Delhi AQI Today: राजधानी में सांसों पर संकट जारी! क्लाउड सीडिंग के बाद एयर क्वालिटी में हुआ कितना सुधार?
Delhi AQI Today: दिल्ली की सर्द सुबह अब सिर्फ ठंड ही नहीं, धुएं और धुंध की परतों में भी लिपटी दिखाई दे रही है। शहर का आसमान धुंधला है, हवा भारी है और हर सांस में धुएं की गंध महसूस हो रही है। लोगों की आंखों में जलन, गले में खराश और खांसी जैसी शिकायतें जारी हैं। इसके बावजूद आंकड़े कुछ राहत की खबर लेकर आए हैं।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मुताबिक, दिल्ली की हवा में मंगलवार को मामूली सुधार दर्ज किया गया। कुछ इलाकों में पिछले 24 घंटों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में गिरावट आई है, जिससे शहर की हवा "बहुत खराब" से "खराब" श्रेणी में पहुंच गई है।

सोमवार को जहां औसत AQI 301 यानी "बहुत खराब" श्रेणी में था, वहीं मंगलवार को यह घटकर 294 यानी "खराब" स्तर पर आ गया। आनंद विहार में AQI 389 से घटकर 307 हुआ, जबकि वज़ीरपुर में यह 375 से घटकर 336 पर पहुंचा।
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ठंडी हवा और शांत मौसम ने बढ़ाई चिंता
मौसम विभाग के अनुसार, मंगलवार इस सीजन का सबसे ठंडा दिन रहा। अधिकतम तापमान 26.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से पांच डिग्री कम था। हवा की रफ्तार बेहद कम रही। सोमवार को जहां 10 किमी प्रति घंटे की रफ्तार थी, वहीं मंगलवार को यह लगभग 0 किमी प्रति घंटा रही। विशेषज्ञों का कहना है कि शांत हवाएं प्रदूषण के जमाव में योगदान देती हैं।
"संख्याएं कुछ और, हालत कुछ और"
ग्रीन एक्टिविस्ट भवरीन कंधारी ने कहा, "दिल्ली की हवा देखने और महसूस करने में खराब थी, आंखें जल रही थीं और धुएं की गंध भारी थी, लेकिन आंकड़े सुधार दिखा रहे थे। यह अजीब विरोधाभास है।" उन्होंने यह भी कहा कि सोमवार और मंगलवार दोनों दिन प्रदूषण के आंकड़े अपडेट होने में 14 घंटे की देरी हुई। उन्होंने आगे कहा, "एक ऐसे शहर में जो सांस लेने के लिए जूझ रहा है, डेटा की चुप्पी सिर्फ तकनीकी नहीं बल्कि नैतिक समस्या है।"
अगले कुछ दिन रहेंगे मुश्किल
केंद्र सरकार के एयर क्वालिटी अर्ली वॉर्निंग सिस्टम ने चेतावनी दी है कि अगले कुछ दिनों तक मौसम प्रदूषण फैलने के लिए अनुकूल नहीं रहेगा। हवा की गति 10 किमी प्रति घंटे से कम और वेंटिलेशन इंडेक्स 6,000 m²/सेकंड से नीचे रहने की वजह से प्रदूषक हवा में फंसे रहेंगे। 31 अक्टूबर तक वायु गुणवत्ता "खराब" से "बहुत खराब" श्रेणी में रहने की संभावना है।
सड़क किनारे प्रदूषण ज्यादा
पर्यावरण थिंक टैंक एनवायरोकैटालिस्ट्स के संस्थापक सुनील दहिया ने बताया कि औसत प्रदूषण स्तर के अलावा सड़क किनारे का प्रदूषण ज्यादा होता है, जिससे लोगों को आंखों और गले में जलन होती है। उन्होंने कहा, "अगर पानी का छिड़काव सिर्फ कुछ इलाकों में नहीं बल्कि पूरे शहर में किया जा रहा है, तो इससे वायु गुणवत्ता में अस्थायी सुधार हो सकता है और AQI में गिरावट दिखाई दे सकती है।"












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