Bhilai Nigam: आर्थिक संकट के बीच मुख्यालय बेचने की तैयारी, विपक्ष जुटा रहा तकनीकी जानकारी
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले का भिलाई नगर निगम आर्थिक संकटों से जूझ रहा है। यह बात सार्वजनिक तौर पर सभी जानते हैं। लेकिन इस संकट के बीच भिलाई निगम प्रशासन अपने ही घर को बेचने की तैयारी कर रहा है। विधानसभा चुनाव से पहले इस तरह का प्रयास निगम के जनप्रतिनिधियों को संकट में डाल सकता हैं। क्योंकि निगम का स्थान्तरण और इस फैसले का विरोध करने के लिए विपक्ष भी अपनी तैयारी में जुट गया है।

सिर्फ स्थल परिवर्तन , ड्राइंग डिजाइन होगा पुराना
दरअसल मुख्यालय को बेचने की तैयारी आज से नहीं बल्कि लम्बे समय से की जा रही है। वर्तमान मेयर महापौर नीरज पाल ने अपने पहले बजट भाषण में सामान्य सभा में इस विषय को रखा था। जिसके तहत निगम की नई बिल्डिंग को पुराने ड्राइंग डिजाइन से ही तैयार किया जाएगा लेकिन इसका स्थल परिवर्तन किया जाएगा। निगम इसके लिए प्रियदर्शनी परिसर की भूमि निर्धारण किया गया है।

नहीं बेच सकेंगे भूमि, शासन की अनुमति जरूरी
महापौर नीरज पाल का कहना है कि नई बिल्डिंग प्रियदर्शनी परिसर में बनाने की योजना तैयार की गई है। मुख्यालय की बिक्री के लिए राज्य शासन की अनुमति जरूरी होती है उसके अनुमति मिलने के बाद ही प्लॉट बिक्री की कार्रवाई की जा सकेगी। निगम अधिकारियों का कहना है कि कि निगम प्रशासन विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण के समय से भिलाई के अपने प्लाटों को भेजता आ रहा है इसलिए निगम अपने इस प्लाट को बेचकर नया बिल्डिंग बना सकता है। इसकी इसके लिए बस शासन से परमिशन की जरूरत है।

निगम मुख्यालय बेचने के मामले में विपक्ष ले रहा तकनीकी जानकारी
अपने कर्मचारियों को वेतन देने में भी असमर्थ रहने वाला नगर निगम अब अपने 4 एकड़ में फैले मुख्यालय को बेचने की तैयारी कर रहा है। नेशनल हाईवे से लगे हुए करोड़ों रुपए की जमीन को बेचकर नया नगर निगम बनाने की योजना पर काम किया जा रहा है। लेकिन इस पर अब राजनीति शुरू हो चुकी है। जिस पर विपक्ष के पार्षदों ने तकनीकी जानकारी जुटाना शुरू कर दिया है। वे इसके लिए वकीलों से सलाह भी ले रहे हैं।

साडा के जर्जर भवन में संचालित हो रहा, निगम मुख्यालय
विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण साडा को भंग कर छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद नगर पालिक निगम भिलाई का गठन सन 2000 में किया गया। फिलहाल सुपेला स्थित साडा के जर्जर भवन में ही निगम मुख्यालय चल रहा है। 22 सांल में 4 मेयर 23 आयुक्त बदल चुके है। लेकिन अब तक निगम का मुख्यालय भवन नहीं बन सका है। मुख्यालय निर्माण के लिए अब तक करीब 8 बार प्रशासन को बजट की मांग और संचित निधि से राशि लेने के लिए पत्र भेजा गया। लेकिन अब तक अनुमति नहीं मिली है।

स्थापना व्यय का संकट, बिजली बिल भी बकाया
लगभग 500 करोड रुपए से अधिक सालाना बजट वाला नगर पालिक निगम भिलाई में बीते दिनों दीपावली के मौके पर अपने कर्मचारियों को वेतन देने का संकट खड़ा हो गया था जिसके बाद संचित निधि से लगभग 9 करोड़ 64 लाख रुपए की राशि निकालकर कर्मचारियों का वेतन किया गया था। इसके अलावा निगम पर लगभग 29 करोड़ का बिजली बिल बकाया बताया जा रहा है। पिछली बार राज्य सरकार ने 10 करोड़ रुपए बिजली बिल का भुगतान किया था।

लगभग 132 करोड़ में बिकेगा निगम मुख्यालय
नगर निगम मुख्यालय की कीमत की अगर बात करें तो वर्तमान बाजार मूल्य के आधार पर इस भूमि की कीमत लगभग 33 करोड़ रुपये प्रति एकड़ के अनुसार मानी जाएगी। बाजार मूल्य के अनुसार लगभग 4 एकड़ में फैले मुख्यालय की कीमत लगभग 132 करोड़ आंकी जा रही है। अगर शासन प्लॉट बेचने की अनुमति देता है। तो लगभग 50 करोड़ तक निगम का बिल्डिंग भी तैयार हो जाएगा। जबकि निगम ने 27 करोड़ के प्रस्ताव में 10 करोड़ रुपये संचित निधि के इस्तेमाल की अनुमति शासन से मांगी थी।
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