'कांग्रेस अध्यक्ष बनने वाला था,सोनिया गांधी ने हां कर दिया था,फिर रची गई वो बड़ी साजिश',अशोक गहलोत का खुलासा!

Ashok Gehlot Congress President Row: कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को लेकर एक बार फिर बड़ा बयान सामने आया है। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उस पुराने घटनाक्रम का जिक्र किया है, जब उन्हें कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा जोरों पर थी।

07 जून को अशोक गहलोत ने दावा किया है कि वह इस जिम्मेदारी के लिए पूरी तरह तैयार थे, कांग्रेस अध्यक्ष बनने वाला था, सोनिया गांधी ने हामी दे दी थी। लेकिन अचानक हुए घटनाक्रमों ने पूरी तस्वीर बदल दी। उनका कहना है कि आज भी बहुत से लोग इस मामले की वास्तविकता नहीं जानते और उनके बारे में गलत धारणा बना चुके हैं।

Ashok Gehlot

कुछ साल पहले कांग्रेस में नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव को लेकर मंथन चल रहा था। उस समय पार्टी नेतृत्व के भीतर अशोक गहलोत का नाम सबसे मजबूत दावेदारों में गिना जा रहा था।

अशोक गहलोत के मुताबिक शीर्ष नेतृत्व ने उन्हें अध्यक्ष बनाने का मन बना लिया था और वह भी इस जिम्मेदारी को स्वीकार करने के लिए तैयार थे। लेकिन जैसे-जैसे प्रक्रिया आगे बढ़ी, राजस्थान की राजनीति में अचानक हलचल तेज हो गई। पार्टी की ओर से पर्यवेक्षकों को राज्य भेजा गया और इसके बाद हालात तेजी से बदलने लगे। आखिरकार वह कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बन पाए।

क्या मुख्यमंत्री की कुर्सी के मोह में गहलोत ने छोड़ा था अध्यक्ष पद? जानिए गलत धारणा का सच

कुछ साल पहले जब कांग्रेस के भीतर राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव की सुगबुगाहट शुरू हुई थी, तब तत्कालीन अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने अशोक गहलोत के नाम पर अपनी अंतिम मुहर लगा दी थी। गहलोत खुद भी इस जिम्मेदारी को संभालने के लिए मानसिक और रणनीतिक रूप से पूरी तरह तैयार थे। उनके लिए पार्टी का मुखिया बनना एक बेहद सम्मान की बात थी।

लेकिन जैसे ही इस फैसले को अमलीजामा पहनाने की तैयारी शुरू हुई, वैसे ही दिल्ली से राजस्थान के लिए पार्टी के विशेष पर्यवेक्षक (ऑब्जर्वर्स) भेजे गए। इसके तुरंत बाद जयपुर से लेकर दिल्ली तक के हालात इतनी तेजी से बदले कि सब कुछ बिखर गया। इस पूरे घटनाक्रम के बाद देश भर के मीडिया और राजनीतिक गलियारों में यह बात फैला दी गई कि गहलोत खुद ही दिल्ली नहीं जाना चाहते थे।

लोगों को यह समझाया गया कि गहलोत राजस्थान के मुख्यमंत्री की अपनी कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं थे, इसलिए उन्होंने खुद ही राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से इनकार कर दिया। हैरान करने वाली बात यह है कि गहलोत के इस दावे के मुताबिक, उनके अपने खास समर्थक और करीबी नेता भी आज तक इसी झूठी कहानी को सच मानते आ रहे हैं।

'मैं पीछे नहीं हटा था, मुझे साजिश के तहत फंसाया गया'... गहलोत का बड़ा पलटवार

अब अशोक गहलोत ने इस पूरे नैरेटिव को सिरे से खारिज करते हुए एक बिल्कुल नया और चौंकाने वाला दावा ठोक दिया है। गहलोत ने साफ लफ्जों में कहा है कि वे कांग्रेस अध्यक्ष बनने की पूरी इच्छा रखते थे, उनकी तैयारी भी मुकम्मल थी और उन्होंने खुद कभी भी इस जिम्मेदारी से कदम पीछे नहीं खींचे थे। जो कुछ भी हुआ, वह उनके खिलाफ रची गई एक राजनीतिक साजिश का हिस्सा था।

