Delhi Chunav 2025: AAP के लिए पुरानी रणनीति क्यों हुई जरूरी, क्या सबसे मुश्किल चुनाव बना मजबूरी? 5 वजह
Delhi Chunav 2025: आम आदमी पार्टी (AAP) ने दिल्ली में पिछले दोनों ही विधानसभा चुनावों में लगभग एकतरफा जीत दर्ज की थी। इस बार उसके सामने पार्टी के शीर्ष नेताओं पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों की चुनौतियां हैं तो 10 साल की एंटी-इंकंबेंसी फैक्टर का भी सामना करना पड़ रहा है। इसलिए पार्टी फिर से अरविंद केजरीवाल की 'आम आदमी'वाली पुरानी छवि को भुनाने की कोशिशों में जुटी हुई है।
आम आदमी पार्टी के अंदर के लोगों के हवाले से द हिंदू ने एक रिपोर्ट दी है कि पार्टी के लोग भी मान रहे हैं कि यह चुनाव उनके लिए 2015 और 2020 के चुनावों की तुलना में बहुत ही ज्यादा मुश्किल चुनाव है। तब पार्टी ने दिल्ली की 70 सीटों में से क्रमश: 67 और 62 सीटें जीती थी।

Delhi Chunav 2025: केजरीवाल को कब महसूस हुआ, आप की रणनीति में बदलाव जरूरी है?
पिछले साल केजरीवाल समेत आप के दो और बड़े दिग्गज नेता मनीष सिसोदिया और संजय सिंह शराब घोटाले के आरोपों में तिहाड़ जेल में बंद थे। संजय सिंह के जमानत पर छूटने के बाद धीरे-धीरे ये सबी नेता जेल से बाहर आए।
अपनी रिहाई के करीब एक महीने बाद केजरीवाल ने पिछले साल 16 अक्टूबर को एलान किया था कि उनकी पार्टी आप के नेताओं को जेल में 'डालने' के बीजेपी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार की 'साजिश' की 'सच्चाई' बताने के लिए जनसंपर्क अभियान चलाएगी।
इसी इरादे से आप चीफ ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा था कि घर-घर जाकर बताएं कि केंद्र ने 'आप को खत्म करने के इरादे' से ही उसके बड़े नेताओं को जेल में डाला था। उसी दिन शाम में पूर्वी दिल्ली के खिचड़ीपुर में वह एक मंच से कुछ लोगों को संबोधित कर रहे थे। कुछ देर तक भाषण देने के बाद, वे अचानक मंच से उतरे और भीड़-भाड़ वाली सड़क पर 'पैदल' ही चल पड़े।
आधे घंटे से ज्यादा देर तक केजरीवाल इसी तरह से पैदल ही बढ़ने लगे। हाथ जोड़े रहे और रुक-रुककर लोगों को गले लगाने लगे, उनसे बातचीत करने लगे। जेड प्लस सुरक्षा के बावजूद लोगों से घुलने-मिलने की कोशिशें शुरू कर दी। शायद उन्हें लगा कि वह मंच से भाषण देकर दिल्ली के वोटरों में अब वह प्रभाव नहीं डाल पा रहे हैं, जो उनसे सीधा संपर्क करके डाल सकते हैं।
Delhi Chunav 2025: मतदाताओं से सीधे संपर्क के लिए 'पैदल मार्च' की रणनीति अपनाई
उस दिन शुरुआत थी। अगले दो महीने तक उन्होंने ऐसी कम से कम 15 पैदल मार्च निकाली। फरवरी तक उनकी ऐसी कई और पदयात्राएं देखने को मिल सकती हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक यह मतदाताओं से सीधे संपर्क के लिए सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। यह बीते चुनाव में आम आदमी पार्टी और उसके चीफ की ओर से अपनाई गई रणनीति से अलग है।
Delhi Chunav 2025: 2020 में वाहनों के काफिले के साथ रोडशो करने पर रखा था फोकस
2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में केजरीवाल गाड़ी के ऊपर से रोडशो करते दिखाई देते थे। भारी सुरक्षा घेरे में वह लोगों की ओर हाथ हिलाते हुए नजर आते थे। उस समय आप को सत्ता में आए पांच साल ही हुए थे। दिल्ली की जनता फ्री बिजली-पानी पाकर ही गदगद थी।
लेकिन, इस बार वह लोगों से सीधा संपर्क कर रहे हैं। कुछ देर रुक कर बातें करते हैं, फिर आगे बढ़ते हैं। मतलब, वह हर वोटर से सीधे संपर्क की कोशिश करना चाह रहे हैं।
Delhi Chunav 2025: 'आम आदमी' वाली पुरानी छवि को भुनाने में जुटे हैं केजरीवाल!
केजरीवाल की मौजूदा रणनीति को देखकर लग रहा है कि वह दिल्ली के वोटरों के बीच अपना 2015 से पहले वाला छवि पेश करना चाहते हैं। यह वो समय था, जब वह हाफ शर्ट और सैंडल पहनकर या मफलर लगाए एक 'आम आदमी' की तरह सड़कों पर घूमते नजर आते थे।
पार्टी के अंदर के एक शख्स के मुताबिक, 'बीजेपी ने केजरीवालजी और मनीषजी को जेल में डाल दिया, जमीनी स्तर पर शीर्ष नेतृत्व का अभाव था। हमें लगा कि हमें जनता से ज्यादा करीब से जुड़ना होगा और इसके लिए केजरीवालजी की बहुत ही ज्यादा जरूरत है। यही वजह है कि हमने पदयात्रा वाले आइडिया की ओर लौटने का फैसला किया है।'
पार्टी सूत्रों का कहना है कि वह ज्यादा से ज्यादा पैदल मार्च पर ही फोकस करने जा रही है और 2020 की तुलना में कम से कम रोडशो किए जाएंगे। आप के एक शीर्ष रणनीतिकार के मुताबिक, 'आप की लोकप्रियता एक तरह से अरविंद केजरीवाल की लोकप्रियता से ही जुड़ी हुई है। अगर वह किसी जनता की नजर से ओझल होते हैं तो पार्टी की लोकप्रियता जबरदस्त तरीके से गिर जाती है।'
Delhi Chunav 2025: सबसे मुश्किल चुनाव का सामना कर रही है 'आप'!
आम आदमी पार्टी के नेता स्पष्ट तौर पर मान रहे हैं कि उन्हें यह चुनाव बहुत ही ज्यादा चुनौतीपूर्ण लग रहा है। इनके मुताबिक 'पदयात्राओं और उम्मीदवारों की शुरू में ही घोषणाओं के पीछे यही वजह है....हम बीजेपी और कांग्रेस से आगे रहने की कोशिश कर रहे हैं।'
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जबसे केजरीवाल की रिहाई हुई है, उन्होंने पार्टी को उसके गढ़ दिल्ली में बचाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंकने में लगे हुए हैं। पदयात्राओं के साथ-साथ छोटी-छोटी सभाएं कर रहे हैं, प्रेस कांफ्रेंस करते हैं और इंटरव्यू भी दे रहे हैं। एक पार्टी सूत्र के मुताबिक 'इससे काफी असर पड़ा है और हमारे सर्वे बताते हैं कि अक्टूबर या नवंबर की तुलना में हम काफी बेहतर स्थिति में हैं।'
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