कौन है Al Falah यूनिवर्सिटी चेयरमैन अहमद सिद्दीकी? गिरफ्तारी, दिल्ली ब्लास्ट, UGC―किया ऐसा कांड सुन हिल जाएंगे
Al Falah University chairman Javad Siddiqui: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने अल फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को गिरफ्तार कर एक बार फिर शिक्षा जगत और सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
गिरफ्तारी जालसाजी, फर्जी मान्यता और कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामलों में हुई है, लेकिन इस केस की परतें खोलते जाएं तो मामला सिर्फ एक यूनिवर्सिटी तक सीमित नहीं रह जाता। इसमें UGC, प्रवर्तन निदेशालय, दिल्ली ब्लास्ट और यहां तक कि आतंकी नेटवर्क के संदिग्ध तार भी जुड़ते दिख रहे हैं।

जवाद अहमद सिद्दीकी कौन है? (Who is Javad Ahmad Siddiqui)
जवाद अहमद सिद्दीकी हरियाणा के फरीदाबाद जिले में स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी और अल फलाह ग्रुप के चेयरमैन हैं। वह अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट से भी जुड़े हुए हैं, जिसके तहत यूनिवर्सिटी और उससे संबंधित संस्थान संचालित किए जाते हैं। लंबे समय तक खुद को एक शिक्षाविद और समाजसेवी के तौर पर पेश करने वाले सिद्दीकी अब गंभीर आरोपों के घेरे में हैं।
जवाद अहमद सिद्दीकी की गिरफ्तारी क्यों हुई? (Javad Ahmad Siddiqui Delhi Arrest Case)
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने यह कार्रवाई विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी UGC की ओर से दर्ज कराई गई दो एफआईआर के आधार पर की है। इन एफआईआर में आरोप लगाया गया कि अल फलाह यूनिवर्सिटी ने मान्यता को लेकर फर्जी दावे किए और नियमों के खिलाफ संस्थान का संचालन किया। इन्हीं शिकायतों पर पहले प्रवर्तन निदेशालय ने भी जांच शुरू की थी।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, सिद्दीकी को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई और फिर औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें दिल्ली की एक अदालत में पेश किया गया, जहां कोर्ट ने क्राइम ब्रांच को चार दिन की पुलिस रिमांड दी, ताकि मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की गहराई से जांच की जा सके।

UGC से जुड़ा क्या है पूरा विवाद? (UGC Fraud Allegations)
UGC की शिकायत में दावा किया गया कि अल फलाह यूनिवर्सिटी ने नेशनल असेसमेंट एंड एक्रेडिटेशन काउंसिल यानी NAAC से मान्यता होने का झूठा प्रचार किया। आरोप है कि यूनिवर्सिटी की NAAC मान्यता की अवधि खत्म हो चुकी थी, लेकिन इसके बावजूद विज्ञापनों और दस्तावेजों में मान्यता का दावा किया गया।
जांच एजेंसियों का कहना है कि इसी कथित झूठी मान्यता के आधार पर छात्रों और अभिभावकों को गुमराह किया गया और दाखिले लेकर मोटी फीस वसूली गई। ED का आरोप है कि इससे करोड़ों रुपये की आय हुई, जिसे अपराध की आय माना जा रहा है।
ED की एंट्री और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप (ED Money Laundering Case)
UGC और दिल्ली पुलिस की एफआईआर के बाद प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया। ED ने जांच के दौरान अल फलाह ग्रुप से जुड़ी करीब 140 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की हैं। इनमें फरीदाबाद के धौज इलाके में 54 एकड़ जमीन, यूनिवर्सिटी की इमारतें, स्कूल, विभागीय भवन और हॉस्टल शामिल बताए गए हैं।
ED ने कोर्ट को बताया कि ये संपत्तियां प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट यानी PMLA के तहत अस्थायी रूप से कुर्क की गई हैं। एजेंसी का दावा है कि झूठी मान्यता के जरिए करीब 415 करोड़ रुपये से ज्यादा की आय अर्जित की गई।
दिल्ली ब्लास्ट से कैसे जुड़ा मामला? (Red Fort Blast Link)
यह केस तब और गंभीर हो गया, जब नवंबर 2025 में लाल किले के पास हुए कार ब्लास्ट की जांच में अल फलाह यूनिवर्सिटी का नाम सामने आया। इस धमाके में 15 लोगों की मौत हुई थी। जांच एजेंसियों के अनुसार, धमाके में इस्तेमाल की गई कार के ड्राइवर की पहचान डीएनए जांच से डॉ. उमर उन नबी के रूप में हुई, जो अल फलाह यूनिवर्सिटी में जनरल मेडिसिन के असिस्टेंट प्रोफेसर थे।
इसके अलावा यूनिवर्सिटी से जुड़े कुछ अन्य स्टाफ सदस्यों को भी गिरफ्तार किया गया। इनमें डॉ. मुजम्मिल गनई और डॉ. शाहीन सईद जैसे नाम शामिल बताए गए हैं। जांच एजेंसियों का आरोप है कि ये लोग कथित तौर पर व्हाइट कॉलर टेरर नेटवर्क का हिस्सा थे, जिसके तार जैश ए मोहम्मद और अंसार गजवत उल हिंद जैसे आतंकी संगठनों से जोड़े जा रहे हैं।
फरीदाबाद में कश्मीरी डॉक्टर की गिरफ्तारी का क्या है कनेक्शन? (Explosives Recovery Case)
अल फलाह यूनिवर्सिटी इससे पहले भी सुर्खियों में आई थी, जब फरीदाबाद में एक कश्मीरी डॉक्टर को गिरफ्तार किया गया था। उसके पास से करीब 360 किलो विस्फोटक सामग्री और बड़ी मात्रा में हथियार बरामद हुए थे। पुलिस के अनुसार, यह डॉक्टर भी अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़ा हुआ था और शिक्षक के तौर पर काम कर रहा था।
यह कार्रवाई फरीदाबाद पुलिस और जम्मू कश्मीर पुलिस की संयुक्त टीम ने की थी। इस घटना के बाद यूनिवर्सिटी और उसके प्रबंधन पर सुरक्षा एजेंसियों की नजर और गहरी हो गई थी।
अब तक की कार्रवाई चार पॉइंट में (Case Timeline Highlights)
- पहला, ED ने करीब 140 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच कर PMLA के तहत चार्जशीट दाखिल की।
- दूसरा, NAAC मान्यता को लेकर झूठे दावों का आरोप, जिससे छात्रों को गुमराह कर फीस वसूली गई।
- तीसरा, छापेमारी के दौरान नकदी, डिजिटल डिवाइस और अहम वित्तीय दस्तावेज बरामद किए गए।
- चौथा, आरोप है कि कुछ ठेके आरोपी के परिवार से जुड़ी कंपनियों को दिए गए और फंड की लेयरिंग कर मनी ट्रेल छिपाने की कोशिश की गई।
अब आगे क्या होगा?
जावेद अहमद सिद्दीकी फिलहाल पुलिस रिमांड पर हैं और उनसे लगातार पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियों का कहना है कि आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। यह मामला सिर्फ एक यूनिवर्सिटी के कथित फर्जीवाड़े तक सीमित रहेगा या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े और गंभीर सवाल खड़े करेगा, इसका जवाब जांच पूरी होने के बाद ही साफ हो पाएगा।












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