Bhilai Nigam: 22 सालों में 20 गुना बढ़ा, शहर की सफाई का बजट, लेकिन स्वच्छता रैंकिंग में पिछड़ा
छत्तीसगढ़ के नगर पालिक निगम भिलाई में सफाई का बजट तो तेजी बढ़ रहा है। लेकिन स्वच्छता रैंकिंग में निगम पिछड़ता जा रहा है। इसके बाद भी निगम की सफाई व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हो पाया है। जबकि 70 वार्ड वाले भिलाई निगम में टाउनशिप क्षेत्र के 14 वार्डों की सफाई बीएसपी प्रबन्धन करता है। अब भिलाई निगम के सफाई व्यवस्था पर ही सवाल खड़े हो रहें हैं।

निगम क्षेत्र में प्रतिदिन 180 टन कचरे का होता है निष्पादन
प्रभारी स्वास्थ्य अधिकारी धर्मेंद्र मिश्रा बताते हैं कि नगर पालिक निगम भिलाई में प्रतिदिन 4 जोन से 180 टन कचरा इकट्ठा किया जाता है। इसके अलावा शहर के ठेले, खोमचे, बाजारों में अतिरिक्त कचरा जमा होता है। इसके साथ-साथ टाउनशिप के 14 वार्डों में भी कचरा इकट्ठा होता है। जिसके लिए सीएसवीटीयू यूनिवर्सिटी ग्राउंड नेवई और भिलाई के जयंती स्टेडियम के पास डंपिंग यार्ड बनाया गया है। जबकि शहर की आबादी बढ़ने के साथ साथ भिलाई निगम के वार्डों का परिसीमन, और 13 वार्डों को अलग कर रिसाली निगम का निर्माण भी हुआ है।

कचरे का पहाड़ बना लोगों की परेशानी का सबब
भिलाई निगम के लगभग 50 वार्डों का कचरा जामुल के बोगदा पुल वाले ट्रेंचिंग ग्राउंड में डंप किया जाता है। लेकिन इस ट्रेंचिंग ग्राउंड के पीछे फिर से मानवनिर्मित पहाड़ बन गया है। हलफनामा देने के बावजुद नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है। आसपास के रहवासी इलाकों में इसकी बदबू फैलती है। साल 2018 में शहर ने डेंगू जैसी बीमारी ने 50 से अधिक लोगों की जान ली थी। वर्तमान में भी डेंगू के 5 एक्टिव मरीज पाए गए हैं। कचरे बदबू से आम नागरिक परेशान हैं। वहीं कचरे को बिना सेग्रिगेट किये यहां फेंका जा रहा है। जो प्राकृतिक दृष्टि से एक बड़ी समस्या बन सकता है।

1500 सफाई कर्मचारी हैं कार्यरत, संसाधन उपलब्ध कराता है निगम
भिलाई निगम के 56 वार्डों में सफाई के लिए लगभग 1500 कर्मचारी काम करते हैं। जिनमे से वार्डों की जनसंख्या और क्षेत्र के अनुसार कमर्चारियों की संख्या निर्धारित की गई है। इसके आलवा वीआईपी निवासों में सफाई की व्यवस्था कर्मचारियों के माध्यम से होती है। पर्व, सामाजिक, सभाओं के लिये भी कर्मचारी लगाए जाते हैं। कर्मचारियों की छुट्टी से लेकर वार्डों में निगरानी के लिए सुपरवाइजर नियुक्त किये गए हैं। सफाई के लिए बड़े वाहन, रिक्शा, डिजल आदि सामग्री निगम उपलब्ध कराता है।

20 गुना तक बढ़ गया सफाई का बजट
भिलाई निगम के बजट में सबसे बड़ा हिस्सा शहर की सफाई पर खर्च किया जाता है। यह बजट हर साल बढ़ता जा रहा है। निगम की पहली मेयर नीता लोधी के समय से अब तक निगम के सफाई बजट लगभग 20 गुना तक बढ़कर लगभग 25 करोड़ तक पहुंच गया है। इसके अलावा वर्तमान में 80 लाख रुपये के बैकलाइन सफाई का टेंडर किया गया है। आगामी बजट भी लगभग 32 से 35 करोड़ तक होने का अनुमान लगाया जा रहा है। भाजपा के महापौर विद्यारतन भसीन, कांग्रेस से निर्मला यादव, देवेंद्र यादव और अब मेयर नीरज पाल निगम की कमान संभाल रहे हैं। अब तक 24 आयुक्त भी निगम की व्यवस्था संभाल चुके हैं।

सफाई ठेका होने के बाद भी नहीं सुधरी व्यवस्था
नगर पालिक निगम भिलाई में लंबे समय से सफाई ठेके पर बहस होती थी। सामान्य सभा में सफाई टेंडर को लेकर विपक्ष, सत्तापक्ष को घेरने का प्रयास करता रहा। वही अब सफाई ठेका होने के बाद कमिश्नर ऋतुराज रघुवंशी के कार्यकाल में नेचर ग्रीन कम्पनी को इसकी जिम्मेदारी दी गई। जिसके बाद पुनः मेसर्स रमन को इसकी जिम्मेदारी दी गई। मेसर्स रमन ने सामान्य सभा की अनुमति के बिना प्रशासन के अनुसार कोरोना काल में लगातार सफाई का काम किया। वर्तमान में भिलाई की एजेंसी मेसर्स रमन को ही सफाई का काम दिया गया है।

नए नए प्रयासों के बाद भी रैंकिंग में पिछड़ा
नगरीय निकायों में ओडीएफ प्लस और स्वछता रैंकिंग में 11 स्थान पर आने वाले निगम की आर्थिक स्थिति भी चिंताजनक है। सफाई व्यवस्था के लिए लगातार प्रयास के नाम पर नए-नए प्रयोग किए जा रहे हैं। सीएनडी वेस्ट, ग्राउंड फिलिंग, कचरा सेग्रिगेशन के लिए प्लाटिक डिब्बे का वितरण, रोड क्लीनर मशीन, नाइट स्वीपिंग, सुलभ शौचालयों की मरम्मत, स्वच्छता सन्देश वाल पेंटिंग, डस्ट क्लीनर मशीन, एसएलआरएम सेंटर से प्लास्टिक निकालकर बेचने का काम किया गया। इसमें करोड़ो रूपये खर्च किये गए। साल 2021 के स्वच्छता रैंकिंग में निगम 21 वे स्थान पर रहा। यानी नगर पालिक निगम भिलाई स्वच्छता रैंकिंग में पिछड़ रहा है।
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