39 पत्नियों-94 बच्चों वाला शख्स कौन? एक ही छत के नीचे रहते 200 सदस्य, 1 दिन में खाते 70Kg मीट! कैसे चलता है घर
World Largest Family: एक ही शख्स की 39 पत्नियां, 94 बच्चे, 33 पोते-पोतियां एक साथ, एक छत की नीचे। यह कोई कल्पना नहीं हकीकत है। मिजोरम की खूबसूरत पहाड़ियों के बीच बसा छोटा सा गांव बकतावंग (Bakthawng) आज सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में अपनी एक अनोखी पहचान रखता है। यहां रहने वाला चाना परिवार अपने विशाल आकार की वजह से सालों से लोगों की जिज्ञासा का विषय बना हुआ है।
इस अनोखे परिवार के मुखिया थे जियोना चाना (Ziona Chana), जिन्हें दुनिया के सबसे बड़े जीवित परिवार का प्रमुख माना जाता था। 17 साल की उम्र में पहली शादी की, उसके बाद एक साल में 10 बार दूल्हा बने। ऐसे करीब 39 पत्नियां घर लेकर आए। परिवार की कुल संख्या समय-समय पर बदलती रही, लेकिन यह लगभग 199 सदस्यों के बीच बताई जाती है।

यह पूरा परिवार मिजोरम के बकतावंग गांव में स्थित चार मंजिला विशाल भवन 'छुआन थार रन' (Chhuanthar Run) यानी 'नई पीढ़ी का घर' में रहता है। इस घर में लगभग 100 कमरे हैं और एक ही परिवार के 199 सदस्य एक साथ रहते हैं। परिवार गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स और अन्य अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड संस्थाओं में दुनिया के सबसे बड़े परिवार के रूप में चर्चित रहा है। 2021 में 76 वर्ष की आयु में जियोना चाना का निधन हो गया, लेकिन उनका परिवार आज भी उसी एकता और अनुशासन के साथ रह रहा है। सोशल मीडिया पर बार-बार वायरल होने वाली इस कहानी को अब नई पीढ़ी भी उत्सुकता से देख रही है। आइए जानते हैं कौन थे जियोना चाना? भारत में कौन से परिवार देते हैं टक्कर?
Who Was Ziona Chana: एक अनोखी जिंदगी की दास्तां
जियोना चाना का जन्म 21 जुलाई 1945 को हुआ। मात्र 17 साल की उम्र में उन्होंने पहली शादी की। इसके बाद उन्होंने कुल 39 शादियां कीं। वे लालपा कोहरान थार (Lalpa Kohhran Thar) नामक ईसाई संप्रदाय के संस्थापक के पोते थे, जिसकी स्थापना उनके दादा ने की थी। यह संप्रदाय बहुविवाह (पॉलीगैमी) की अनुमति देता है।
जियोना खुद इस संप्रदाय के नेता बने और उन्होंने सैकड़ों अनुयायी जुटाए। उनका परिवार न सिर्फ संख्या में बड़ा था, बल्कि पूरी तरह आत्मनिर्भर भी। वे खेती, पशुपालन, बढ़ईगिरी और छोटे उद्योगों के जरिए परिवार का पालन-पोषण करते थे। उन्होंने गांव में स्कूल और चर्च भी स्थापित किए।
Ziona Chana Family Layout: परिवार की संरचना (2021 में निधन के समय):
- पत्नियां: 39
- बच्चे: 94
- बहुएं: 14
- पोते-पोतियां: 33
- कुल सदस्य: 199
आज 2026 में परिवार की संख्या बढ़कर 199 पहुंच चुकी है।
100 कमरों वाला घर: एक छोटा सा गांव
यह चार मंजिला इमारत गुलाबी-बैंगनी रंग की है, जो पहाड़ी परिदृश्य में दूर से नजर आती है। अंदर 100 से ज्यादा कमरे, विशाल हॉल, सामुदायिक रसोई और रहने की जगहें हैं। यह घर मिजोरम की राजधानी ऐजौल (Aizawl) से करीब 80 किमी दूर बकतावंग गांव में स्थित है।
पर्यटक दुनिया भर से यहां आते हैं। घर के अंदर घूमते हुए लगता है मानो कोई सैन्य छावनी या छोटा कस्बा हो। सब कुछ सिस्टेमैटिक है। जैसे- शिफ्ट में काम, रोटेशन सिस्टम और सख्त अनुशासन।
Ziona Chana Family Food Expenses: रोजमर्रा की जिंदगी: लॉजिस्टिक्स का कमाल

