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Delhi Chunav 2025: दिल्ली में विरोध करते-करते कैसे AAP की मददगार बन रही कांग्रेस? 5 संकेत

Delhi Chunav 2025: 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी और आम आदमी पार्टी (AAP)11 साल बाद दिल्ली में बीजेपी के खिलाफ औपचारिक तौर पर एकजुट हो गई थी। लेकिन, यह दोस्ती 6 महीने भी ठीक से नहीं चली और विधानसभा चुनावों के लिए दोनों ने अलग-अलग होने का फैसला किया। शुरू में कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी पर ताबड़तोड़ हमले शुरू किए। लेकिन, बीजेपी के लिए यह स्थिति चार दिन की चांदनी साबित हुई।

अब कांग्रेस के कुछ नेताओं को छोड़कर बाकी पार्टी अपने ऐक्शन से पूरी तरह से इस चुनाव में अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी की मदद करती नजर आ रही है। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की ओर से जो संकेत मिल रहे हैं, उससे साफ है कि इस चुनाव में भी उनकी असली लड़ाई बीजेपी से ही है और वह भाजपा को अपना दुश्मन मानते हुए उतर रहे हैं। आप पर पार्टी के कुछ नेता हमले भी कर रहे हैं तो वह चुनावी नूरा कुश्ती की तरह ही लग रही है।

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Delhi Chunav 2025: दिल्ली के बजाए राष्ट्रीय एजेंडे पर फोकस से आम आदमी पार्टी का काम होगा आसान!

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की अगुवाई वाले इंडिया गठबंधन, जिसमें आप भी शामिल है, ने बीजेपी सरकार के खिलाफ 'संविधान और आरक्षण बचाने' वाले नैरेटिव का दांव चला था और काफी हद तक सफल भी हो गया, क्योंकि बीजेपी को अपने दम पर लोकसभा में बहुमत नहीं मिला।

दिल्ली चुनाव में सोमवार (13 जनवरी) को सीलमपुर में आयोजित कांग्रेस की पहली रैली 'जय भीम, जय संविधान' के नाम से आयोजित होने जा रही है, जिसमें राहुल पहुंचने वाले हैं। संसद के शीतकालीन सत्र में कांग्रेस पार्टी ने डॉ भीमराव अंबेडकर के कथित अपमान को बहुत बड़ा मुद्दा बनाया था और इसी नैरेटिव के साथ वह पूरे देश में आंदोलन कर रही है।

दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस ने इसे ही अपने प्रमुख एजेंडे की तरह पेश किया है। इन दोनों मुद्दों पर आम आदमी पार्टी शुरू से कांग्रेस के साथ ही डटकर खड़ी रही है। इस तरह से कांग्रेस परोक्ष रूप से आम आदमी पार्टी की सहायता करती नजर आ रही है।

Delhi Chunav 2025: बीजेपी के झुग्गी-झोपड़ी अभियान को बेअसर करने का दांव?

बीजेपी ने इस बार दिल्ली के झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले मतदाताओं के बीच अपना जनाधार बढ़ाने के लिए बहुत ज्यादा जोर लगा रखा है। एक दिन पहले ही केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने झु्ग्गी-झोपड़ी वालों के साथ एक बड़ा कार्यक्रम किया है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें पीएम आवास योजना के तहत आवास भी आवंटित किए हैं।

झुग्गी-झोपड़ी में रहने वालों में बड़ी तादाद दलितों,पिछड़ों और गरीबों की है। माना जाता है कि ये वोटर पहले कांग्रेस के समर्थक रहे हैं, जो अब आम आदमी पार्टी की ओर शिफ्ट हो चुके हैं।

कांग्रेस की पहली रैली में इस वोट बैंक पर प्रमुखता से नजर है और उसकी रैली भाजपा की नई रणनीति को पूरी तरह से कुंद करने की रणनीति लग रही है। आप संयोजक केजरीवाल ने भी बीजेपी की रणनीति को लेकर उनपर निशाना साधा है। उन्होंने कहा है, "इनको (भाजपा) झुग्गी वालों से प्यार नहीं है। इनको चुनाव से पहले झुग्गी वालों के वोट चाहिए और चुनाव के बाद झुग्गी वालों की जमीन चाहिए। इनको उनकी जमीन से प्यार है और इनको उनकी जमीन से प्यार है।"

