हुई नजर आ रही है। सितारा एंटरटेनमेंट और फॉर्च्यून फोर सिनेमा के संयुक्त बैनर तले बनी इस फिल्म में 'मास का दास' विश्वाक सेन और 'ग्लैमर क्वीन' कयादू लोहार मुख्य भूमिकाओं में हैं। निर्देशन की कमान संभाली है Anudeep KV ने, जिन्होंने पहले Jathi Ratnalu जैसी हिट कॉमेडी दी थी।

श्रीकरा स्टूडियोज़ प्रस्तुति 'फंकी' 13 फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। इस फिल्म की रिलीज से पहले ही नॉर्थ अमेरिका में प्रीमियर शो रखे गए थे। जहां पहला शो अमेरिकी समयानुसार सुबह 5 बजे शुरू हुआ। एडवांस बुकिंग को अच्छी प्रतिक्रिया मिली, जिससे मेकर्स के हौसले बुलंद थे।
तकनीकी टीम भी दमदार मानी जा रही थी। सुरेश सारंगम की सिनेमैटोग्राफी, भीम सिसेरोलियो का संगीत, नवीन नूली की एडिटिंग और जॉनी शेख का आर्ट डायरेक्शन भी शानदार है। ट्रेलर और प्रोमो देखकर दर्शकों को उम्मीद थी कि यह फिल्म हंसी और रोमांस का फुल पैकेज होगी। जो अब उनके रिएक्शन से साफ पता चल रहा है।
रिलीज के बाद सोशल मीडिया पर फिल्म को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ फैंस ने इसे "पूरा पैसा वसूल फैमिली एंटरटेनर" बताया। एक यूजर ने तो यहां तक लिख दिया कि "अनुदीप कभी निराश नहीं करते, ये 100% हिट है।"
लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू भी सामने आया। कई दर्शकों ने पहले हाफ को 'औसत' या 'औसत से नीचे' बताया। वहीं, कुछ कहना है कि वन-लाइनर कॉमेडी में कुछ पंच काम करते हैं, मगर ज्यादातर चुटकुले बचकाने लगते हैं। उनका मानना है कि क्रिस्प एडिटिंग के चलते कॉमेडी सीन का नैचुरल फ्लो टूट जाता है।
कुछ नेटिज़न्स ने कहानी को कमजोर, डबिंग को लापरवाह और हास्य को जबरदस्ती का बताया। संपादन को लेकर भी नाराजगी दिखी। एक दर्शक ने सवाल उठाया-"क्या एडिटिंग के बाद फिल्म दोबारा देखी गई थी? अच्छे वन-लाइनर्स भी बेअसर हो रहे हैं।"












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