Delhi Election में भी अलग-थलग पड़ी कांग्रेस! क्यों पीछा छुड़ाने में जुटे हैं INDIA bloc वाले सहयोगी?
Delhi Election 2025: 2024 के लोकसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस दिल्ली में मिलकर चुनाव लड़ी। दोनों ही दल इंडिया ब्लॉक का हिस्सा हैं। अक्टूबर में हरियाणा विधानसभा चुनावों में भी दोनों दलों के बीच तालमेल की बात हुई थी,लेकिन गठबंधन नहीं हुआ। अब दिल्ली विधानसभा चुनावों में दोनों दल न सिर्फ अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं, बल्कि एक-दूसरे के खिलाफ पूरी तरह से मुस्तैद हैं।
खासकर महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के बाद देखा जा रहा है कि आम आदमी पार्टी (AAP) ही नहीं, इंडिया ब्लॉक में शामिल तमाम पार्टियां कांग्रेस से पीछा छुड़ानें में जुटी हुई हैं। दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की एक भरोसेमंद सहयोगी समाजवादी पार्टी (SP) भी अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के लिए बैटिंग करती दिख रही है। इससे लगता है कि कहीं न कहीं सहयोगी पार्टियां कांग्रेस से दूरी बनाने की कोशिश में हैं।

दिल्ली में सपा, आप के साथ
सोमवार को आप के चुनाव प्रचार की एक कड़ी के तहत आयोजित महिला अदालत में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने यह कहकर अपनी मंशा साफ कर दी कि 'जिस तरह से आप सरकार ने काम किया है, हमें लगता है कि वह एक और मौके की हकदार है।' दिल्ली में जब कांग्रेस पार्टी भी अकेले चुनाव लड़ रही है, तब सपा सुप्रीमो का इस तरह से आप का समर्थन करना कांग्रेस की परेशानियों को और बढ़ाने वाला है।
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अखिलेश ने जो कुछ कहा है उससे साफ है कि वह दिल्ली चुनाव में कांग्रेस को तबज्जो नहीं देना चाहते। पहले इंडिया ब्लॉक के नेतृत्व के लिए टीएमसी चीफ ममता बनर्जी का समर्थन और फिर दिल्ली चुनाव में आम आदमी पार्टी की वकालत करने से साफ है कि यूपी में लोकसभा में हुआ प्रयोग अब उन्हें बहुत रास नहीं आ रहा। वैसे भी यूपी में हाल ही में हुए विधानसभा की 9 सीटों पर उपचुनाव में पार्टी ने कांग्रेस के लिए एक भी सीट नहीं छोड़ी तो उसे चुनाव ही नहीं लड़ने का फैसला लेना पड़ा।
संसद और संसद के बाहर भी कई बार अलग-थलग दिखी कांग्रेस
दरअसल, इंडिया ब्लॉक के चेयरमैन होने के नाते कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे इसके नेता हैं। लेकिन, कांग्रेस अघोषित तौर पर लोकसभा में विपक्ष के नेता और पार्टी सांसद राहुल गांधी को इसके लिए आगे बढ़ाने की कोशिशों में जुटी हुई दिखती है।
यही वजह है कि संसद के शीतकालीन सत्र में सदन के अंदर और बाहर दोनों जगहों पर कई बार कांग्रेस अपने सहयोगियों के बीच अलग-थलग पड़ती दिखाई पड़ी है। चाहे संदिग्ध विदेशी अरबपति जॉर्ज सोरोस से जुड़ा मुद्दा हो या फिर उद्योगपति गौतम अडानी का।
संदीप दीक्षित को केजरीवाल के खिलाफ उतारकर आप को किया नाराज
खासकर दिल्ली में कांग्रेस पार्टी ने जिस तरह से आप संयोजक और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ नई दिल्ली सीट से अपने पूर्व सांसद संदीप दीक्षित को उतारा है, उससे दोनों दलों के रिश्ते में ज्यादा दूरी बढ़ गई है। एक वरिष्ठ आप नेता ने कांग्रेस के फैसले की आलोचना करते हुए कहा, 'क्या कांग्रेस दो बार मुख्यमंत्री रह चुके व्यक्ति के साथ इस तरह का बर्ताव करेगी, जिसने सरकार सही से चले यह सुनिश्चित करने के लिए कुछ महीने पहले इस्तीफा दे दिया है?'
कांग्रेस के 'दोषों' से पीछा छुड़ाने में जुट गए सहयोगी?
सपा के एक वरिष्ठ नेता ने भी इसी तरह की भावना जाहिर की है। उन्होंने कहा,'सहयोगी के तौर पर हम सबने बीजेपी के खिलाफ मिलकर लड़ा है। हम बीजेपी की ओर से किए गए हमलों को भी झेल रहे हैं,जबकि तथ्य यह है कि इसके लिए केवल कांग्रेस ही जिम्मेदार है,जो उस समय केन्द्र में सत्ता में थी। लेकिन, कांग्रेस को इसकी चिंता कम ही दिखती है।'
ईवीएम पर भी सहयोगी ही दिखा रहे हैं राहुल की अगुवाई वाली कांग्रेस को आईना
इससे पहले नेशनल कांफ्रेंस के नेता और जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और टीएमसी के सांसद अभिषेक बनर्जी ईवीएम पर सवाल उठाने को लेकर कांग्रेस की खिंचाई कर चुके हैं। महाराष्ट्र में इंडिया ब्लॉक चुनाव हारने के बाद इसे बहुत बड़ा मुद्दा बनाए हुए है, जिसमें कांग्रेस भी शामिल है और पार्टी के शीर्ष स्तर तक से इसपर संदेह जताया जा चुका है।
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कांग्रेस से पीछा छुड़ाने की होड़ में जुटे सहयोगी!
उससे पहले इंडिया ब्लॉक की कमान ममता बनर्जी को सौंपने की वकालत गठबंधन के शरद पवार और लालू यादव जैसे नेता तक कर चुके हैं। इस तरह से इस वक्त ऐसा लग रहा है कि लोकसभा चुनाव में इंडिया ब्लॉक के नाम पर विपक्ष ने कम से कम एकता की जो एक चुनावी धारणा तैयार की थी, वह तो तार-तार हो ही रही है, उसकी सबसे बड़ी भुक्तभोगी कांग्रेस बनकर उभरी है, जिससे पीछा छुड़ाने के लिए सहयोगियों में होड़ सी लग चुकी है।
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