Chhattisgarh: Bhilai Nigam में 'आमदनी चवन्नी और खर्चा रुपैया', संचित निधि का खजाना भी खाली
छत्तीसगढ़ के बड़े नगर निगमों में शामिल भिलाई निगम में आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण अब कर्मचारियों को इसकी मार झेलनी पड़ रही है। भिलाई नगर निगम प्रबंधन को अपने कर्मचारियों के वेतन भुगतान के लिए बार-बार संचित निधि का सहारा लेना पड़ रहा है। लेकिन अब तो निगम की संचित निधि कोष भी खाली होने के कगार पर है।

संचित निधि में अब सिर्फ 5.5 करोड़ राशि शेष
नगर पालिक निगम भिलाई की महापौर परिषद ने कलेक्टर के माध्यम से प्रस्ताव तैयार कर संचालनालय को पत्र प्रेषित कर अनुमति मांगी। इस बार दीपावली से पहले निगम कर्मियों व ठेकेदारों और निगम के खर्चों के भुगतान के लिए संचित निधि का सहारा लेना पड़ा। लगभग 9.5 करोड़ रुपए की राशि का भुगतान कर्मियों और ठेकेदारों को किया गया है। जिसके बाद अब सिर्फ 5.5 करोड़ की राशि ही निगम की संचित निधि में बाकी है। इसी तरह कोरोना महामारी के दौरान भी कर्मियों के वेतन के लिए राशि से निकाली गई।

सिटी बस के लिए निकाले 10 करोड़, अब तक नहीं मिले वापस
नगर निगम भिलाई में संचित निधि का पैसा आपात स्थिति के साथ साथ विकास कार्यो में खर्च किए जाते रहें हैं जिसके चलते यह स्थिति निर्मित हुई है। जैसे आज से सात साल पहले तत्कालीन भाजपा सरकार की मांग पर निगम प्रबन्धन ने भिलाई दुर्ग में सिटी बस खरीदी के लिए संचित निधि से 10 करोड़ रुपए की राशि राज्य सरकार को दी गई थी। यह राशि निगम को वापस की जानी थी। लेकिन अब तक यह राशि निगम को आज तक नहीं मिली है। इसके अलावा वर्तमान में निगम प्रशासन ने राज्य सरकार के अनुमति से नगर निगम क्षेत्र के रिक्त भूखंडों की बिक्री शुरू की है। जिससे राजस्व की प्राप्ति निगम को हो रही है। लेकिन इस राशि के खर्चे पर भी हाईकोर्ट ने स्टे लगा दिया है।

शहर की सफाई का खर्च ही लगभग 40 करोड़
नगर पालिक निगम भिलाई में खर्चों की अगर बात करें तो निगम में सफाई में ही लगभग 40 करोड़ की राशि खर्च की जाती है। नियमित कर्मचारियों को लगभग 3.5 करोड़ का वेतन दिया जाता है। वहीं प्लेसमेंट कर्मचारी, माली, पम्प ऑपरेटर, चालक, सुरक्षा कर्मी, सफाई कर्मी के तौर पर करीब 2200 कर्मचारी, काम कर रहे हैं। इस तरह से करीब 4 करोड़ से अधिक की राशि इनके वेतन भुगतान के रूप में खर्च की जा रही है। वेतन भुगतान को छोड़कर निगम के अन्य खर्चे भी हैं। जिसे पूरा करने में ही निगम को कई अन्य मदों का सहारा लेना पड़ता है। इसके अलावा भविष्य निधि में करीब 40 लाख रुपए जाता है। इसके साथ ही निगम में वर्तमान में 30 करोड़ का बिजली बिल बकाया है।

भिलाई निगम की आर्थिक स्थिति खराब होने के प्रमुख कारण
नगर पालिक निगम, भिलाई के आय में कमी होने के मुख्य कारण की अगर बात करें तो सबसे पहला कारण सम्पत्तिकर की नियमित वसूली में कमी को माना जा सकता है। जो वर्तमान में एक निजी कम्पनी स्पेरो इंडिया के हाथों में है। दूसरा कारण राज्य सरकार द्वारा सम्पत्तिकर में दी गई छूट को माना जा रहा है। निगम के आय का एक बड़ा हिस्सा लगभग 8 से 10 करोड़ भिलाई इस्पात संयंत्र से आता है। लेकिन यहां भी विवाद के चलते निगम को सम्पत्तिकर की राशि नहीं मिल पा रही है। निगम के विभिन्न मदों का अनियमित प्रबंधन, आय बढ़ाने को लेकर कोई ठोस प्लानिंग अब तक बनी नहीं बन सकी है। इन सभी कारणों से निगम की आर्थिक स्थिति खराब हो रही हैं।

जानिए क्या होती है नगर निगम की संचित निधि
नगर निगम के प्रापर्टी टैक्स, जलकर, शिक्षा उपकर भू-भाटक से प्राप्त आय का 5 फीसदी हिस्सा संचित निधि में हर साल जमा किया जाता है। नगर निगम में इस राशि का उपयोग आपात स्थिति में किया जाता रहा है। 10 साल पहले तक निगम भिलाई के संचित निधि में लगभग 84 करोड़ रुपए तक एकत्र थे। लेकिन आज सिर्फ लगभग 5.5 करोड़ ही शेष बचा।
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