JNU हिंसा: डेढ़ साल बाद भी कोई गिरफ्तारी नहीं, गृह मंत्रालय ने संसद में दी जानकारी
नई दिल्ली, 3 अगस्त। जेएनयू परिसर में नकाबपोश लोगों के घुसकर हिंसा करने के मामले में डेढ़ साल बाद भी कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस बारे में संसद में जानकारी दी है। जनवरी 2020 में दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विवि परिसर में नकाबपोश लोगों ने घुसकर हिंसा की थी जिसमें कई छात्रों को चोट आई थी।

एक सवाल के जवाब में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि जनवरी 2020 में जेएनयू परिसर हिंसा मामले में दिल्ली पुलिस ने तीन मामले दर्ज किए हैं। हिंसा मामले में दिल्ली पुलिस के प्राथमिकी दर्ज करने की घटना के डेढ़ साल बाद भी कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।
केंद्रीय मंत्रालय ने संसद में बताया कि जांच में गवाहों से पूछताछ, फुटेज का संग्रह और विश्लेषण और पहचाने गए संदिग्धों की जांच शामिल है। हालांकि अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
क्या था मामला?
5 जनवरी 2020 को करीब 50 नकाबपोश महिला और पुरुष सरिया और हथौड़े से लैस होकर जेएनयू परिसर में घुसे थे और हिंसा की थी। इन लोगों ने छात्रों पर हमले के साथ ही छात्रावासों और दूसरे परिसर में तोड़फोड़ करते हुए घंटों तक उत्पात मचाया था।
इस हमले में जेएनयू स्टूडेंट यूनियन की अध्यक्ष आइशी घोष समेत कई छात्रों को गंभीर चोटें आई थीं। आइशी घोष की सिर खून बहते हुए तस्वीर देश भर में सुर्खियों में रही थी जिसे लेकर लोगों ने रोष प्रकट किया था।
जेएनयू के छात्रों पर हमले के बाद विवि परिसर के अंदर और बाहर घटना को लेकर जोरदार विरोध शुरू हो गया था। छात्रों पर हमले की खबर जैसे-जैसे फैली देश के दूसरे हिस्सों में भी आक्रोश फैला और मुंबई, हैदराबाद, कोलकाता समेत देश भर में छात्र संगठनों ने इसके विरोध में प्रदर्शन किया।
वाम छात्र संगठनों ने हिंसा के लिए एबीवीपी समर्थक लोगों को जिम्मेदार ठहराया था। वहीं विद्यार्थी परिषद ने हिंसा में शामिल होने और इससे किसी तरह संबंध होने से इनकार किया था।












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