LPG Crisis: बर्बादी की कगार पर दुनिया का सबसे अमीर देश! 8.6% गिरेगी इकोनॉमी, यहीं से आता है भारत का 47% गैस

LPG Crisis update: कल तक जिस कतर की अमीरी के चर्चे पूरी दुनिया में थे, आज वही देश बर्बादी के मुहाने पर खड़ा है। कतर की किस्मत उसकी 'प्राकृतिक गैस' ने बदली थी, लेकिन ईरान-इजरायल जंग ने सब कुछ तहस-नहस कर दिया। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से कतर का दुनिया से संपर्क कट गया है।

भारत के लिए यह खबर इसलिए डराने वाली है क्योंकि हमारी रसोई में जलने वाली करीब 45% LPG/LNG यहीं से आती है। IMF का दावा है कि इस संकट से कतर की इकोनॉमी 8.6% तक गिर सकती है।

LPG Crisis

Qatar Gas Crisis : गैस का वो खजाना, जिसने कतर को बनाया सुल्तान

90 के दशक तक कतर सिर्फ एक छोटा सा रेतीला देश था, जहां लोग मोती निकालने का काम करते थे। लेकिन जैसे ही कतर ने अपनी गैस को लिक्विड (LNG) बनाकर बेचना शुरू किया, उसकी दुनिया बदल गई। 1996 में जापान को पहली खेप भेजने के बाद कतर ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। इसी कमाई से कतर ने चमचमाती सड़कें, आलीशान मॉल और 2022 का सबसे महंगा फुटबॉल वर्ल्ड कप आयोजित किया। आज कतर की 60% कमाई सिर्फ इसी नीली आग (गैस) से आती है।

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रस लाफान पर हमला और ठप पड़ा कारोबार

कतर की गैस इकोनॉमी का दिल 'रस लाफान' सिटी को माना जाता है। यह करीब 100 वर्ग मील में फैला एक विशाल इंडस्ट्रियल इलाका है। हालिया युद्ध में ईरान के मिसाइल हमलों ने यहां के खास उपकरणों को नुकसान पहुंचाया, जिससे गैस उत्पादन 17% गिर गया। आज हमाद पोर्ट पर खड़ी क्रेनें खामोश हैं और गैस भरने वाले जहाज किनारे लगे हुए हैं। सड़कों पर सन्नाटा है और अरबों डॉलर का नुकसान हर बीतते दिन के साथ बढ़ता जा रहा है।

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होर्मुज की नाकेबंदी: कतर के लिए गले की फांस

कतर के साथ सबसे बड़ी दिक्कत उसका भूगोल है। सऊदी अरब और UAE के पास तो ऐसे रास्ते हैं जिनसे वे बिना 'होर्मुज स्ट्रेट' के भी अपना माल भेज सकते हैं, लेकिन कतर पूरी तरह इसी समुद्री रास्ते पर निर्भर है। नाकेबंदी की वजह से कतर ने हाथ खड़े कर दिए हैं कि वह अब गैस की सप्लाई नहीं कर पाएगा। खाने-पीने का 90% सामान आयात करने वाला यह देश अब विमानों के जरिए सब्जियां मंगाने को मजबूर है, जो बहुत महंगा सौदा है।

टूरिज्म और विदेशी निवेश को लगा तगड़ा झटका

कतर खुद को सिर्फ गैस का देश नहीं, बल्कि टूरिज्म और बिजनेस का हब बनाना चाहता था। इसके लिए उसने अपनी कंपनियों में विदेशी निवेश के नियम आसान किए और लग्जरी होटलों पर भारी सब्सिडी दी। लेकिन जंग की खबरों ने पर्यटकों के मन में डर पैदा कर दिया है। अमेरिका जैसे देशों की 'ट्रैवल एडवाइजरी' के बाद विदेशी मेहमानों ने कतर से दूरी बना ली है। मल्टीनेशनल कंपनियां भी अब अपने कर्मचारियों को वहां से सुरक्षित बाहर निकाल रही हैं।

क्या कतर के पास बचा है कोई 'बैकअप प्लान'?

अच्छी बात यह है कि कतर ने अपनी अमीरी के दिनों में बहुत बचत की है। उसके पास करीब 50 लाख करोड़ रुपये का एक बड़ा विदेशी फंड (Sovereign Wealth Fund) है। उसने लंदन और न्यूयॉर्क जैसी जगहों की बड़ी संपत्तियों में निवेश कर रखा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर कतर की गैस की कमाई कुछ साल बंद भी रहे, तब भी वह अपनी जनता को सैलरी दे सकता है। हालांकि, कतर की सरकार की असली चिंता विदेशी कंपनियों का भरोसा फिर से जीतना है।

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