वह स्थान जहां भगवान राम ने खाये थे जूठे बेर, उसको नई पहचान देने जा रही है छत्तीसगढ़ सरकार
The place where Lord Ram had eaten the berries, Chhattisgarh government is going to give it a new identity
रायपुर, 7 अप्रैल। भगवान राम के ननिहाल छत्तीसगढ़ में अब माता शबरी के स्थान का विकास होने वाला है। छत्तीसगढ़ सरकार की तरफ से जानकारी दी गई है कि अब माता कौशल्या के धाम चंदखुरी के बाद अब शिवरीनारायण में भी विकास का काम पूरा हो चुका है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इसका लोकार्पण 10 अप्रैल को करेंगे। इस कार्यक्रम से साथ ही यहां 08 अप्रैल से तीन दिवसीय भव्य समारोह की शुरुआत भी हो जाएगी।

राम वनगमन पर्यटन परिपथ परियोजना के तहत हो रहा विकास
छत्तीसगढ़ से जुड़ी भगवान श्रीराम के वनवास काल की स्मृतियों को सहेजने और संस्कृति एवं पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राम वनगमन पर्यटन परिपथ परियोजना शुरू की गई है। जिसके अंतर्गत पहले चरण में चयनित 9 पर्यटन तीर्थों का तेजी से कायाकल्प कराया जा रहा है। इस परियोजना के तहत इन सभी पर्यटन तीर्थों की आकर्षक लैण्ड स्कैपिंग के साथ-साथ पर्यटकों के लिए सुविधाओं का विकास भी किया जा रहा है। 139 करोड़ रूपए की इस परियोजना में उत्तर छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले से लेकर दक्षिण छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले तक भगवान राम के वनवासकाल से संबंधित स्थानों का संरक्षण और विकास किया जा रहा है।

चंद्रखुरी में माता कौशल्या का मायका
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने रायपुर से लगे हुए ग्राम चंदखुरी में स्थित माता कौशल्या मंदिर में वर्ष 2019 में भूमिपूजन कर राम वनगमन पर्यटन परिपथ के निर्माण की शुरूआत की गई थी। इस परिपथ में आने वाले स्थानों को रामायणकालीन थीम के अनुरूप सजाया और संवारा जा रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार की इस महात्वाकांक्षी योजना से आने वाली पीढ़ी को अपनी सनातन संस्कृति से परिचित होने के अवसर के साथ ही देश और विदेश के पर्यटकों को उच्च स्तर की सुविधाएं भी मिलेंगी

छत्तीसगढ़ में भांजे के रूप में होती है भगवान राम को की पूजा
छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परम्परा में भगवान राम का अहम स्थान है। छत्तीसगढ़ में भगवान राम को की पूजा भांजे के रूप में होती है। रायपुर से केवल 27 कि.मी. की दूरी पर ग्राम चंदखुरी को माता कौशल्या की जन्मभूमि और श्रीराम का ननिहाल माना जाता है। छत्तीसगढ़ का प्राचीन नाम दक्षिण कोसल है।
रघुकुल शिरोमणि श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या है लेकिन छत्तीसगढ़ उनकी कर्मभूमि है। वनवास काल के दौरान अयोध्या से प्रयागराज, चित्रकूट सतना गमन करते हुए श्रीराम ने दक्षिण कोसल यानि छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के भरतपुर पहुंचकर मवई नदी को पार कर दण्डकारण्य में प्रवेश किया। मवई नदी के तट पर बने प्राकृतिक गुफा मंदिर, सीतामढ़ी-हरचौका में पहुंचकर उन्होनें आराम किया। इस तरह भगवान राम के वनवास काल का छत्तीसगढ़ में पहला पड़ाव भरतपुर के पास सीतामढ़ी-हरचौका को कहा जाता है।

छत्तीसगढ़ की संस्कृति में बसे हैं राम
छत्तीसगढ़ में रामायण काल की कई घटनाएं घटित हुई हैं, जिसका प्रमाण राज्य की लोक संस्कृति, लोक कला, दंत कथायें हैं। राम वन गमन पर्यटन परिपथ के तहत प्रथम चरण में सीतामढ़ी-हरचौका (जिला कोरिया), रामगढ़ (जिला सरगुजा), शिवरीनारायण (जिला जांजगीर-चांपा), तुरतुरिया (जिला बलौदाबाजार), चंदखुरी (जिला रायपुर), राजिम (जिला गरियाबंद), सप्तऋषि आश्रम सिहावा (जिला धमतरी), जगदलपुर और रामाराम (जिला सुकमा) का पर्यटन विकास किया जा रहा है।
कोरिया जिले के सीतामढ़ी को भगवान राम के वनवास काल के पहले पड़ाव के नाम से जाना जाता है। पौराणिक ,धार्मिक ग्रंथों में रामगिरि पर्वत का जिक्र आता है। सरगुजा जिले का यही रामगिरी-रामगढ़ पर्वत है। यहां स्थित सीताबेंगरा- जोगीमारा गुफा की रंगशाला को दुनिया की सबसे प्राचीन रंगशाला माना जाता है। मान्यता है कि वनवास काल में प्रभु रामचंद्र के साथ माता सीता ने यहां कुछ समय व्यतीत किया था, इसीलिए इस गुफा का नाम सीताबेंगरा पद गया ।

शिवरीनारायण में खाये थे भगवान राम ने जूठे बेर को मिलेगी नई पहचान
जांजगीर-चांपा जिले में कुदरती सौन्दर्य से परिपूर्ण शिवनाथ, जोंक और महानदी का त्रिवेणी संगम स्थान शिवरीनारायण है। इस तीर्थ का संबंध शबरी और नारायण होने के कारण इसे शबरी नारायण या शिवरीनारायण कहा जाता है। माना जाता है कि इसी स्थान पर भगवन राम को माता शबरी ने जूठे बेर राम खिलाए थे। यहां नरनारायण और माता शबरी का मंदिर है , जिसके पास एक ऐसा पेड़ है, इस पेड़ के पत्ते दोने के आकार के हैं। चंदखुरी के बाद इस स्थान यानि शिवरीनारायण में भी विकास कार्य पूरा हो जाने से छत्तीसगढ़ में पर्यटन तीर्थों की नयी श्रृंखला आकार लेने लगी है।
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