Delhi News: कौन हैं जस्टिस यशवंत वर्मा? जिनको लेकर सुप्रीम कोर्ट को देनी पड़ी सफाई
Delhi News: दिल्ली हाई कोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा के आवास पर लगी आग की घटना ने न्यायिक क्षेत्र में चर्चा का विषय बना दिया है। 14 मार्च को हुई आग लगने की इस घटना के बाद उनके आवास से बड़ी मात्रा में नकदी बरामद होने की खबर आई थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस महज अफवाह बताया है।
यशवंत वर्मा का तबादला इलाहाबाद हाई कोर्ट करने का फैसला
वहीं मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना की अध्यक्षता में कॉलेजियम की बैठक हुई। सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने तत्काल प्रभाव से जस्टिस यशवंत वर्मा का तबादला इलाहाबाद हाई कोर्ट करने का निर्णय लिया। इसको लेकर 20 मार्च को आदेश जारी किया गया। लोग इस तबादले को भी उसी घटना से जोड़ कर देख रहे हैं। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस रूटीन का हिस्सा बताया।

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जजों के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच के नियम
1999 में सुप्रीम कोर्ट ने एक इन-हाउस प्रक्रिया बनाई थी, जिसके तहत यदि किसी जज पर भ्रष्टाचार या कदाचार के आरोप लगते हैं, तो:
1. CJI पहले उस जज से स्पष्टीकरण मांगते हैं।
2. यदि स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं होता, तो SC के एक जज और दो हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की एक जांच कमेटी बनाई जाती है
3. यह कमेटी गहन जांच कर सकती है और यदि जज दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ महाभियोग प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
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2008 का 'कैश-एट-डोर' कांड से तुलना
इस विवाद की तुलना 2008 के 'कैश-एट-डोर' मामले से की जा रही है। उस मामले में, 15 लाख रुपये से भरा एक लिफाफा गलती से पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट की जस्टिस निर्मलजीत कौर के घर पहुंच गया था। जांच में पता चला कि यह रकम जस्टिस निर्मल यादव के लिए थी, जिनके खिलाफ बाद में कानूनी कार्रवाई हुई थी।












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