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'भारत को कहां ले आए ये लोग', IPS की मौत पर केजरीवाल का फूटा गुस्सा, दोषियों के खिलाफ सख्त सजा की मांग

आम आदमी पार्टी (AAP) के मुखिया और दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने हरियाणा के दलित IPS अधिकारी वाई पूरन कुमार की कथित आत्महत्या पर गहरा दुख और गुस्सा व्यक्त किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि जाति आधारित उत्पीड़न ने इस अधिकारी को अपनी जान लेने पर मजबूर कर दिया।

वहीं, इस मामले में मृतक की IAS पत्नी की शिकायत पर हरियाणा के DGP शत्रुजीत सिंह कपूर और रोहतक SP नरेंद्र बिजार्निया समेत अन्य अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।

Arvind Kejriwal Photo

गुनहगारों के खिलाफ की सख्त सजा की मांग

शुक्रवार को 'एक्स' (X) पर एक पोस्ट शेयर करते हुए अरविंद केजरीवाल ने इस घटना को 'जातिगत उत्पीड़न' का परिणाम बताया और दोषियों के लिए कठोरतम सजा की मांग की। केजरीवाल ने लिखा, 'हरियाणा के दलित IPS अफसर पूरन कुमार जी को अपनी जाति को लेकर इतना उत्पीड़न झेलना पड़ा कि उन्होंने आत्महत्या कर ली। दोषी लोगों को जल्द से जल्द सख़्त से सख़्त सजा मिलनी चाहिए।'

मुख्य न्यायाधीश पर जूता फेंकने की घटना का भी किया जिक्र

उन्होंने हाल ही में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बीआर गवई पर जूता फेंकने के प्रयास की घटना का भी उल्लेख किया और कहा, 'देश के मुख्य न्यायाधीश पर जूता फेंका गया तो इनके ट्रोल सोशल मीडिया पर दलितों को बेइज्जत कर रहे हैं, बाबा साहेब अंबेडकर तक को गाली दे रहे हैं। आज भारत को ये लोग कहां ले आए हैं?

DGP और SP पर FIR दर्ज

IPS अधिकारी वाई पूरन कुमार, जो 7 अक्टूबर को चंडीगढ़ स्थित अपने आवास पर मृत पाए गए थे, की पत्नी IAS अधिकारी अमनीत पूरन कुमार की शिकायत पर चंडीगढ़ पुलिस ने हरियाणा के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

  • FIR में नाम: हरियाणा के महानिदेशक (DGP) शत्रुजीत सिंह कपूर और
    रोहतक के पुलिस अधीक्षक (SP) नरेंद्र बिजारणिया सहित 15 अफसरों पर एफआईआर दर्ज की गई।
  • धाराएं: IPC की धारा 108 (अपराध के लिए उकसाना), भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 3(5) और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(1)(r) के तहत मामला दर्ज किया गया है, जिनमें आत्महत्या के लिए उकसाने और जाति आधारित उत्पीड़न के आरोप शामिल हैं।

शिकायत के अनुसार, 2001 बैच के IPS अधिकारी पूरन कुमार को DGP कपूर सहित वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा 'व्यवस्थित अपमान, उत्पीड़न और जाति-आधारित भेदभाव' का सामना करना पड़ा। उनकी पत्नी ने आरोप लगाया कि लंबे समय से चल रहे प्रशासनिक उत्पीड़न ने उनके पति को इतना बड़ा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।

सुसाइड नोट में उत्पीड़न का जिक्र

पुलिस को अधिकारी के निवास से एक आठ-पेज का सुसाइड नोट भी मिला है। इस नोट में कथित तौर पर वर्षों के जाति-आधारित अपमान और सीनियर अधिकारियों द्वारा किए गए मानसिक उत्पीड़न का विस्तृत ब्योरा है। नोट में भेदभाव, आधिकारिक सुविधाओं को वापस लेने, छुट्टी और पदोन्नति से वंचित करने के कई उदाहरणों का उल्लेख है।

अमनीत पूरन कुमार ने अपनी शिकायत में यह भी बताया कि उनके पति को जाति के आधार पर निशाना बनाया और भेदभाव किया जा रहा था, जिसकी शिकायतें DGP सहित सीनियक अधिकारियों को करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने आरोपी अधिकारियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है, ताकि वे सबूतों के साथ छेड़छाड़ न कर सकें।

चंडीगढ़ पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है और इंस्पेक्टर जयवीर सिंह राणा को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस गंभीर घटना पर आपकी क्या राय है? क्या आप मानते हैं कि वरिष्ठ पदों पर बैठे अधिकारियों के खिलाफ ऐसी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए?

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