इतने बड़े परिवार को चलाना कोई मजाक नहीं। रोजाना खाने का खर्चा...
- चावल: 45 से 90 किलो
- आलू: 40 किलो
- सब्जियां: 25 किलो से ज्यादा
- दाल: 20 किलो
- मीट/मुर्गी: 30-35 मुर्गियां या 50-70 किलो मीट

सुबह-शाम दो बड़े भोजन सामुदायिक हॉल में परोसे जाते हैं। बड़ी-बड़ी कड़ाहियों और लकड़ी के चूल्हों में खाना बनता है। पत्नियां शिफ्ट में काम करती हैं। सबसे बड़ी पत्नी पूरे घर के टाइमटेबल और कामों की देखरेख करती हैं। बच्चे, बहुएं और पोते-पोतियां भी अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं। जैसे कि सफाई, खेती, पशुपालन, बर्तन धोना आदि। यह व्यवस्था किसी बड़े होटल या मिलिट्री कैंटीन जैसी है।
परिवार कैसे चलता है? अनुशासन और एकता

- महिलाओं की भूमिका: पत्नियां और बहुएं रसोई, सफाई और बच्चों की देखभाल संभालती हैं। बारी-बारी से ड्यूटी।
- पुरुषों की भूमिका: खेती, मरम्मत, पशुपालन और आय के साधन।
- बच्चों की शिक्षा: परिवार ने अपना स्कूल चलाया। जियोना शिक्षा को बहुत महत्व देते थे।
- धार्मिक जीवन: रोजाना प्रार्थना, चर्च गतिविधियां। पूरा परिवार एक ही संप्रदाय का अनुयायी।
- आर्थिक व्यवस्था: आत्मनिर्भर। खेती, पिगरी (सुअर पालन), बढ़ईगिरी और छोटे उद्योग।
जियोना कहते थे कि बड़ा परिवार ताकत है। वे एक बार दस पत्नियों से एक साल में शादी करने का दावा भी कर चुके थे।
क्यों मशहूर हुआ यह परिवार?
- रिकॉर्ड्स: World Record Academy (2011), Wall Street Journal, London World Records (2019) आदि में मान्यता।
- पर्यटन: मिजोरम सरकार के लिए भी टूरिस्ट अट्रैक्शन।
जियोना की मृत्यु (13 जून 2021) के बाद भी परिवार एकजुट है। उनके बड़े बेटे परिवार की कमान संभाल रहे हैं।
राजस्थान में भी दिखती है झलक
पांचौड़ी गांव का प्रजापत परिवार: 6 बेटे, 30 पोते, 34 पड़पोते, 13 लड़पोते-पोतियां सहित 153 सदस्य
नागौर जिले के पांचौड़ी गांव के प्रजापत परिवार में भी जियोना चाना फैमिली जैसी झलक दिखाई देती है। 6 बेटे, 30 पोते, 34 पड़पोते, 13 लड़पोते-पोतियां सहित 153 सदस्य (6 पीढ़ियां) एक साथ रहते हैं। पूरा परिवार ढाणियों में रहता है, जो एक गांव जैसा नजर आता है। रोजाना 25 किलो सब्जी, 50 किलो आटा खपत। मुखिया ही बड़े फैसले लेते हैं। आपको बता दें कि 9 साल पहले 105 साल की उम्र में इस परिवार के मुखिया सुरजाराम निधन हो चुका है।
वैद्य श्यामस्वरूप गौड़ का परिवार: 7 बेटे-बहुओं और 4 बेटियों-दामादों समेत कुल 52 सदस्य