Delhi Chunav 2025: दूसरी लिस्ट के बाद सुस्त से पड़ती दिख रही है कांग्रेस

दिल्ली चुनाव की तारीखों से काफी पहले ही सत्ताधारी आम आदमी पार्टी ने सभी 70 सीटों के लिए उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए थे। उसके बाद कांग्रेस पार्टी ने भी भाजपा के मुकाबले बहुत ज्यादा सक्रियता दिखाई और 48 प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिए।

शुरू में कई सीटों पर आप के बड़े प्रत्याशियों के खिलाफ मजबूत उम्मीदवारों को उतारा, जिनमें नई दिल्ली से अरविंद केजरीवाल के खिलाफ पूर्व सांसद संदीप दीक्षित,कालकाजी से मुख्यमंत्री आतिशी मार्लेना के खिलाफ राष्ट्रीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अलका लांबा और जंगपुरा में पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के खिलाफ पूर्व मेयर फरहाद सूरी को मौका दे दिया।

लेकिन, उसके बाद बीजेपी 58 सीटों के प्रत्याशी घोषित कर चुकी है, लेकिन कांग्रेस ने एक कदम आगे नहीं बढ़ाया है। इस बीच कांग्रेस पार्टी और आम आदमी पार्टी समेत इंडिया ब्लॉक के बीच पूरी सियासी गणित बदला हुआ नजर आ रहा है और कांग्रेस के कुछ चुनिंदा प्रत्याशियों को छोड़कर कांग्रेस के सारे बड़बोले दिग्गज नेता साइलेंट नजर आ रहे हैं, जिनमें अजय माकन सबसे पहले नंबर पर हैं।

Delhi Chunav 2025: सिर्फ अलका लांबा और संदीप दीक्षित ही ने खोल रखा है आप और उसके नेताओं के खिलाफ मोर्चा

संदीप दीक्षित और अलका लांबा जैसे कांग्रेस नेता शुरू से आम आदमी पार्टी का व्यक्तिगत स्तर पर विरोध करते रहे हैं। संदीप दीक्षित की नाराजगी इस वजह से है कि केजरीवाल के कथित गलत आरोपों की वजह से उनकी मां और पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की न सिर्फ बदनामी हुई, बल्कि उनकी सरकार चली गई। वहीं लांबा आप से विधायकी करने के बाद कांग्रेस का हाथ पकड़ी हैं और उनकी आप नेताओं से अपनी निजी खुन्नस रही है।

बाकी कांग्रेस के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष अजय माकन ने शुरू में जिस तरह से आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल पर हमला बोला था, दो हफ्तों से वह पूरी तरह से चुनावी सीन से ही गायब लग रहे हैं।

केजरीवाल के खिलाफ एक प्रेस कांफ्रेंस बुलाकर वह जिस तरह से चुप हुए हैं, उसके बाद से अटकलें हैं कि उन्हें आप और उसके नेताओं के खिलाफ मुंह न खोलने की हिदायत दे दी गई है। उनके आरोपों के बाद आप ने उनपर कार्रवाई करने की मांग भी की थी और ऐसा नहीं होने की सूरत में कांग्रेस को इंडिया ब्लॉक से हटवाने की चेतावनी भी दे चुकी है। इस तरह से कांग्रेस के पीछे हटने के स्टैंड से आखिरकार आप को ही सहायता मिलने की संभावना पैदा हुई है।

Delhi Chunav 2025: AAP के ताजा पोस्टर में कांग्रेस के कुछ नेताओं को बीजेपी की 'कठपुतली' की तरह पेश करना

आम आदमी पार्टी ने दो नए पोस्टर जारी किए हैं, उनमें गिन-गिनकर उन कांग्रेस नेताओं को बीजेपी की कठपुतली की तरह पेश किया गया है, जो उसके खिलाफ बोल रहे हैं या बोलते रहे हैं। एक पोस्टर में आप ने संदीप दीक्षित, अजय माकन, अलका लांबा और दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के प्यादे की तरह दिखाया है।

दूसरी तस्वीर में बीजेपी नेताओं और असदुद्दीन ओवैसी के साथ आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के संदीप दीक्षित और अजय माकन को निकम्मा बताया है। इस तरह से लग रहा है जैसे दिल्ली में आम आदमी पार्टी के लिए मुख्य विपक्षी दल होने के नाते बीजेपी मुख्य प्रतिद्वंद्वी है, तो कांग्रेस के लिए भी सत्ताधारी आप के बजाए भाजपा ही मुख्य विरोधी है।

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