रजत पाटीदार कभी नहीं खेल पाएंगे भारत के लिए टी20 मैच, क्या है इसके पीछे की बड़ी वजह
Rajat Patidar: भारतीय क्रिकेट टीम में बदलाव का नया दौर शुरू हो चुका है, लेकिन इसके साथ ही कुछ हैरान करने वाले फैसले भी सामने आए हैं। मुख्य कोच गौतम गंभीर और मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर की अगुवाई में चुनी गई नई टी20 टीम में कई चौंकाने वाले बदलाव देखने को मिले हैं। इस नई रणनीति ने कई अनुभवी और शानदार फॉर्म में चल रहे खिलाड़ियों को निराश किया है।
इस बड़े बदलाव का सबसे बड़ा शिकार रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के कप्तान रजत पाटीदार को होना पड़ा है। अपनी कप्तानी में बेंगलुरु को लगातार दूसरा आईपीएल खिताब जिताने वाले इस खिलाड़ी को टीम में जगह नहीं मिली। पाटीदार ने हालिया सीजन में 14 पारियों में शानदार बल्लेबाजी करते हुए 192.69 के बेमिसाल स्ट्राइक रेट से 501 रन बनाए थे।

रजत पाटीदार क्यों नहीं चुने गए?
शानदार प्रदर्शन के बावजूद 33 वर्षीय पाटीदार को नजरअंदाज किए जाने के पीछे चयनकर्ताओं की भविष्य की सोच मानी जा रही है। टीम प्रबंधन अब अनुभवी खिलाड़ियों के बजाय युवाओं को अधिक मौके देने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। यही वजह है कि घरेलू क्रिकेट में धमाल मचाने वाले 15 साल के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को टीम में शामिल किया गया है। टीम में युवा लाए जा रहे हैं, वहीं रजत की उम्र 33 साल हो गई है।
टीम की कप्तानी को लेकर भी चयनकर्ताओं के सामने एक बेहद कठिन फैसला था। पूर्व महान क्रिकेटर सुनील गावस्कर के अनुसार, कप्तानी की रेस मुख्य रूप से रजत पाटीदार और श्रेयस अय्यर के बीच सिमटी हुई थी। हालांकि, विभिन्न आईपीएल टीमों का नेतृत्व करने के लंबे अनुभव के आधार पर चयनकर्ताओं ने आखिरकार श्रेयस अय्यर को टीम की कमान सौंपने का फैसला किया।
अगरकर के बयान से स्थिति साफ़
अजीत अगरकर ने टीम चयन की चुनौतियों को स्वीकार करते हुए कहा कि भारत में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। अत्यधिक विकल्प होने के कारण कई बार बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को भी मजबूरी में बाहर रखना पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीमित सीटों वाली टीम में हर अच्छे खिलाड़ी को जगह दे पाना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।
नए प्लेयर्स को देना है मौका
चयनकर्ताओं का यह कड़ा रुख सिर्फ पाटीदार तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके लपेटे में कई दिग्गज भी आए। टी20 विश्व कप विजेता कप्तान सूर्यकुमार यादव को भी हालिया खराब फॉर्म के कारण टीम से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। इससे यह साफ हो गया है कि नए युग में नाम के बजाय मौजूदा फॉर्म को प्राथमिकता दी जाएगी।
आरसीबी फैंस के हीरो हैं रजत
भले ही पाटीदार को नीली जर्सी पहनने का मौका न मिला हो, लेकिन प्रशंसकों के दिल में उनकी जगह पक्की है। बेंगलुरु के खिताबी सूखे को खत्म कर लगातार 2 ट्रॉफियां जिताने वाले कप्तान के रूप में उनका नाम हमेशा याद रखा जाएगा। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के आंकड़े चाहे जो कहें, घरेलू क्रिकेट के इतिहास में उनका योगदान हमेशा स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा।












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