Sudan Gurung की बालेन सरकार में हुई वापसी, भ्रष्टाचार के आरोप के बाद गृह मंत्री के पद से दिया था इस्तीफा
Sudan Gurung Nepal Home Minister: नेपाल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला है। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के नेता सुदन गुरुंग की दो महीने बाद फिर से सरकार में वापसी हो गई है। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने उन्हें दोबारा गृहमंत्री पद की शपथ दिलाई। गुरुंग ने अप्रैल में अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचार, संपत्ति और कारोबारी संबंधों से जुड़े आरोपों के बाद इस्तीफा दिया था।
हालांकि सरकारी जांच में उन्हें राहत मिलने के बाद बालेन शाह सरकार ने उन्हें फिर कैबिनेट में शामिल कर लिया। उनकी वापसी अब नेपाल की राजनीति में नई बहस का विषय बन गई है।

Sudan Gurung RSP leader returns: आरोपों के बाद क्यों छोड़ना पड़ा था पद?
सुदन गुरुंग पर आरोप था कि उनके कारोबारी संबंध एक विवादित बिचौलिए दीपक भट्ट से थे। उन पर अज्ञात स्रोतों से संपत्ति बनाने और संपत्ति विवरण में गलत जानकारी देने के आरोप भी लगे थे। इसके अलावा गृहमंत्री रहते हुए उनके कुछ फैसले भी विवादों में रहे। खासकर पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और उनके सहयोगियों की गिरफ्तारी के आदेश को लेकर विपक्ष ने उन्हें घेरा था। बढ़ते दबाव के बीच उन्होंने अप्रैल में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
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जांच में क्या सामने आया?
सरकार द्वारा बनाई गई जांच समिति ने गुरुंग की संपत्तियों और जमीन से जुड़े मामलों की जांच की। समिति ने पाया कि उनके नाम और परिवार के नाम पर दर्ज जमीन और संपत्तियों में कोई स्पष्ट अनियमितता नहीं मिली। जांच रिपोर्ट के अनुसार उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर उनकी संपत्ति को असामान्य नहीं माना गया। हालांकि समिति उनके कुछ वित्तीय लेन-देन और शेयर निवेश से जुड़े मामलों पर अंतिम निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी, फिर भी उन्हें बड़ी राहत मिल गई।
बालेन शाह सरकार ने वापसी का फैसला क्यों लिया?
जांच में राहत मिलने के बाद सरकार ने माना कि फिलहाल गुरुंग के खिलाफ ऐसा कोई ठोस आधार नहीं है जिससे उन्हें कैबिनेट से बाहर रखा जाए। इसी वजह से उन्हें फिर गृहमंत्री बनाया गया। सरकार का तर्क है कि आरोप साबित नहीं हुए हैं और जांच में कोई बड़ा गलत काम सामने नहीं आया। हालांकि विपक्ष का कहना है कि जांच समिति सरकार के प्रभाव में थी और उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाए जा सकते हैं।
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वापसी के राजनीतिक मायने क्या हैं?
सुदन गुरुंग की वापसी को बालेन शाह सरकार की राजनीतिक मजबूती से भी जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार यह संदेश देना चाहती है कि केवल आरोपों के आधार पर किसी नेता को स्थायी रूप से राजनीतिक नुकसान नहीं होना चाहिए। दूसरी ओर विपक्ष इस मुद्दे को सरकार की विश्वसनीयता से जोड़ रहा है। आने वाले दिनों में यह मामला नेपाल की राजनीति में और गरमा सकता है, खासकर तब जब वित्तीय लेन-देन और निवेश से जुड़े कुछ सवाल अभी भी पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं।












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