Delhi Chunav 2025: 40% मुस्लिम आबादी वाले मुस्तफाबाद में मोहन बिष्ट को उतारकर BJP ने कैसे साधे 5 समीकरण?
Delhi Chunav 2025: दिल्ली की करावल नगर सीट से 5 बार के एमएलए मोहन सिंह बिष्ट का टिकट बीजेपी ने काटा तो उन्होंने सार्वजनिक तौर पर नाराजगी जाहिर कर दी। यहां तक कि 17 तारीख को निर्दलीय पर्चा भरने तक की बात कह दी। लेकिन, जैसे ही तीसरी सूची में भाजपा ने मुस्तफाबाद से पार्टी प्रत्याशी के तौर पर उनका एकमात्र नाम जारी किया, तो शायद उन्हें भी बात समझ में आ गई पार्टी ने पूरी रणनीति के तहत यह दांव चला है।
जब पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने डैमेज कंट्रोल के लिए बिष्ट से बात की और उन्हें पूरी रणनीति बताई तो वह भी कहने लगे कि अगर पार्टी को उनकी उपयोगिता मुस्तफाबाद में ज्यादा लग रही है तो वह वहां से भी चुनाव लड़ने को तैयार हैं। जबकि, पहले वह सीट बदलने के लिए राजी नहीं थे।

Delhi Chunav 2025: मोहन सिंह बिष्ट का मुस्तफाबाद क्षेत्र से नाता
2008 में परिसीमन से पहले मुस्तफाबाद करावल नगर विधानसभा का ही हिस्सा था। इस तरह से 1998 और 2003 में वह इस इलाके का भी प्रतिनिधित्व कर ही चुके हैं। बीजेपी के एक सूत्र ने वनइंडिया को बताया है कि 2022 के दिल्ली नगर निगम (MCD) चुनाव से पहले जो परिसीमन हुआ था, उसमें खुद मोहन सिंह बिष्ट का घर भी मुस्तफाबाद के वार्ड की ओर चला गया।
इसलिए पार्टी को लगा कि ऐसी टफ सीट पर बिष्ट जैसा मजबूत प्रत्याशी ही 'कमल' खिला सकता है।
Delhi Chunav 2025: पहाड़ी और पूर्वांचली वोटरों का गेम
बीजेपी सूत्र का कहना है कि करीब 22-23% पहाड़ी वोटर करावल नगर में भी हैं और इतने के ही लगभग मुस्तफाबाद में भी हैं। पहाड़ी वोटरों को मोहन सिंह बिष्ट का असल जनाधार समझा जाता है। इस तरह से पार्टी को उनकी सीट बदलने से उनके इस वोट बैंक में किसी तरह का असर पड़ने की संभावना नहीं दिखी।
इनके अलावा मुस्तफाबाद सीट पर करीब 22% पूर्वांचली वोटर भी हैं। करावल नगर में कपिल मिश्रा के तौर पर पूर्वांचली नेता को टिकट देकर बीजेपी ने इन दोनों वर्गों के करीब 50% वोटरों को साधने का दांव चला है। पार्टी को लगता है कि इस समीकरण का असर आसपास के कई अन्य सीटों पर भी पड़ सकता है।
Delhi Chunav 2025: हिंदू-मुस्लिम होने पर भाजपा को निश्चित फायदा
मुस्तफाबाद सीट पर करीब 40% मुसलमान वोटर हैं। इन्हीं को ध्यान में रखकर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस से लेकर असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम तक ने यहां मुस्लिम उम्मीदवारों पर ही दांव लगाया है।
यह इलाका 2020 में हिंदू-मुस्लिम सांप्रदायिक दंगों से भी प्रभावित हुआ था और ओवैसी ने तो इसके प्रमुख आरोपी और मास्टरमाइंड में से एक ताहिर हुसैन को टिकट ही दे दिया। वहीं आप ने आदिल अहमद खान और कांग्रेस ने अली मेंहदी को मौका दिया है।
सारे मुस्लिम उम्मीदवारों के बीच बीजेपी ने एक मजबूत हिंदू प्रत्याशी को उतारकर पूरा गेम अपने पक्ष में पलटने की चाल चली है। क्योंकि, अगर कांग्रेस उम्मीदवार चुनाव के दिन तक सक्रिय रहे, तो भाजपा का दांव काम कर सकता है और वह इस टफ सीट को भी अपने पाले में कर सकती है।
2015 के विधानसभा चुनाव में जब आप को 70 में से 67 सीटें मिली थीं और बीजेपी मात्र तीन सीट जीती थी, तब उनमें से एक सीट मुस्तफाबाद भी थी, जहां भगवा लहराया था। तब भी कांग्रेस और आप दोनों की उम्मीदवार मुसलमान थे।
Delhi Chunav 2025: पार्टी की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा
2022 में हुए एमसीडी चुनाव में मुस्तफाबाद के पांच वार्ड में से तीन बीजेपी के खाते में आए थे और दो पर कांग्रेस का कब्जा हुआ था। इसलिए बीजेपी को लगता है कि उसकी रणनीति इस बार निश्चित तौर पर कारगर साबित हो सकती है। पार्टी को कपिल मिश्रा को भी मौका देना था,जो पार्टी के लिए बहुत ही मुखर रहते हैं। उन्होंने 2015 में करावल नगर में आप के टिकट पर बिष्ट को ही हराया था और बिष्ट की शुरुआती नाराजगी उससे भी जोड़कर देखी जा रही है।
दिल्ली विधानसभा की सभी 70 सीटों के लिए 5 फरवरी को मतदान होना है और 8 फरवरी को वोटों की गिनती होगी। सारे नतीजे उसी दिन आ जाने की संभावना है।












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