कुशीनगर जिले के अनुग्रह नगर दरगाहा क्षेत्र निवासी वैद्य रामनरेश गौड़ अपने 52 सदस्यों के साथ संयुक्त परिवार के मुखिया थे। 82 वर्षीय गौड़ का मानना था कि दया, प्रेम, समर्पण और तालमेल का संगम ही परिवार की खुशी है। यहां किसी भी प्रकार के अहंकार का कोई स्थान नहीं। परिवार के सदस्य सहयोग और आपसी प्रेम की भावना से परिवार नामक संस्था को मजबूती देते। इनके परिवार में 7 बेटे-बहुओं और 4 बेटियों-दामादों समेत कुल 52 सदस्य हैं। दालों में महीने के 100 बोरे अनाज एक ही महीने में घर की खपत होती है। एक दिन में 10 किलो आटा का उपयोग होता है। घर में प्रतिदिन एक समय में 8 किलो सब्जी बनती है। तीन मंजिला और 25 कमरे के एक ही मकान में पूरा परिवार रहता है।
अजमेर का बागड़ी माली परिवार: 185 सदस्य, 6 पीढ़ियां और स्वावलंबन की मिसाल
अजमेर जिले से 36 किलोमीटर दूर नसीराबाद के पास स्थित रामसर गांव का बागड़ी माली परिवार देश के सबसे बड़े संयुक्त परिवारों में गिना जाता है। इस परिवार में एक साथ 185 सदस्य रहते हैं, जिनमें 65 पुरुष, 60 महिलाएं और 60 बच्चे शामिल हैं। परिवार की छह पीढ़ियां एक ही छत के नीचे रहकर संयुक्त परिवार की परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं।
परिवार के पास करीब 700 बीघा कृषि भूमि है, जिससे उनकी आजीविका का प्रमुख साधन खेती है। घर की विशाल रसोई भी चर्चा का विषय है। परिवार की बहू लाडी देवी के अनुसार, सुबह और शाम एक साथ 13 चूल्हे जलते हैं। रोजाना लगभग 15 किलो सब्जी और 50 किलो से अधिक आटे की रोटियां बनती हैं। परिवार की महिलाएं और बेटियां मिलकर पूरे घर का भोजन तैयार करती हैं। करीब 12 लाख रुपये मासिक राशन खर्च वाला यह परिवार आत्मनिर्भरता, सामूहिकता और भारतीय संयुक्त परिवार व्यवस्था का अनोखा उदाहरण माना जाता है।
मौत के बाद भी परिवार टूटा नहीं
जियोना चाना का परिवार विवादास्पद भी रहा। बहुविवाह को कुछ लोग सशक्तिकरण मानते हैं तो कुछ इसे महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन। मिजोरम ईसाई बहुल राज्य है और यह संप्रदाय स्थानीय परंपराओं से प्रभावित रहा। फिर भी, यह कहानी मानवीय संभावनाओं की सीमा को चुनौती देती है। एक व्यक्ति ने पूरे समुदाय को एक परिवार में बांध रखा। उनकी मृत्यु के बाद भी परिवार टूटा नहीं, यही इस दास्तां की सबसे बड़ी सफलता है।
संयुक्त परिवार की ताकत
60 साल की उम्र में 39 शादियां करना, 94 बच्चों का पिता बनना और 200 सदस्यों का परिवार संभालना, यह कहानी फिल्मी लगती है, लेकिन हकीकत है। मिजोरम की पहाड़ियों में बसा यह परिवार हमें सिखाता है कि एकता में कितनी ताकत होती है। जब दुनिया न्यूक्लियर परिवारों की ओर बढ़ रही है, तब जियोना चाना का परिवार हमें हमारे भारतीय मूल्यों, संयुक्त परिवार, सहयोग और साझेदारी, की याद दिलाता है।













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