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BJP Delhi Election Results: दलित,मुस्लिम बहुल सीटों पर कैसे जीतकर भी हारी AAP? वोट बैंक खिसकने के 3 संकेत

BJP Delhi Election Results: दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे आम आदमी पार्टी (AAP) की भविष्य की राजनीति के लिए भी खतरनाक संदेश लेकर आए हैं। पार्टी 70 सीटों में से जिन 22 सीटों पर जीती है, उनमें से 14 सीटें दलित और मुस्लिम बहुल सीटें हैं। लेकिन,फिर भी पार्टी की पकड़ इसके इन मजबूत वोट बैंक पर ढीली पड़ चुकी है।

पिछले 12 वर्षों में मुसलमानों और दलितों ने 'आप' और उसके सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल के लिए भरोसेमंद जनाधार का काम किया है। इस बार भी पार्टी ने इन सीटों पर अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन जिस तरह से पार्टी का वोट शेयर इन सीटों पर गिरा है, वह इसके लिए बहुत ही चिंताजनक है और आगे चलकर पार्टी की जन्म स्थली में ही उसके पतन का कारण बन सकता है, इसके तीन संकेत भी मिल रहे हैं।

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Delhi Chunav Results: एक) दलित (SC) के लिए सुरक्षित सीटों पर AAP का वोट शेयर क्यों गिरा?

दिल्ली की 12 अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित सीटों में से इस बार AAP को चार सीटों पर बीजेपी के हाथों हार का सामना करना पड़ा। यह पहली बार हुआ है, जब इन सीटों पर पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है। क्योंकि, 2015 और 2020 के चुनावों में आप (AAP) ने इन सभी 12 सीटों पर जीत दर्ज की थी। सबसे बड़ी बात कि इस बार इन सुरक्षित सीटों पर आप के वोट शेयर में भी 15 से 20 फीसदी तक की गिरावट देखी गई है।

अगर इसे उदाहरण से समझें तो:-

सीमापुरी सीट पर 'आप' का वोट शेयर 2020 में 65.8% था, जो 2025 में घटकर 48.4% रह गया।

करोल बाग में यह गिरावट 62.2% से 50.8% पर आ गई।

पटेल नगर में 60.8% से घटकर 49% पर आ गया।

इस गिरावट की मुख्य वजह यह रही है कि दलित (अनुसूचित जाति) समुदाय के वोटर बड़ी तादाद में बीजेपी और कुछ कांग्रेस की ओर शिफ्ट हो गए। भाजपा इन सीटों पर पहले से काफी मजबूत हुई है और उसे चार सीटें मिली हैं,वहीं कांग्रेस का वोट शेयर भी यहां 1 से 10% तक बढ़ गया है।

BJP Delhi Election Results: दो) मुस्लिम बहुल सीटों पर AAP को क्यों लगा झटका?

दिल्ली की सात मुस्लिम बहुल सीटों पर 'आप' इस बार एक सीट हार भी गई और उसके वोट शेयर में भी गिरावट दर्ज की गई। जैसे- मुस्तफाबाद सीट आम आदमी पार्टी के हाथ से निकल गई और यहां बीजेपी की जीत हुई।

2020 में इस सीट पर 'आप' का वोट शेयर 53.2% था,जो 2025 में घटकर 33% रह गया। हालांकि, भाजपा का वोट शेयर 42% पर स्थिर रहा, लेकिन बाकी वोट एआईएमआईएम (AIMIM) (16.6%) और कांग्रेस (6%) में विभाजित हो गए।

ओखला सीट पर भी 'आप'को 24% वोट शेयर का नुकसान हुआ है। हालांकि,पार्टी यहां जीती गई,लेकिन एआईएमआईएम को 19% और कांग्रेस को भी 4% वोट मिले।

मटिया महल,बल्लीमारान और चांदनी चौक में भी कांग्रेस ने 6 से 11% तक 'आप' के मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाई।

सीलमपुर सीट एक अपवाद कही जा सकती है,जहां 'आप'के वोट शेयर में 3% की बढ़ोतरी हुई है। लेकिन, इसकी वजह केजरीवाल की पार्टी की लोकप्रियता नहीं, बल्कि 'आप'प्रत्याशी चौधरी जुबैर अहमद रहे,जो कांग्रेस छोड़कर पार्टी में शामिल हुए थे।

Delhi Chunav Results: तीन) 51 गैर- मुस्लिम बहुल सामान्य सीटों में सिर्फ 8 पर जीती AAP

दिल्ली की 51 सामान्य सीटों में से 'आप' केवल 8 सीटों (6 मुस्लिम बहुल सीटों को छोड़कर) पर ही जीत दर्ज कर सकी,जो इसकी बहुत ही खराब स्ट्राइक रेट का उदाहरण है।

2015 और 2020 में 'आप'ने इन सीटों पर शानदार प्रदर्शन किया था,लेकिन इस बार भाजपा ने इनमें से 43 सीटों पर कब्जा कर लिया है। इस तरह से इन सीटों पर 'आप'की स्ट्राइक रेट मात्र 15.7% रही है, जो इसकी पूरी दिल्ली में खिसकते जनाधार का बहुत बड़ा प्रमाण है।

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