गहलोत के मुताबिक, इस सोची-समझी साजिश के जरिए देश भर में उनकी छवि को भारी नुकसान पहुंचाया गया। उनके बारे में जानबूझकर एक ऐसी गलत छवि गढ़ दी गई कि वे सिर्फ अपने राज्य की सत्ता से चिपके रहना चाहते हैं और केंद्रीय जिम्मेदारी से भाग रहे हैं। इस भ्रामक प्रचार ने उनकी दशकों की बेदाग राजनीतिक साख पर चोट करने की कोशिश की।

अशोक गहलोत ने कहा कि वे कोई राजनीति के नौसिखिए, अनपढ़ या अनजान नेता नहीं हैं जो संगठन के पदों का महत्व न समझें। उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस अध्यक्ष का पद कितना ऐतिहासिक और सम्मानित रहा है। गहलोत ने के. कामराज, महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे महान कप्तानों का जिक्र किया, जिन्होंने कभी इस पद की शोभा बढ़ाई थी।

कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर क्या बोले गहलोत?

अशोक गहलोत ने कहा कि कांग्रेस में राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद हमेशा से बेहद सम्मानजनक माना जाता रहा है। उन्होंने महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल और कामराज जैसे नेताओं का उदाहरण देते हुए कहा कि पार्टी अध्यक्ष का पद संगठन की सबसे अहम जिम्मेदारियों में से एक रहा है।

उनका कहना है कि जब पार्टी नेतृत्व किसी नेता पर भरोसा जताकर इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपना चाहता है, तो उसे स्वीकार करना स्वाभाविक बात होती है। इसलिए यह कहना कि उन्होंने खुद पद छोड़ दिया था, वास्तविकता से दूर है।

आज भी क्यों चर्चा में है यह मुद्दा?

अशोक गहलोत का कहना है कि इस पूरे सियासी ड्रामे की जो असल सच्चाई और कड़वा सच है, वह आज भी दुनिया की नजरों से छिपा हुआ है। वे बार-बार सार्वजनिक मंचों से और निजी बातचीत में लोगों को असल हकीकत समझाने की कोशिश करते हैं, लेकिन उनके खिलाफ जो एक बार गलत धारणा (परसेप्शन) बना दी गई है, उसे लोगों के दिमाग से पूरी तरह मिटाना इतना आसान नहीं साबित हो रहा है।

राजस्थान और कांग्रेस की राजनीति में अशोक गहलोत अभी भी एक प्रभावशाली चेहरा हैं। ऐसे में उनका यह बयान इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि यह कांग्रेस के उस दौर की अंदरूनी राजनीति पर नए सवाल खड़े करता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गहलोत का यह बयान केवल अतीत की याद नहीं है, बल्कि यह संदेश भी है कि उस समय जो राजनीतिक नैरेटिव बना था, उससे वह आज भी सहमत नहीं हैं। यही वजह है कि वर्षों बाद भी कांग्रेस अध्यक्ष पद से जुड़ा यह अध्याय राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

गहलोत के इस ताजा और तीखे बयान ने साफ कर दिया है कि वे अपनी राजनीतिक लाइफ के इस सबसे बड़े झटके को भूले नहीं हैं। उनके इस खुलासे ने एक बार फिर कांग्रेस के भीतर चलने वाली अंदरूनी खींचतान, गुटबाजी और पैर खींचने की राजनीति को सरेआम उजागर कर दिया है। अब देखना यह है कि गहलोत के इस सीधे हमले के बाद कांग्रेस आलाकमान या पार्टी के दूसरे गुट के नेताओं की तरफ से क्या सफाई या प्रतिक्रिया सामने आती है।

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