Delhi Election 2025: केजरीवाल पर क्यों भड़कीं मायावती, 2008 के चुनाव नतीजों में छिपा है राज?
Delhi Election 2025: दिल्ली के चुनावी अखाड़े के लिए बसपा नई नहीं है। दिल्ली के लोग एक वह दौर भी देख चुके हैं, जब बीएसपी (BSP) ने कांग्रेस और बीजेपी जैसी बड़ी पार्टियों के होश उड़ाने शुरू कर दिए थे। लेकिन, आज दिल्ली में मायावती की पार्टी अपनी अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है,इसलिए आम आदमी पार्टी (AAP) सुप्रीमो और दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल के एक बयान को अपने लिए संजीवनी में बदलने की कोशिशों में जुटी है।
मायावती ने केजरीवाल के उस बयान पर जोरदार हमला किया है, जिसमें उन्होंने यूपी और बिहार से दिल्ली आने वाले लोगों (पूर्वांचलियों) को 'फर्जी' बता दिया था। मायावती ने कहा,'ऐसे बयानों को रोकने के लिए चुनाव आयोग को सख्त कार्रवाई करने की आवश्यकता है और राजनीतिक दलों को भी इससे बचना चाहिए।'

Delhi Election 2025: दलित और पूर्वांचली वोटरों का समीकरण बिठाने की कोशिश में बीएसपी
दिल्ली में लगभग 17% दलित वोटर हैं और 70 सीटों में से इनकी हर सीट पर उपस्थिति है। पार्टी इस बार इनमें से 69 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। पार्टी का किसी के साथ गठबंधन नहीं है।
मायावती को मालूम है कि अब दिल्ली में पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार-झारखंड के वोटरों (पूर्वांचल के मतदाताओं) की तादाद लगभग एक-तिहाई या 30% से भी ज्यादा हो चुकी है, इसलिए वह इस बार दलितों और पूर्वांचली वोटरों पर फोकस करके अपनी पार्टी के पुराने दिन वापस लाने की कोशिश करना चाहती हैं।
Delhi Election 2025: 2008 में बसपा ने किया था शानदार प्रदर्शन, लेकिन धीरे-धीरे पस्त हो गया 'हाथी'
2008 में मायावती यूपी की मुख्यमंत्री थीं। तब दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीएसपी ने बहुत ही अच्छा प्रदर्शन किया था और उसे बदरपुर और गोकलपुर में जीत भी मिली थी। उस चुनाव में पार्टी को दिल्ली में 14% से अधिक वोट मिले थे।
लेकिन, 2013 में आम आदमी पार्टी के उभरने के साथ ही कांग्रेस की तरह ही बीएसपी का भी बंटाधार होना शुरू हो गया। इसे 2013 में इसे 5.35%, 2015 में 1.30% और 2020 में मात्र 0.74% वोट मिले।
Delhi Election 2025: अपना जनाधार वापस लाने के लिए मुस्लिम-बहुल सीटों पर भी लगाया हिंदू उम्मीदवारों पर दांव
मायावती को लगता है कि अगर उन्होंने इस बार दलित और पूर्वांचली वोटरों पर फोकस किया तो उनका पुराना जनाधार कुछ हद तक वापस आ सकता है। इसलिए, उन्होंने इस बार प्रत्याशी चुनने में भी अपनी पुरानी वाली रणनीति बदल दी है और मुस्लिम-बहुल सीटों पर भी हिंदू प्रत्याशियों पर दांव लगाया है।
मसलन, बीएसपी ने इस बार मटिया महल, चांदनी चौक, बल्लीमारान, सीलमपुर और मुस्तफाबाद जैसी सीटों पर भी हिंदुओं को टिकट दिया है, जहां 30% या इससे कहीं ज्यादा मुसलमान वोटर हैं। ऐसी सीटों पर कांग्रेस और आप के उम्मीदवारों में मुस्लिम वोट के लिए कड़ी टक्कर है। ऐसे में मायावती ने हिंदुओं पर दांव लगाकर बीजेपी की बी टीम होने के विरोधियों के आरोपों का भी जवाब देने की कोशिश की है।
Delhi Election 2025: दिल्ली की दो सीटों से अभी भी बीएसपी को उम्मीद
2008 में बसपा को दिल्ली की जिन दोनों सीटों बदरपुर और गोकलपुर में जीत मिली थी, उनको लेकर पार्टी को अभी भी सबसे ज्यादा उम्मीदें हैं। इन दोनों सीटों पर भी पूर्वांचली और दलित वोटरों की अच्छी तादाद है।
2020 में बदरपुर में पार्टी को 5.45% और गोकलपुर में 2.77% वोट मिले थे, जो इसके कुल वोट शेयर 0.74% के मुकाबले कहीं बेहतर थे। 2015 में भी पार्टी ने गोकलपुर में 20.57% और बदरपुर में 4.74% वोट जुटा लिए थे। पार्टी को उम्मीद है कि अगर उनका समीकरण फिट बैठ गया तो बीएसपी अपने को 17 साल बाद फिर से एक सम्मानजनक स्थिति में ला सकती है।












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