रामजस में लाठीचार्ज: दिल्ली पुलिस कमिश्नर को मानवाधिकार आयोग ने भेजा नोटिस, ज्यादती का आरोप
आरोप है कि दिल्ली पुलिस ने इस मामले में निष्पक्ष तौर पर कार्रवाई नहीं की है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कई वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुए हैं।
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस पर रामजस कॉलेज में लाठी चार्ज के दौरान ज्यादती का आरोप लगा है। इसी संदर्भ में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने दिल्ली पुलिस के कमिश्नर को नोटिस भेजा है।

ये है पुलिस पर आरोप
पुलिस पर आरोप है कि 22 फरवरी को रामजस कॉलेज के सामने AISA और ABVP के छात्रों की बीच उपजे विवाद और उन्हें तितर बितर करने के दौरान पुलिस की ओर से ज्यादती की गई। बता दें कि आरएसएस के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के विरोध की वजह जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय के छात्र उमर खालिद और छात्रा शहला राशिद का रामजस कॉलेज में आयोजित सेमिनार में बोलने का निमंत्रण। निमंत्रण रद्द किए जाने के बाद विवाद बढ़ा।

बुधवार को मुद्दे ने पकड़ा तूल
इस फैसले के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज में कुछ छात्र संगठन प्रदर्शन के लिए उतरे। इनमें आइसा से जुड़े छात्र भी थे। बताया जा रहा है कि दूसरी ओर एबीवीपी ने पहले ही इस मुद्दे पर विरोधी सुर बुलंद कर रखा था। बुधवार को इस मुद्दे ने तूल पकड़ा, आइसा और दूसरे संगठनों ने एबीवीपी के रवैये की आलोचना करते हुए सेमीनार को प्रभावित करने के खिलाफ प्रदर्शन किया। इसी दौरान दोनों छात्र संगठनों के सदस्यों के बीच झड़प भी हुई। दोनों गुटों के छात्रों के बीच जमकर मारपीट की भी खबर है। हंगामा बढ़ता देख आखिरकार पुलिस को हालात संभालने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा।

8 पुलिसकर्मियों को भी आई चोट
इस पूरे घटनाक्रम में दिल्ली पुलिस के 8 पुलिसकर्मियों को भी चोट आई है। दिल्ली पुलिस की ओर से इस बात की जानकारी दी गई है। छात्र गुटों के झड़प में कई छात्र और छात्राओं को भी चोटें आई हैं। आइसा समेत दूसरे छात्र संगठनों ने एबीवीपी पर सीधा हमला किया है।

उमर, शेहला को देना था भाषण
बता दें कि उमर और शेहला, रामजस कॉलेज में 'कल्चर ऑफ प्रोटेस्ट' विषय 2 दिवसीय गोष्ठी के पहले सत्र में भाग लेने वाले थे लेकिन विरोध के कारण उनका आमंत्रण रद्द कर दिया गया था। इसका आयोजन वर्डक्राफ्ट ने किया था जो कि रामजस कॉलेज की लिटरेरी सोसाइटी है। आरोप है कि एबीवीपी से जुड़े छात्र सदस्यों ने उमर और शेहला को आमंत्रण दिए जाने विरोध किया था।

ये थी छात्रों की मांग
इन छात्र सदस्यों की मांग थी कि 'देश द्रोहियों' को बुलाने का निमंत्रण रद्द किया जाए। दूसरी ओर सेमिनार के आयोजकों का आरोप है कि एबीवीपी के छात्रों ने सेमिनार को रोकने की कोशिश की। उन्होंने विद्युत आपूर्ति को प्रभावित किया। साथ ही खिड़कियों पर पत्थरबाजी की और सेमिनार कक्ष को बंद कर दिया। हालांकि एबीवीपी ने इन आरोपों का खंडन किया है।
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